साल 2021: भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की परियोजना आगे बढ़ती दिखी!

प्रेरणा जैन

र कैलेंडर वर्ष देश, समाज और दुनिया से जुडी तमाम तरह की खट्टी मीठी यादों को अपने दामन में समेटते हुए बिदा होता है। साल 2021 भी इसका अपवाद नहीं है। सवाल है कि इस बीते साल को किन खास बातों के लिए याद किया जाएगा या इस वर्ष की कौनसी ऐसी उल्लेखनीय बातें हैं, जिनकी यादें भारतीय इतिहास में दर्ज हो जाएंगी और भविष्य को भी प्रभावित करती रहेंगी?
आज से कुछ सालों बाद जब यह सवाल पूछा जाएगा तो जो लोग इस देश की विविधताओं से, इस देश के स्वाधीनता संग्राम की अगुवाई करने और उसमें कुर्बानी देने वाले महानायकों से और इस देश के संविधान से प्यार करते हैं, उनके लिए इस सवाल का जवाब देना बहुत आसान होगा। ऐसे सभी लोगों का यही जवाब होगा कि साल 2019 और 2020 की तरह यह साल भी भारतीय संविधान और देश की विविधताओं पर सांप्रदायिक नफरत से भरी विचारधारा के निर्मम हमलों का साल था। इन हमलों से आम आदमी के जीवन की दुश्वारियों में तो इजाफा हुआ ही, देश के संविधान और हमारे स्वाधीनता संग्राम के दौरान विकसित हुए वे उदात्त मूल्य भी बुरी तरह लहूलुहान हुए, जो भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भावनात्मक तौर पर इस देश की एकता और अखंडता बनाए रखने की गारंटी है।
बहुत मुमकिन है कि हिंदुत्ववादी विचारधारा के संगठन और विकास का झांसा देकर सत्ता में आए उनके लोग देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने मंसूबे को पूरा करने की दिशा में इस साल को अपने लिए एक उपलब्धि से भरा मान लें। वैसे सावरकर-गोलवलकर प्रणित हिंदुत्व की विभाजनकारी विचारधारा को बढ़त तो 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही मिलने लगी थी लेकिन उसके दूरगामी नतीजे 2019 से आना शुरू हुए और साल 2021 में तो वे बहुत साफ तौर नजर आने लगे।
साल खत्म होते-होते वाराणसी में सरकारी खजाने के 650 करोड़ रुपए से बने काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लोकार्पण के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रचा गया बेहद खर्चीला प्रहसन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह प्रहसन उसी गंगा नदी के किनारे रचा गया जिस गंगा में इसी साल कोरोना महामारी के दौरान मारे गए लोगों की लाशें तैरती हुई देखी गई थीं। पंथनिरपेक्ष संविधान की शपथ लेकर प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रहसन में विशुद्ध रूप से एक धर्म विशेष के नेता के रूप में नजर आए, ठीक उसी तरह जैसे बाबरी मस्जिद तोड़ कर बनाए जा रहे राम मंदिर के शिलान्यास के मौके पर पिछले साल नजर आए थे।
भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश के प्रधानमंत्री का इस तरह एक धर्म विशेष तक सीमित या संकुचित हो जाना संवैधानिक मूल्यों का संविधान की शपथ का मखौल उड़ाना है। यह स्थिति भारत के भविष्य को लेकर चिंतित और परेशान करने वाली है। ऐसी ही परेशान करने वाली घटनाएं हाल ही में हरिद्वार और रायपुर में धर्मसंसद के नाम पर हुए जमावड़े के रूप में हुई, जिसमें मुसलमानों की आबादी मिटाने का संकल्प लिया गया और हिंदुओं से अपील की गई कि वे किताब-कॉपी छोड़ कर हाथों में तलवार लें और ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें। एक तथाकथित महंत ने कहा कि अगर दस साल पहले वह संसद में होता तो उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गोलियों से उसी तरह छलनी कर देता जैसा नाथूराम गोडसे ने गांधी को किया था। साधु वेशधारी जिन लोगों ने अपने भाषणों में यह बातें कही, वे सभी अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के मंचों पर भी अक्सर मौजूद रहते हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी उनकी तस्वीरें देखी जा सकती हैं।
हरिद्वार की धर्म संसद में दिए भाषणों को सुनने के बाद सवाल उठता है कि क्या दुनिया के किसी भी सभ्य देश में इस तरह की बातों की अनुमति दी जा सकती है? पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में इस धर्म संसद में हुए भाषण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत का तालिबानीकरण अब एक सरकारी परियोजना की शक्ल लेता जा रहा है।
दुनिया भर में डंका बजने का आलम है ये कि मालदीव जैसे छोटे पड़ोसी देश तक में विपक्ष इस बात की माँग कर रहा है कि भारत से दूरी बनाकर रखी जाए क्योंकि उसका तालिबानीकरण मालदीव के हितों को नुक़सान पहुँचाएगा।
यह साल धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के अभूतपूर्व रूप से ध्वस्त होने के लिए भी याद रखा जाएगा, जिसके नतीजे के तौर पर देश में गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी किस स्तर तक पहुंच गई है, यह जानने के लिए ज्यादा पडताल करने की जरूरत नहीं है। इसकी स्थिति को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए बहुत आसानी से समझा जा सकता है। खुद सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत 80 करोड़ राशनकार्ड धारकों को हर महीने मुफ्त राशन दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरने का सिलसिला इस साल भी बना रहा और सबसे बुरी तरह पिटने वाली एशियाई मुद्रा बन गया। निर्यात में भी लगातार गिरावट दर्ज होती रही, जिसकी वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई। पिछले साल भारत सरकार ने अपना खर्च चलाने के लिए रिजर्व बैंक रिजर्व बैंक के रिजर्व कोष से एक बार नहीं, दो-दो बार पैसे लिए थे, इस साल उसने मुनाफे में चल रहे सरकारी उपक्रमों को धड़ल्ले से निजी क्षेत्रों को बेचा।
भारत सरकार भले ही दावा करे कि आर्थिक तरक्की के मामले में पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि वैश्विक आर्थिक मामलों के तमाम अध्ययन संस्थान भारत की आर्थिक स्थिति का शोकगीत गा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनडीपी ने तमाम आंकड़ों के आधार पर बताया है कि भारत टिकाऊ विकास के मामले में दुनिया के 190 देशों में 117वें स्थान पर है। अमेरिका और जर्मनी की एजेंसियों ने जानकारी दी है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के 116 देशों में भारत 101 वें स्थान पर है। संयुक्त राष्ट्र के प्रसन्नता सूचकांक में भारत के स्थिति में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। ‘वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक-2021’ में भारत को 139वां स्थान मिला है। 149 देशों में भारत का स्थान इतने नीचे है, जितना कि अफ्रीका के कुछ बेहद पिछड़े देशों का है। इस सूचकांक में पाकिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे छोटे-छोटे पड़ोसी देश भी खुशहाली के मामले में भारत से ऊपर है।
कुछ समय पहले जारी हुई पेंशन सिस्टम की वैश्विक रेटिंग में भी दुनिया के 43 देशों में भारत का पेंशन सिस्टम 40वें स्थान पर आया है। उम्रदराज होती आबादी के लिए पेंशन सिस्टम सबसे जरूरी होता है ताकि उसकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। भारत इस पैमाने पर सबसे नीचे के चार देशों में शामिल है। पासपोर्ट रैंकिंग में भी भारत 84वें स्थान से फिसल कर 90वें स्थान पर पहुंच गया है। यह स्थिति भी देश की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह खोखली हो जाने की गवाही देती है।
सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। लेकिन सच यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था के ढहने का सिलसिला कोरोना महामारी के पहले नोटबंदी के साथ ही शुरू हो गया था, जिसे कोरोना महामारी और याराना पूंजीवाद पर आधारित सरकार की आर्थिक नीतियों ने तेज किया है और जिसके चलते देश आर्थिक रूप से खोखला हो रहा है।
वैश्विक स्तर पर भारत की साख सिर्फ आर्थिक मामलों में ही नहीं गिर रही है, बल्कि लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी, मानवाधिकार और मीडिया की आजादी में भी भारत की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग इस साल पहले से बहुत नीचे आ गई है।
इस बीत रहे साल में संसद और चुनाव आयोग जैसी हमारी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं के पतन का सिलसिला भी पहले से तेज हुआ है। अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर आदि सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग तो सरकार ने जारी रखा ही, इसमें पेगासस नामक सॉफ्वेयर से विपक्षी नेताओं, सुप्रीम कोर्ट के जजों, नौकरशाहों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के फोन की जासूसी का एक नया आयाम और जुड़ गया, जिसकी जांच अभी सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जारी है।
आम आदमी को निराश, परेशान और चिंतित करने वाली तमाम घटनाओं के बीच एक राहत वाली बात यह रही कि एक साल से ज्यादा समय तक हर तरह के सरकारी और गैर सरकारी दमन का सामना करते हुए चले किसान आंदोलन ने सरकार को अपने कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर कर दिया। सरकार को वे तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े जिन्हें किसान अपने और अपनी खेती के लिए मौत का परवाना मान रहे थे। इसके बावजूद इस समय देश का जो परिदृश्य बना हुआ है, वह आने वाले साल में हालात और ज्यादा संगीन होने के संकेत दे रहा है।

