चरण सिंह
दिल्ली के करोल बाग़ में एक बहुत पुराना मंदिर को तुड़वा दिया जाता है और हिंदुत्व के ठेकेदार चुप्पी साध लेते हैं। यह है बीजेपी और दूसरे हिंदुत्व के ठेकेदार बनने वाले संगठनों का हिंदुत्व। क्या इसलिए क्योंकि इस मंदिर को तुड़वाने का आरोप आरएसएस के एक मंदिर की कमेटी पर लग रहा है। यह अपने आप में दिलचस्प है कि यह मंदिर साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है।
मतलब बीजेपी के साथ ही दूसरे हिन्दुओं के ठेकदार संगठन भी नफा नुकसान देखकर हिंदुत्व के मुद्दे को उठाते हैं। तो यह माना जाए कि बीजेपी का उद्देश्य धार्मिक उन्माद पैदा कर हिन्दू वोटबैंक को अपने पक्ष में बनाए रखना है। काम तो उसे पूंजीपतियों के लिए करना है। बताया जा रहा है कि आरएसएस के मंदिर के लिए 80 साल पुरानी मंदिर-दरगाह तुड़वा दी गई।
दरअसल झंडेवालान मंदिर के पास झुग्गी झौंपड़ियाँ हैं। ये झंडेवालान मंदिर कमेटी की आँखों की किरकिरी बनी हुई है। झंडेवालान मंदिर की कमेटी इस जगह को साफ कराकर मंदिर का विस्तार चाहती है। मतलब हिंदुत्व और मंदिर की बात करने वाले इन लोगों की भक्ति भक्ति राम, कृष्ण नहीं है बल्कि बीजेपी को लेकर है।
दिलचस्प यह है कि यहां पर कई देवताओं के मंदिर के साथ पीर रतननाथ की दरगाह भी है। इस मिले जुले स्वरूप के कारण हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग यहां आस्था व्यक्त करते हैं। पर बीजेपी को इससे क्या उनको तो झंडेवालान मंदिर का हित सोचना है। यह भी अपने आप में दिलचस्प है कि यह जगह नाथ परंपरा से जुड़ी मानी जाती है, जहां भैरवनाथ, शिव और अन्य देवताओं के साथ पीर रतननाथ की दरगाह भी है। इस मिले जुले स्वरूप के कारण हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग यहां आस्था व्यक्त करते हैं।
बताया जा रहा है कि करीब 1500 साल पहले गुरु गोरखनाथ के शिष्य रतननाथ हुए और करीब 80 साल पहले बाबा मनमोहन दास ने इस स्थान की स्थापना की थी। यहां बाबा मनमोहन दास और बाबा परिपूर्ण दास की समाधियां भी हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री भी इस मंदिर के टूटने पर चुप्पी साध गए हैं, जबकि वह नाथ परंपरा को मानने वाले बताए जाते हैं। साम्प्रदायिक सौहार्द का इससे बड़ा नजारा नहीं मिल सकता। दरअसल यह जगह सभी धर्मों की आस्था का केंद्र है। हरि, श्री, भोलेनाथ सब एक जगह विराजते हैं और मुस्लिम समुदाय भी यहां सजदा करता है। इसलिए इसे मंदिर-दरगाह कहा जाता है।







