‘हनुमान’ के दर्द को क्यों कुरेद रही बीजेपी?

 लाल गुलाब के बीच पीले फूल का राज समझिए

दीपक कुमार तिवारी

पटना। ‘मुझे अब भी 2021 का वह दिन याद है, जब संघर्षों के दौर से गुजर रहा था। मेरी पार्टी तोड़ दी गई, मुझे सभी पदों से हटा दिया गया। मेरी राजनीतिक पारी पर विराम लगाने की कोशिश की गई।’ चिराग को ये दर्द उस वक्त मिला था, जब केंद्र में पीएम मोदी की सरकार थी। अमित शाह तब भी बड़ी हस्ती थे और आज भी हैं। मगर, मोदी-शाह की मदद के लिए चिराग को लंबा इंतजार करना पड़ा। पीएम मोदी के कथित ‘हनुमान’ को आज भी वो ‘डर’ सता रहा है। एनडीए के सियासत में किनारे लगा दिए गए चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस की भाव बीजेपी ने अचनाक पटना से दिल्ली तक बढ़ा दी। पशुपति पारस की वजह से ही चिराग पासवान का पॉलिटिकल करियर दांव पर लग गया था। मगर, बीजेपी ने 2024 चुनाव में चिराग को 100% स्ट्राइक रेट वाला बना दिया।
सियासत में पावर बैलेंस बड़ा जरूरी होता है। जिसके माथे पर 100% स्ट्राइक रेट वाला तमगा लगा हो, उसको कंट्रोल करना तो और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। पहले पटना में पशुपति पारस की बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से मुलाकात हुई। इसके बाद अमित शाह से मिलने दिल्ली में लाल गुलाब के बीच में पीले फूल वाले गुलदस्ते के साथ अपने दूसरे वाले भतीजे को लेकर मिलने पहुंचे। राजनीति में ऐसे मेल-मिलापों के बड़े मायने होते हैं। चिराग पासवान कम से कम इतना तो समझते ही होंगे कि जिसने उनको एक समय पैदल कर दिया था। अब वो सत्ता के ‘कंधे’ पर सवार होते दिख रहा है।लिहाजा, चिराग की बेचैनी बढ़ी हुई दिख रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में पांव जमाने के लिए चाचा-भतीजा दोनों को मोदी और नीतीश की जरूरत है। पासवान परिवार में सियासी जंग अब शह-मात में बदलती दिख रही है। शह-मात का ये ‘खेल’ एक तरफा न हो, इसके लिए बड़ी पार्टियां बैलेंस बना रही हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक बार फिर चिराग पासवान बने हैं। इसके बाद उन्होंने एक भावुक लेटर सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें 2021 को याद किया है। चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि ‘एक बार पुनः आप सभी ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, मैं विश्वास दिलाता हूं कि आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। आप सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के विश्वास की डोर कभी टूटने नहीं दूंगा। आप सभी ने मुझपर विश्वास जताया, इसके लिए हृदय से आप सभी का धन्यवाद और आभार प्रकट करता हूं। बीते कुछ वर्षों में आपलोगों के साथ, सहयोग और समर्पण की वजह से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया कीर्तिमान रचा है।’
2024 लोकसभा चुनाव को याद करते हुए चिराग पासवान ने लिखा कि ‘100% स्ट्राइक रेट के साथ सभी पांच सीटें हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई में हमलोगों ने प्रचंड जीत हासिल की। अभी विधानसभा चुनाव सामने है, और जिस तरीके से हमलोगों ने लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर जीत हासिल की, उसी प्रकार विधानसभा चुनाव में भी सभी सीटें जीतकर एकबार फिर से बिहार में एनडीए की सरकार बनाना हमारा लक्ष्य है।’
इसी चिट्ठी में चिराग ने 2021 को भी याद किया है, जिसमें कहा, ‘मुझे अब भी 2021 का वह दिन याद है, जब संघर्षों के दौर से गुजर रहा था। मेरी पार्टी तोड़ दी गई, मुझे सभी पदों से हटा दिया गया। मेरी राजनीतिक पारी पर विराम लगाने की कोशिश की गई। लेकिन, यह आपलोगों का स्नेह, समर्थन और विश्वास ही था कि आपलोगों ने मुझे ना टूटने दिया और ना ही झुकने दिया। आपलोगों ने समर्पण भाव से मेहनत की और आज परिणाम सबके सामने है।’
बिहार फर्स्ट- बिहारी फर्स्ट को लेकर चिराग ने कहा, ‘एक बार पुनः आपसभी ने मुझपर भरोसा जताकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा है। मैं, आप सभी सम्मानित पार्टी पदाधिकारियों और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का आभारी रहूंगा। श्रद्धेय रामविलास पासवान जी के सपनों को पूरा करने के लिए हम सभी संकल्पित हैं। उनके सपने, विजन ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ को बिहार के हर घर तक पहुंचाना एकमात्र लक्ष्य है, और ये आप सभी के साथ और सहयोग से ही संभव है। मैं आग्रह करता हूं कि आइए, हम मिलकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक नई उंचाई दें।’
दरअसल, हाल के दिनों में चिराग पासवान ने अपने चार बयानों से केंद्र की मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी। कहा जा रहा है कि बीजेपी ने चिराग के बयानों को पसंद नहीं किया।
दलित वर्ग की जातियों में उपवर्गीकरण की अनुमति वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई।
केंद्रीय सचिवालय में कुछ पदों को लेटरल एंट्री से भरने का चिराग पासवान ने विरोध किया।
वक्फ संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने को लेकर बयानबाजी की।
देशभर में जातीय जनगणना की मांग को लेकर चिराग पासवान ने मीडिया में बयान दिया।ऐसे में माना जा रहा है कि चिराग पासवान अगर बीजेपी को असहज करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ये संकेत चिराग के चाचा और चचेरे भाई की अमित शाह से मुलाकात से मिलता है। चिराग के चाचा और चचेरे भाई ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी चिराग के हर कदम का जवाब देने के लिए तैयार है। चिराग के पांच सांसदों के साथ अलग रुख अपनाने की खबरों के बीच बीजेपी की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चिराग का रूख अगर यही रहा तो अभी सिर्फ ‘विपरीत प्रतिक्रिया’ आई है, ये ‘बराबर प्रतिक्रिया’ में बदल सकती है।

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