Related Posts

भारतीय भक्ति काव्य परम्परा, ‌‌संगीत‌ की संगत में ‌गुज़रे तीन दिन!
  • TN15TN15
  • March 17, 2026

प्रोफेसर राजकुमार जैन विंध्य पर्वतमाला की तलहटी में‌‌…

Continue reading
समाजवादी राजनीति का आधार विचार और संघर्ष होना चाहिए न कि सत्ता
  • TN15TN15
  • March 17, 2026

नीरज कुमार   बिहार की राजनीति में एक…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

  • By TN15
  • March 17, 2026
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’

  • By TN15
  • March 17, 2026
पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’

हरियाणा : राज्यसभा चुनाव रिजल्ट के बाद कांग्रेस में कलह! कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

  • By TN15
  • March 17, 2026
हरियाणा : राज्यसभा चुनाव रिजल्ट के बाद कांग्रेस में कलह! कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

मुकेश सूर्यान को मिली असम चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी!

  • By TN15
  • March 17, 2026
मुकेश सूर्यान को मिली असम चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी!

टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी, इस पार्टी के लिए छोड़ी 3 सीट

  • By TN15
  • March 17, 2026
टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी, इस पार्टी के लिए छोड़ी 3 सीट

वाराणसी में गंगा की लहरों पर ‘नॉनवेज इफ्तारी’! कूड़ा नदी में फेंका, वीडियो बनाने वाले तहसीम सहित 14 गिरफ्तार

  • By TN15
  • March 17, 2026
वाराणसी में गंगा की लहरों पर ‘नॉनवेज इफ्तारी’! कूड़ा नदी में फेंका, वीडियो बनाने वाले तहसीम सहित 14 गिरफ्तार