“हमें हमेशा क्यों लगता है कि हम ही सही हैं”

“मैं सही हूं और बाकी लोग गलत हैं।”

 

ये सोच इंसानी स्वभाव का हिस्सा है, जो लगभग हर व्यक्ति के अंदर कहीं न कहीं मौजूद होती है। अक्सर हम उस सोच को सही मानते हैं जिसे समाज, परिवार या हमारी परवरिश ने स्वीकार किया है। ऐसे में जब कोई हमारी मान्यता को चुनौती देता है, तो हमें असुरक्षा महसूस होती है। इसलिए हम ज़ोर देकर कहते हैं – “मैं सही हूं! चाहे बहस किसी छोटे मुद्दे पर हो या जीवन के बड़े फ़ैसलों पर, अक्सर हमें यही लगता है कि हमारी सोच, हमारा नजरिया, और हमारे तर्क बिल्कुल ठीक हैं। हममें से अधिकतर लोग अपने विचारों, निर्णयों और दृष्टिकोण को लेकर यह मान लेते हैं कि *हम ही सही हैं। कोई अपने आप को ग़लत मानना ही नहीं चाहता ।पता नहीं क्यों सब को यही लगता है कि वो जो कर रहे हैं वो सही है और दूसरे जो लोग कर रहे हैं सब ग़लत है । समय है सोच बदलने की । बिलकुल सही कहा गया हैं ।आप हमेशा सही नहीं हो सकते हैं आपको हमेशा सही होने का दावा नहीं करना है – मेरी जानकारी सीमित है और मैं गलत भी हो सकता हूँ, खासकर अगर जानकारी अधूरी हो या संदर्भ ठीक से न समझा गया हो। यह बात मान लेनी चाहिए। अगर आपको किसी उत्तर में संदेह हो, तो सवाल उठाना बिलकुल ज़रूरी और स्वागत योग्य है। यह सोच कभी-कभी आत्मविश्वास की निशानी होती है, तो कभी अज्ञानता की। जब हम अपनी बात को अंतिम सत्य मान लेते हैं, तो सामने वाले की बात को सुनने, समझने और स्वीकार करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।कोई नहीं लगभग हर इंसान को यही लगता है कि वही सबसे सही है। हर इंसान अपने ज्ञान, समझ और क्षमता के अनुसार ही खुद को और बाकी लोगों को आंकता है। जब इंसान अपने सोच विचार का तालमेल दूसरे के साथ नहीं बैठा पाता तो उसे लगता है दूसरा गलत है। खुद पर जरूरत से ज्यादा यकीन और अहंकार भी ऐसी स्थिति का कारण बनता है। कुछ लोगों में आत्म-सम्मान बहुत ऊँचा होता है और उन्हें अपनी अहमियत का ज़बरदस्त एहसास होता है, और आमतौर पर उनका अहंकार भी बढ़ा हुआ होता है। इस श्रेणी में आने वाले लोगों में हमेशा सही होने पर ज़ोर देने की प्रबल इच्छा होती है, भले ही उनके सामने भारी विरोधाभासी सबूत मौजूद हों। हमारा ‘अहं’ भी बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। किसी भी बहस या मतभेद में हार मानना हमारे अहं को चोट पहुंचाता है। इसलिए: -हम अपने विचार पर अड़े रहते हैं, भले ही सामने वाला सही बात कह रहा हो।सही साबित होने की चाह में हम तर्क को भी पीछे छोड़ देते हैं।जो लोग इस बात पर इतने आश्वस्त होते हैं कि वे सही हैं और दूसरा व्यक्ति गलत, वे सूचना पर्याप्तता के भ्रम से ग्रस्त हो सकते हैं। आप ही नहीं सब यही समझते हैं ।झगड़े ‌‌‌‌‌‌‌‌की जड भी ही यही है । कचहरी इसी के कारण गुलजार रहती है । तलाक इसी कारण होते हैं । मुझे तो लगता है कि जिस दिन यह मानना बंद हो जाएगा कि मैं सही हूं दुनिया घूमनी बंद हो जाएगी । सोचते रहिए आप सही सोच रहे हैं ।अगर आप सही और गलत का आंकलन करने में सक्षम है तो हो सकता है कि आप सही हो। क्योंकि हर इंसान अलग होता है और उसकी सोच अलग। तो आप अपने हिसाब से सही और दूसरे लोग अपने हिसाब से सही। सब अपनी जगह सही है। असल में, यह धारणा कि “मैं ही सही हूं”, कई बार हमारे **अहंकार* या *संकीर्ण दृष्टिकोण* से उपजती है। हमें लगता है कि हमारा अनुभव, हमारी सोच, हमारी समझ सबसे बेहतर है। लेकिन क्या हर स्थिति में यह सच होता है? हर इंसान की सोच, परवरिश, अनुभव और परिस्थितियाँ अलग होती हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि सब वैसा ही सोचें जैसे हम सोचते हैं, एक तरह की मानसिक संकीर्णता है। जब हम दूसरों की बातों को नहीं सुनते, तो हम सीखने और बढ़ने के अवसर भी खो देते हैं।समस्या तब शुरू होती है जब “मैं सही हूं” का भाव, “तू गलत है” में बदल जाता है।* यह मनमुटाव, टकराव और अंततः रिश्तों में दरार की वजह बन सकता है। परिवार, समाज और देश – हर स्तर पर यह बात लागू होती है। समाधान यह है कि – सुनना सीखें:* दूसरों की बातों को पूरी ईमानदारी से सुनिए, चाहे आप उनसे सहमत हों या नहीं।संवाद करें, विवाद नहीं:* अपनी बात कहिए, लेकिन सामने वाले की बात को भी समझिए।
गलती मानना सीखें:* अगर आपसे गलती हुई है, तो उसे स्वीकार करना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता है। दृष्टिकोण बदलें:* हर बात को सही या गलत के चश्मे से देखने की बजाय, उसे एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश करें।”हमें लगता है हम ही सही हैं” – यह सोच स्वाभाविक है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह हमेशा सच हो।सच्चा ज्ञान तब शुरू होता है जब हम मानते हैं कि हमें सब कुछ नहीं आता।* विनम्रता और खुला मन हमें बेहतर इंसान बनाता है – और यही एक स्वस्थ समाज की नींव है। अगर आप चाहें तो मैं इस लेख को विस्तार में और भी बड़ा कर सकता हूँ, या इसमें किसी विशेष उदाहरण को शामिल कर सकता हूँ।मनुष्य का दिमाग इस तरह विकसित हुआ है कि वह अपनी सोच को प्राथमिकता देता है। जब हम कोई राय बनाते हैं, तो हमारा दिमाग सिर्फ़ उन्हीं तथ्यों और सूचनाओं पर ध्यान देता है जो हमारी पहले से बनी राय का समर्थन करते हैं।इसका मतलब:-जो चीज़ हमें सही लगती है, हम उसी के पक्ष में सबूत ढूंढते हैं। जो बातें हमारी राय के ख़िलाफ़ हों, उन्हें अनदेखा कर देते हैं।जब हम खुद को सही मानते हैं, तो हमें संतोष और मानसिक शांति मिलती है। यह हमें आत्मविश्वास देता है, भले ही वह आत्मविश्वास भ्रम पर ही क्यों न टिका हो ।यही कारण है कि सही होने की आदत, धीरे-धीरे ज़िद बन जाती है। मानव जीवन का स्वभाव ही ऐसा है कि वह कभी अपनी गलती नहीं मानता। स्वार्थ और अहंकार से ग्रसित मनुष्य केवल मात्र अपना ही पक्ष सामने रखता हूँ और अपने आप कोई सही मानता है। बस यही कारण है कि आज के युग में कोई किसी का सगा नहीं है । हर कोई हर किसी से सिर्फ़ नफ़रत ही करता है। आपसी प्रेम और सम्मान न जाने कहाँ खो गया। हर मनुष्य को अपने अंदर से इस अहम को निकालने की आवश्यकता है कि सिर्फ़ मैं ही सही।
ऊषा शुक्ला

