क्यों अहम हुआ विधानसभा चुनाव ? मोदी ब्रांड के अलावा और क्या लगा है दाव पर

द न्यूज़ 15
नई दिल्ली। 2019 के आम चुनावों जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी प्रचंड बहुमत के साथ वापस आए थे। उसके बाद इस साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को इसे देश का सबसे बड़ा चुनाव कहा जा सकता है| पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के चुनाव, जो देश की आबादी का पांचवां हिस्सा हैं, इस वक्त भी कोरोना महामारी से उबर रहा है। किसान आंदोलन और कोरोना महामारी के बाद ये देश में होने वाला सबसे बड़ा चुनाव है। इस चुनाव में आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन तो तैयार होगी ही साथ ही ‘मोदी ब्रांड’ की अग्निपरीक्षा भी है। दो साल बाद देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावी राज्यों में से चार में भाजपा की सरकार है। इसलिए ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भाजपा के लिए ये चुनाव नाक का सवाल है।
10 मार्च को पांचों राज्यों में चुनावी परिणामों के बाद पता चल जाएगा कि क्या भाजपा तीन कृषि कानूनों को निरस्त करके पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में किसानों की नाराजगी को बेअसर करने में कामयाब हुई है या नहीं। हालांकि केंद्र सरकार चुनाव में अपने खिलाफ माहौल को देखते हुए तीनों कृषि कानून पिछले साल ही रद्द कर चुकी है।
उत्तर प्रदेश में इस बार सत्ताधारी भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी लड़ाई मानी जा रही है। तो पंजाब में, मुकाबला त्रिकोणीय लगता है| उत्तर प्रदेश और पंजाब को छोड़कर उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, जहां भाजपा सत्ता में है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस को मणिपुर और गोवा में भाजपा से ज्यादा सीटें मिलीं लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई थी। क्योंकि कांग्रेस को आम आदमी पार्टी, निवर्तमान पंजाब विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिसे कांग्रेस ने 2017 में भारी अंतर से हराया था। लेकिन उस वक्त कांग्रेस का चेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह थे, लेकिन कैप्टन को किनारे करके कांग्रेस ने अपने लिए खाई तैयार की है या कोई फर्क नहीं पड़ा, ये चुनाव परिणामों के बाद ही पता लगेगा।

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