कहां खो गई होली की अलहड़ता और मौज-मस्ती!

स्वार्थ के रंग चढ़ते जा रहे हैं होली के अबीर, गुलाल और रंग पर भी

चरण सिंह राजपूत
ब कोई त्योहार आता है तो बचपन याद आ जाता है। होली त्योहार तो ऐसा त्योहार है जिसका इंतजार कई महीने से होता था। भले ही आज तारीख में गांवों में होली के ही दिन ढोली से होली खेली जाती हो पर एक समय ऐसा था कि होल से कई दिन पहले होलियारे ढोल की थाप पर होली गाते थे, स्वांग भरे जाते थे। हम कई साथी मिलकर ढोल का इंंतजार न कर कनस्तर से ही होली खेलनी शुरू कर देते थे। भले ही गांवों के बुजुर्ग हमारे शोर-शराबे से नाराज होते हों पर हम लोग थे कि कहां मानने वाले थे। रात को एक-दो बजे तक चांदनी रात में गांवों में शोर-शराबा होता था। होली गाई जाती थी। ज्यों-ज्यों समय की व्यवस्तता बढ़ती गई त्यों-त्यों त्योहार की रंगत भी फीकी पड़ती गई। यह भी कहा जा सकता है कि ज्यों-ज्यों लोगों के पास पैसा आ गया त्यों-त्यों तीज-त्यौहार औपाचारिकता बनते गये। आज की तारीख में यदि त्योहारों की बात करें तो त्योहारों में भी लोग उन लोगों में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं जिनसे कुछ स्वार्थ जुड़े होते हैं। जो मेल-मिलाप भाईचारे के लिए होता था वह स्वार्थ में बदलता गया।

आज होली का त्योहार है चाहे आप बाजार में चले जाएं, शहर में चले जाएं, गांवों में चले जाएं जिधर देखो उधर औपचाकिरता ही दिखाई दे रही है। प्यार-मोहब्बत और का यह त्योहार आधुनिकता के बदले रूप एन्जॉव का रूप लेता जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों के लिए होली का मतलब तो बस एक दिन की छुट्टी ही रह गया है। जो लोग अधेड़ हो चुके हैं और गांव-देहात से संपर्क रखते हैं। उन्हें तो जरूर याद होगा कि गांवों में किस तरह से होलियारे टोलियों में गांव-गांव होली गाते थे। किस तरह से ढोल की थाप पर होलियारे थिरकते-थिरकते थकते नहीं थे। किस तरह से बच्चियां होलिका दहन के लिए गोबर के बैल, चर खेती बाड़ी में काम आने वाले दूसरे यंत्र बनाती थी औेर होलिका दहन से पहले पूजन करती थीं। किस तरह से गांवों में बांस की पिचकारी से होली खेली जाती थी।

भले ही आज होली के त्योहार में भूहड़ता और अश्लीलता देखी जाती हो पर एक समय में होली में एक बढ़कर एक मजाक होती थी पर क्या कोई बुरा मान जाए। होलियारे एक से बढ़कर एक मजाक का श्वांग भरते थे। ये सभी श्वांग गांवों के ही लोगों की मजाक बनाते हुए भरे जाते थे पर हर कोई होली का आनंद उठाता था। रंग यानी धुलैंडी के दिन तो गांवों में सब काम काज छोड़ कर बस होली का आनंद उठाया जाता था। गांवोंं में होलियारे एक घर से दूसरे घर और दूसरे घर से तीसरे घर ऐसे ही हर घर जाते थे और हर घर में उनका गुड़ से स्वागत होता था। देवर-भाभी के रिश्ते का असली स्वरूप होली के ही दिन उभरकर सामने आता था। खूब हंसी मजाक के साथ रंगों का इस्तेमाल होता था। आज की तारीख में भले ही होली के दिन भी होली का त्योहार न नजर आ रहा हो पर पहले गांवों में एक महीने पहले होली खिलनी शुरू हो जाती थी। किसान रात में एक-दो बजे तक होली खेलते थे और दिन में खेती का काम करते थे। उत्तर भारत में हिन्दूओं के लिए आनंद और उल्लास का त्योहार होली ही माना जाता था। लोग इस त्योहार पर अपने सभी अरमान पूरे करते थे। रंग, अबीर गुलाल के इस त्योहार ने अब होली मिलन समारोह का रूप ले लिया हो। चाहे राजनीतिक संगठन हों, सामाजिक संगठन हों, ऑफिस हों या फिर घर परिवार के कार्यक्रम बस सबस औपचारिकता बनते जा रहे हैं।

Related Posts

सोनम वांगचुक जोधपुर की जेल से रिहा, सुप्रीम कोर्ट में बुरी तरह से घिरी हुई है केंद्र सरकार
  • TN15TN15
  • March 16, 2026

स्वराज सत्याग्रह यात्रा: सोनम वांगचुक को जोधपुर की…

Continue reading
सोनम वांगचुक की रिहाई पर सपा चीफ अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया, कहा- ‘न सिर्फ जनता को धोखा…’
  • TN15TN15
  • March 14, 2026

केंद्र की ओर से हिरासत को तत्काल प्रभाव…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

  • By TN15
  • March 17, 2026
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’

  • By TN15
  • March 17, 2026
पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’

हरियाणा : राज्यसभा चुनाव रिजल्ट के बाद कांग्रेस में कलह! कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

  • By TN15
  • March 17, 2026
हरियाणा : राज्यसभा चुनाव रिजल्ट के बाद कांग्रेस में कलह! कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

मुकेश सूर्यान को मिली असम चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी!

  • By TN15
  • March 17, 2026
मुकेश सूर्यान को मिली असम चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी!

टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी, इस पार्टी के लिए छोड़ी 3 सीट

  • By TN15
  • March 17, 2026
टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी, इस पार्टी के लिए छोड़ी 3 सीट

वाराणसी में गंगा की लहरों पर ‘नॉनवेज इफ्तारी’! कूड़ा नदी में फेंका, वीडियो बनाने वाले तहसीम सहित 14 गिरफ्तार

  • By TN15
  • March 17, 2026
वाराणसी में गंगा की लहरों पर ‘नॉनवेज इफ्तारी’! कूड़ा नदी में फेंका, वीडियो बनाने वाले तहसीम सहित 14 गिरफ्तार