  • Related Posts

    दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!
    • TN15TN15
    • July 22, 2026

    खाना-पानी की व्यवस्था के साथ ही व्यवस्थित रूप…

    Continue reading
    सरकार से दो-दो हाथ करने के मूढ़ में दिल्ली पहुंचा देश का युवा!
    • TN15TN15
    • July 21, 2026

    20 को दिल्ली में संसद मार्च के बाद…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ‘ऐसे नहीं जाने दे सकते…’, नीट पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से क्या कहा?

    • By TN15
    • July 24, 2026
    ‘ऐसे नहीं जाने दे सकते…’, नीट पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से क्या कहा?

    ‘ऐसे नहीं जाने दे सकते…’, नीट पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से क्या कहा?

    • By TN15
    • July 24, 2026
    ‘ऐसे नहीं जाने दे सकते…’, नीट पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से क्या कहा?

    ‘अहंकार आपको ले डूबेगा’, PM मोदी के वीडियो जारी करने पर RJD सांसद की दो टूक

    • By TN15
    • July 24, 2026
    ‘अहंकार आपको ले डूबेगा’, PM मोदी के वीडियो जारी करने पर RJD सांसद की दो टूक

    10 साल की कैद और 1 करोड़ तक का जुर्माना… पेपरलीक के खिलाफ बिल लाने की तैयारी में सरकार

    • By TN15
    • July 24, 2026
    10 साल की कैद और 1 करोड़ तक का जुर्माना… पेपरलीक के खिलाफ बिल लाने की तैयारी में सरकार

    ‘मैं कमजोर महसूस कर रहा हूं लेकिन…’ सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बीच अभिजीत दीपके का बड़ा बयान

    • By TN15
    • July 24, 2026
    ‘मैं कमजोर महसूस कर रहा हूं लेकिन…’ सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बीच अभिजीत दीपके का बड़ा बयान

    सीटू ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

    • By TN15
    • July 24, 2026
    सीटू ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर दी श्रद्धांजलि