इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भयंकर प्रदर्शन शुरू हो चुका है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही ‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ यानि JAAC ने 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करने की बात कही है। इसने कहा है ‘PoK के लोग 15 जुलाई को पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करेंगे।’ स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तान की सेना ने फौरन शहर खाली करने का अल्टीमेटम दिया है और ऐतिहासिक रूप से शांतिपूर्ण इलाके को ‘टेरर ज़ोन’ बताने की कोशिशों को सख्ती से खारिज किया है।
Pok में हालात तेजी से बिगड़ चुके हैं और हजारों लोग ईदगाह ग्राउंड पर मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों के नेताओं ने विदेशी मीडिया को पाकिस्तानी सेना का अत्याचार देखने के लिए आमंत्रित किया है। हालात उस वक्त तेजी से बिगड़े जब पिछले दिनों एक प्रदर्शन के दौरान असीम मुनीर के आदेश पर पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे लोगों पर फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें 30 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पीओके के प्रदर्शनकारियों ने इसकी तुलना ‘जालियावाला बाग’ नरसंहार से की है।
पीओके के नेता 15 जुलाई को करेंगे आजादी का ऐलान
प्रदर्शनकारियों ने 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी 38-सूत्रीय आर्थिक और संवैधानिक मांगों को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने प्रस्तावित मार्च के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी के लिए भारी हथियारों से लैस हजारों अतिरिक्त संघीय सुरक्षा बलों की मांग की है।
पीओके में हजारों की संख्या में सेना तैनात- पाकिस्तान की सेना ने पीओके में कम से कम 17 हजार से ज्यादा सेना के जवानों को रावलकोट भेजा है जो प्रदर्शन का केन्द्र है। सेना ने प्रदर्शनकारियों को चारों तरफ से घेर रखा है और हालात हिंसक होने पर भारी कत्लेआम की आशंका है।
48 घंटे का अल्टीमेटम- JAAC ने पाकिस्तानी प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इसके खत्म होने के बाद, रावलकोट, मुजफ्फराबाद, पुंछ और अब्बासपुर जैसे अहम इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध रैलियां और धरने शुरू हो गए हैं और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। 15 जुलाई से पहले राजधानी मुजफ्फराबाद तक एक बड़ा लॉन्ग मार्च आयोजित किया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान मौतें- पाकिस्तानी सेना के पहले किए गये फायरिंग में 30 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसक झड़पों में चार पुलिसवाले मारे गये हैं 174 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है। जरूरी सामान ले जा रहे लॉजिस्टिक्स ट्रकों में आगजनी की घटनाएं और प्रदर्शनकारियों पर सरकारी बलों की तरफ से गोलीबारी की खबरें शामिल हैं।
पीओके के नेताओं की मुख्य मांगे क्या हैं?
शरणार्थियों के लिए 12 सीटों का विवाद- मौजूदा राजनीतिक संकट JAAC की उस मांग की वजह से पैदा हुआ है जिसमें शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को खत्म करने की बात कही गई है। जहां प्रदर्शनकारी इन सीटों को इस्लामाबाद की तरफ से स्थानीय चुनाव के नतीजों में हेरफेर करने का जरिया मानते हैं वहीं PoK सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि ये सीटें संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं और पूरे संशोधन के बिना इन्हें खत्म नहीं किया जा सकता।
38-सूत्रीय आर्थिक मांगे- प्रदर्शनकारियों की मूल मागों में महंगाई, आटे दाल की किल्लत और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की तरफ से पीओके का आर्थिक दोहन है। पीओके में जो बिजली उत्पन्न किया जाता है उसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तानी पंजाब भेजा जाता है और पीओके के लोगों को काफी ज्यादा दरों पर बिजली दी जाती है। इसको लेकर भारी गुस्सा है।







