ट्रेड डील में आखिर किस बात का जश्न ?

कृषि बाजार अमेरिका के लिए खोलने, टैरिफ 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने, रूस से तेल खरीदना बंद कर वेनुजुएला और अमेरिका से खरीदने, अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ न लगाने का क्या मतलब ?

 

चरण सिंह

अमेरिका से ट्रेड डील पर बीजेपी और उसके समर्थक आखिर किस बात पर जश्न मना रहे हैं ? क्या इसलिए कि अब भारत हमारे पुराने दोस्त रूस से नहीं बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा ? इसलिए कि अमेरिकी उत्पादों के लिए किसान बाजार को खोल दिया गया ? इसलिए कि डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रेड डील पीएम मोदी के अनुरोध पर करने की बात कही ? इसलिए कि इस ट्रेड डील की जानकारी डोनाल्ड ट्रम्प ने दी है। इसलिए कि अमेरिका ने टैरिफ को 3 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत कर दिया है। या फिर इसलिए कि अमेरिकी के कितने उत्पादकों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को ट्रूथ सोशल पर ऐलान किया कि मोदी के साथ बातचीत के बाद ट्रेड डील हुई है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% (या कुछ रिपोर्ट्स में 50% तक से घटाकर 18% कर दिया है। बदले में भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर कम करने (कुछ जगह जीरो तक) की बात कही है। भारत अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पाद, कोयला आदि में 500 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आयात बढ़ाएगा। समझा जा सकता है कि भारत के बाज़ार में अमेरिका के कितने उत्पाद और कितने बड़े स्तर पर आने वाले हैं। ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका + वेनेजुएला से ज्यादा तेल/ऊर्जा खरीदेगा, जिससे यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी। पीएम मोदी की इस मामले में चुप्पी मतलब ट्रम्प का दावा ठीक है।

जो लोग ट्रेड डील की तारीफ कर रहे हैं वे यह बताएं कि अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस के इस बयान का क्या मतलब है ? जो उन्होंने कहा कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत के बड़े बाजार में ज्यादा बिकेंगे, जिससे अमेरिकी किसानों को फायदा होगा और ग्रामीण अमेरिका में पैसा आएगा। मतलब अमेरिकी सस्ते कृषि उत्पाद (जैसे सोयाबीन, डेयरी, नट्स आदि) के आने से भारतीय किसानों की आय घट सकती है, वे कर्ज में डूब सकते हैं, और जमीनें कॉरपोरेट्स को बेचनी पड़ सकती हैं।
सरकार NDTV, India Today, Business Today आदि का हवाला दे रही है कि इन सभी मीडिया हाउस में किसानों के हितों से कोई समझौता न होने की बात कही गई है। इनके अनुसार कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। पहले जैसे प्रोटेक्टेड हैं, वैसे ही रहेंगे। इनका कहना है कि कोई बड़ा कृषि बाजार अमेरिका के लिए नहीं खोला गया। कुछ लिमिटेड उत्पादों पर ही बात हुई हो सकती है, लेकिन पूरा सेक्टर नहीं। तेल खरीद पर भी कोई बाध्यकारी शर्त नहीं है। बाजार के हिसाब से फैसला होगा, वेनेजुएला से खरीद संभव है, लेकिन रूस से पूरी तरह बंद करने की पुष्टि नहीं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि इन मीडिया हाउस में से कौन सा सरकार के खिलाफ जा सकता है ? या फिर इनमें से किस मीडिया हाउस ने कौन सी स्टोरी सरकार के खिलाफ की है ? सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ किसने और कौन सी खबर चलाई है ?

आखिर सीज फायर की तरह ट्रेड डील का ऐलान अमेरिका से ही क्यों हुआ? ट्रंप ने खुद ऐलान किया है क्योंकि यह उनके लिए बड़ी पॉलिटिकल जीत है। अमेरिकी किसानों को फायदा, यूक्रेन के संदर्भ में रूस पर दबाव और भारत से बड़ा आयात कमिटमेंट। देखने की बात यह है कि मोदी ने सिर्फ टैरिफ कटौती का ही स्वागत कर ट्रंप को धन्यवाद दिया है। बाकी विवादास्पद दावों जैसे रूस तेल बंद, कृषि बाजार पर चुप्पी साध गए। इसका क्या मतलब है ?

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