जब पत्थर लगने के बाद भी मंच पर डटी रही थीं इंदिरा गांधी, कहा दिया था-पीछे नहीं हटूंगी 

 द न्यूज 15                                                                                       फोटो : एक्सप्रेस आर्काइव  

नई दिल्ली। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब के फिरोजपुर जिले में एक रैली को संबोधित करने जाते हुए उनकी सुरक्षा में हुई चूक आज की तारीख में मुख्य मु्द्दा बना हुआ है। इस मामले में जहां कांग्रेस इसे भाजपा का ड्रामा बता रही है वहीं भाजपा मामले को लेकर कांग्रेस को लपेट रही है। मामले को लेकर गृह मंत्रालय तक सक्रिय हो चुका है। पांच जिलों के एसपी तलब किये गये हैं और १५० लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या वास्तव में प्रधानमंत्री की जांन को खतरा हो सकता था। विरोध करने वाले तो किसान तो ही थे। क्या प्रधानमंत्री किसानों से बात नहीं कर सकते थे ? जबकि देश का इतिहास रहा है कि प्रधानमंत्रियों ने हर परिस्थिति में जनता से संवाद किया है। इंदिरा गांधी पर तो मंच से ही पत्थर बरसा दिये गये थे उनकी नाम पर चोट लगने के बावजूद इंदिरा गांधी पीछे नहीं हटीं और कहा कि वह पीछे नहीं हटेंगी।
दरअसल बात 1967 की है। इंदिरा गाँधी का मुकाबला देश के समाजवादियों से था। इंदिरा गांधी देश में अलग-अलग जगहों पर चुनाव प्रचार कर रही थीं। इस बीच जब वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रचार करने गईं, तो रैली में भाषण देने के दौरान भीड़ में से कुछ उपद्रवी उनपर पत्थर फेंकने लगे।
तब इंदिरा गाँधी मोदी की तरह पीछे नहीं हटी थीं बल्कि सुरक्षाकर्मियों के तमाम प्रयास के बावजूद उन्होंने रैली को रद्द नहीं किया। उन्होंने उपद्रिवयों के आगे हार नहीं मानी और वहीं डटी रहीं। उन्होंने पत्थरबाजी के बीच माइक संभाला और निर्भीकता से कहा, ‘मैं पीछे नहीं हटूंगी।’ दरअसल जब इंदिरा गांधी बोल ही रही थीं कि एक ईंट का टुकड़ा उनकी नाक आकर पर लगा। उनकी नाक से खून बहने लगा। वहां मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनसे अनुरोध किया कि वो मंच चली जाएं। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री ने किसी की नहीं सुनी। नाक का आपरेशन तक करना पड़ा : नाक की चोट लिए इंदिरा गांधी कोलकाता पहुंची और वहां अपना भाषण दिया। हालांकि उन्हें सुझाव दिया गया कि वो दिल्ली लौट जाएं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। फिलहाल कार्यक्रम खत्म कर जब वो दिल्ली पहुंची तो उनकी नाक का एक्सरे किया गया। पता चला कि उनकी नाक पर गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों को उनकी नाक का आपरेशन तक करना पड़ा था। सुरक्षा में चूक का शिकार पूर्व पीएम राजीव गांधी भी हुए थे। दरअसल श्रीलंका में तमिलों और सेना के बीच हुए संघर्ष और भारत द्वारा श्रीलंका में सेना भेजे जाने का विरोध देखा जा रहा था। इस दौरान 30 जुलाई 1987 को देश के तत्कालीन पीएम राजीव गांधी भारत-श्रीलंका शांति समझौते के लिए श्रीलंका गए थे।
वहां गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान राजीव गांधी पर एक सैनिक विजिथा रोहन विजेमुनी ने अपनी बंदूक के बट से हमला कर दिया था। बाद में इस सैनिक को श्रीलंका सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। पीएम मोदी की सुरक्षा चूक मामले के बाद राजीव गांधी पर हुए हमले का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। बता दें कि विजिथा रोहन श्रीलंका में भारतीय सेना भेजने के खिलाफ था। इसी विरोध के चलते उसने राजीव गांधी की पीठ पर बंदूक की बट से हमला किया था। हमले में राजीव गांधी को हल्की चोट आई थी। पीएम मोदी के साथ क्या हुआ: बता दें कि 5 जनवरी को पंजाब के फिरोजपुर में पीएम मोदी एक रैली को संबोधित करने वाले थे। लेकिन हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से लगभग 30 किलोमीटर दूर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया था। जिसके चलते पीएम मोदी 15-20 मिनट फ्लाईओवर पर फंसे रहे। इसके बाद उन्हें दिल्ली वापस लौटना पड़ा। इस मामले भाजपा और कांग्रेस आमने सामने है।

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