चरण सिंह
पटना। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह यह नहीं सोच रहे हैं कि लालू राज के जंगल राज कहने के बावजूद पहले चरण के मतदान में महागठबंधन के बढ़त बना लेने की ख़बरें बाजार में घूम रही हैं। चुनाव की यह समीक्षा की जा रही है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उमीदवार न बनाए जाने पर बीजपी को नुकसान उठाना पड़ रहा हो। भले ही प्रशांत किशोर को बीजेपी द्वारा तैयार किया गया नेता बताया जा रहा हो पर प्रशांत किशोर की पार्टी शहरों में बीजेपी के वोट काटती नजर आ रही है।
बीजेपी ने नीतीश कुमार के फोटो तो लगाने शुरू कर दिए पर अभी तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। लालू राज को छोड़कर अपने राज पर चर्चा करना शुरू नहीं किया है। बिहार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लालू राज पर हमलावर होने पर यह संदेश जा रहा है कि बीजेपी नीतीश के 20 साल के शासन पर बात क्यों नहीं कर रही है। केंद्र सरकार के 11 साल के कार्यकाल पर बात क्यों नहीं कर रही है ? एक संदेश चुनाव में यह भी जा रहा है कि आखिर बीजेपी लालू राज पर इतनी चर्चा क्यों कर रही है ?
प्रधानमंत्री मोदी की भाषा तो लोकसभा चुनाव की तरह बिहार में भी इतनी स्तरहीन हो गई है कि कनपटी पर कट्टा लगाकर मुख्यमंत्री पद चोरी करने की बात कर रहे हैं। तेजस्वी की सरकार बनने पर कट्टे के राज की बात कर रहे हैं। भाई यदि नीतीश राज में इतना अच्छा काम हुआ है। यदि मोदी सरकार में इतने अच्छे काम हो रहे हैं तो फिर लालू राज पर वोट क्यों मांगे जा रहे हैं ? इसका मतलब यह है कि अपनी सरकार के बारे में कहने के लिए क्या कुछ नहीं है ?
बीजेपी अपनी असली गलती को नहीं सुधार रही है। ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न बनाए जाने की वजह से नीतीश समर्थक बीजेपी वाले प्रत्याशियों को वोट न देकर आरजेडी को वोट कर रहे हैं। नीतीश समर्थकों में यह खबर घर कर गई है कि बीजेपी नीतीश कुमार का करियर खत्म करना चाहती है। जानकारी तो यहां तक मिल रही है कि पहले चरण में बीजेपी से ज्यादा सीटें जदयू की आ जाएंगी।
दरअसल इन चुनाव में यादव और मुस्लिम लामबंद होकर महागठबंधन पर जा रहा है। नीतीश कुमार से इस बार मुस्लिम और महादलित दोनों कटे हैं। नीतीश के समर्थक बीजेपी से इसलिए भी नाराज हैं क्योंकि बीजेपी ने ललन सिंह और संजय झा को पूरी तरह से जदयू से तोड़ लिया है।








