White Cataract Surgery : चाइल्ड पीजीआई में हुई बाल मरीज के बुजुर्ग तीमारदार की सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी

White Cataract Surgery : बच्चे को आरबीएसके और बुजर्ग को मिला आयुष्मान भारत योजना का लाभ

नोएडा ।  पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (चाइल्ड पीजीआई)  में एक बाल मरीज के बुजुर्ग तीमारदार की सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी की गयी। दिलचस्प यह है कि सर्जरी बुजुर्ग तीमारदार के आग्रह पर की गयी। यहां बच्चों का उपचार होता है।

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के नेत्र रोग विभाग में 10 वर्षीय बच्चे को जन्मजात सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए भर्ती कराया गया, जहां पर उसके मोतियाबिंद की सर्जरी आरबीएसके योजना के अंतर्गत की गई। बच्चे की सर्जरी के लिए आगरा के नेत्र रोग चिकित्सक द्वारा जनरल एनेस्थीसिया में जान के जोखिम की बात करके सर्जरी के लिए मना कर दिया गया था। मोतियाबिंद की वजह से बच्चा किताब नहीं पढ़ पाता था, जिसकी वजह से उसकी एक वर्ष की पढ़ाई का भी नुकसान हुआ।  बच्चा अत्यंत ही गरीब परिवार का है और वह अपनी मां और भाई के साथ अपने नाना के घर रहता है। बच्चे के नाना और उसकी मां के पास आय का कोई स्रोत नहीं है और वह किसी तरह से अपना और अपने बच्चों का जीवन यापन करते हुए उन्हें पढ़ा रहे हैं। बच्चे की सफल सर्जरी को देखते हुए बच्चे के 65 वर्षीय नाना ने नेत्र रोग विभाग के चिकित्सक से अपने सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए काफी आग्रह किया और अपनी आर्थिक हालत के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि ‘मेरी सर्जरी इसके अलावा और कहीं नहीं हो पाएगी’। मरीज के आग्रह और उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए डॉ विक्रांत शर्मा ने संस्था के निदेशक प्रो अजय सिंह से बात की। इस पर निदेशक ने अपनी सहमति जताई और मरीज को सर्जरी के लिए भर्ती कर लिया गया।

प्रो. अजय सिंह ने बताया -मरीज की आंखों का मोतियाबिंद कई वर्ष पुराना था एवं वह पूरी तरह से पका हुआ था। मोतियाबिंद ज्यादा पका होने के कारण और अन्य बीमारियों की वजह से मरीज की सर्जरी करना काफी दुष्कर कार्य था। चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीज को दवा के माध्यम से स्थिर करके सर्जरी के लिए फिट बनाया गया। उसके बाद नेत्र रोग चिकित्सक ने मरीज की सर्जरी एमआईसीएस के माध्यम से फेको विधि द्वारा की।

डॉ विक्रांत शर्मा ने बताया- मरीज की दाहिनी आंख से मोतियाबिंद को हटाते हुए 2.2 मिली मीटर के इंसिजन द्वारा फोल्डेबल लेंस को डाला गया। फोल्डेबल लेंस डालने का सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह होता है कि, यह एक छोटे से इंसिजन के माध्यम से आंखों के अंदर डाला जा सकता है और यह अंदर जाकर अपना आकार ले लेता है।

आम तौर पर इस सर्जरी में 25000 के आसपास खर्च आता है किंतु मरीज की यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क हो गई। सर्जरी करने वाले चिकित्सकों में डॉ विक्रांत शर्मा एवं उनके टीम के सदस्य शामिल रहे।

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