फंस न जाए 20 बागी सांसदों के NCPI में विलय का मामला! स्पीकर ओम बिरला फूंक-फूंक कर बढ़ा रहे कदम
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी लोकसभा सांसदों के नेशनल सिटीजनंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय के मामले पर स्पीकर ओम बिरला कानूनी राय लेने पर विचार कर रहे हैं। टीएमसी के इन सांसदों ने स्पीकर से मिलकर अपने गुट के एनसीपीआई में विलय करने की घोषणा की है।
टीएमसी के बागी सांसद रविवार (14 जून, 2026) को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले और उनसे आग्रह किया कि एनसीपीआई में प्रस्तावित विलय के बाद उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता दी जाए और सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की जाए। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार स्पीकर इसपर कानून मंत्रालय से राय ले रहे हैं।
कानून मंत्रालय की लिखित राय पर ही फैसला-रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार स्पीकर ओम बिरला टीएमसी के बागी सांसदों की मांग पर कोई भी फैसला कानून मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर ही लेंगे। माना जा रहा है कि कानून मंत्रालय बिना किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से विचार-विमर्श किए इस मुद्दे पर कोई भी कानूनी राय नहीं देगा।
स्पीकर की ओर से लिखित में राय मांगे जाने की संभावना इस वजह से है, ताकि अगर उनके फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए तो वह न्यायिक समीक्षा में पूरी तरह से खरा उतर सके।
स्पीकर की ओर से लिखित में राय मांगे जाने की संभावना इस वजह से है, ताकि अगर उनके फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए तो वह न्यायिक समीक्षा में पूरी तरह से खरा उतर सके।
संसद के मानसून सत्र से पहले आ सकता है फैसला
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीएमसी के बागी गुट की मांग पर स्पीकर का कोई भी फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले ही आ जाने की संभावना है।
आम तौर पर संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे हफ्ते में आयोजित किया जाता है।
आम तौर पर संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे हफ्ते में आयोजित किया जाता है।
दल-बदल विरोधी कानून से बचने की कवायद
बता दें कि रविवार को टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंधोपाध्याय की अगुवाई में पार्टी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी और उनसे सदन में बैठने की अलग जगह मुहैया कराने का औपचारिक अनुरोध किया था।
बागी गुट का दावा है कि उन्होंने त्रिपुरा आधारित पार्टी एनसीपीआई में विलय करके संविधान की दसवीं अनुसूची की शर्तों को पूरा कर लिया है। दल-बदल विरोधी कानून के चक्कर में फंसने से बचने के लिए यह जरूरी है कि किसी भी राजनीतिक दल की विधायी या संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में शामिल हो जाएं।
टीएमसी के बागी सांसदों का दावा है कि उनके साथ 20 एमपी हैं, इसलिए 28 सांसदों वाली पार्टी में उन्होंने इस सीमा को आसानी से पार कर लिया है।
नेशनल सिटीजनंस पार्टी ऑफ इंडिया क्या है
चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार नेशनल सिटीजनंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक पंजीकृत, गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। एनसीपीआई को 2023 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा के संकराइल इलाके के हटगाछा गांव से रजिस्टर करवाया गया था, जो कि बनीपुर पोस्ट ऑफिस के दायरे में आता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि वित्त वर्ष 2022-23 में पार्टी का क्लोजिंग बैलेंस मात्र 75 रुपये था। इसने उस साल कुल 1,13,075 रुपये दान के रूप में प्राप्त करने की घोषणा की और लगभग पूरी ही रकम उसी साल खर्च कर दिए। इनमें से त्रिपुरा विधानसभा चुनाव अभियान पर खर्च हुए 49,400 रुपये भी शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि वित्त वर्ष 2022-23 में पार्टी का क्लोजिंग बैलेंस मात्र 75 रुपये था। इसने उस साल कुल 1,13,075 रुपये दान के रूप में प्राप्त करने की घोषणा की और लगभग पूरी ही रकम उसी साल खर्च कर दिए। इनमें से त्रिपुरा विधानसभा चुनाव अभियान पर खर्च हुए 49,400 रुपये भी शामिल हैं।







