डॉन दाऊद की बहन हसीना से क्‍या है नवाब मलिक का कनेक्‍शन 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मालिक को धन शोधन (मनी लांड्रिंग) और टेरर फंडिंग में सक्रिय भागीदारी के आरोप में गिरफ्तार किया था

 

द न्यूज 15 
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक को धन शोधन (मनी लांड्रिंग) और टेरर फंडिंग में सक्रिय भागीदारी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ईडी इस पूरे मामले में जिस अहम बिंदु पर जांच कर रही है, उस को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीस पहले भी नवाब मलिक पर आरोप लगा चुके हैं।
नवाब मलिक पर ईडी के आरोप: प्रवर्तन निदेशालय एक संपत्ति सौदे के मामले में नवाब मलिक की जांच कर रही है। जिसमें नवाब मलिक ने एक जमीन का सौदा भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की बहन हसीना पारकर से किया था। ऐसे आरोप हैं कि मलिक ने मुंबई के कुर्ला में एलबीएस मार्ग पर स्थित गोवावाला कंपाउंड की तीन एकड़ जमीन 85 लाख रुपये में खरीदी थी, जिसमें केवल 30 लाख रूपये ही बिक्री के समझौते पर दिखाए गए थे।
इस मामले में नवाब मलिक पर आरोप यह भी है कि इस जमीन सौदे में 30 लाख रूपये बिक्री समझौते पर दिखाए गए बाकी का भुगतान नकद किया गया था। साथ ही ईडी का आरोप है कि तय जमीन का सौदा पंजीकृत बाजार दर से काफी कम रुपयों में हुआ था। ईडी के मुताबिक, साल 2005 में हसीना पारकर ने मलिक को फायदा पहुंचाने के लिए सलीम पटेल के जरिए संपत्ति में अपना हित ट्रांसफर कर दिया था।
ईडी ने दावा किया है कि अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने वाले सरदार शाहवाली खान ने इस सौदे में अहम भूमिका निभाई थी। कोर्ट में ईडी ने रिमांड आवेदन में बताया है कि जमीन मूल रूप से मुनीरा प्लंबर के नाम पर थी लेकिन पारकर और सलीम पटेल ने जाली तरीके से पॉवर ऑफ अटार्नी अपने पास ले ली। इसमें मुनीरा की जमीन सलीम पटेल को बेचने का अधिकार प्राप्त था। मुनीरा प्लंबर ने ईडी को बताया कि उन्होंने नवाब मलिक से जमीन बिक्री के लिए कभी संपर्क नहीं किया। यहां तक कि उन्हें पिछले साल ही मीडिया के माध्यम से इस बारे में पता चला था। इसके अलावा ईडी ने आरोप लगाया है कि बिक्री समझौते में जमीन की कुल कीमत 30 लाख रुपये है। साथ ही नवाब मलिक ने जमीन के पंजीकृत बाजार मूल्य को कम करने के लिए नकली किरायेदारों को दिखाया। कौन हैं अंडरवर्ल्ड से जुड़े दो लोग: इस पूरे मामले में जिन दो लोगों सरदार शाहवाली खान और सलीम पटेल का नाम सामने आया है, उनका संबंध अंडरवर्ल्ड से रहा है। जहां शाहवाली खान 1993 मुंबई बम धमाकों में उम्रकैद की सजा काट रहा है तो वहीं सलीम पटेल, हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर था।
नवाब मलिक के वकील ने क्या कहा: मलिक की तरफ से वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने दलील दी कि रिमांड आवेदन में मलिक और दाऊद गिरोह के बीच कोई संबंध नहीं दिखाया गया है। साथ ही साल 1999 में जब यह समझौता हुआ तो उस वक्त धन शोधन निवारण एक्ट, 2002 भी लागू नहीं था। ऐसे में इस मामले में यह दर्शाने की कोशिश की जा रही है कि, महाराष्ट्र का एक निर्वाचित प्रतिनिधि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है। देसाई ने बताया कि, इस जमीन सौदे के मामले में मलिक तो खुद एक पीड़ित है, क्योंकि जिस व्यक्ति ने उन्हें संपत्ति बेची असल में वह मालिकाना हक़ रखता ही नहीं था। इसके अलावा मुनीरा प्लंबर खुद दावा करती है कि सलीम पटेल ने उनकी पॉवर ऑफ अटार्नी का दुरुपयोग किया है। इन सब के बीच मलिक का नाम कहां है? बता दें कि, इससे पहले भी पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीस ने आरोप लगाया था कि नवाब मलिक ने अंडरवर्ल्ड से संबंधित लोगों से जमीन खरीदी थी।
आरोपों पर क्या था नवाब मलिक का जवाब: एनसीपी नेता मलिक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि उनकी कंपनी सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने मुनीरा प्लंबर से यह जमीन लीज पर ली थी। जिसमें बाद में मुनीरा ने उनसे कहा था कि वह जमीन बेचना चाहती हैं। फिर हमने पॉवर ऑफ अटार्नी रखने वाले सलीम पटेल से इस जमीन का सौदा कर लिया था। साथ ही नवाब मलिक ने सरदार शाहवाली खान को लेकर किये गए दावों पर बताया था कि, खान के पिता कभी इस जमीन के वाचमैन थे और उन्होंने इस जमीन के 300 मीटर के हिस्से पर अपना दावा किया था। जब हमें इसकी जानकारी हुई तो हमने इसके पैसे उन्हें अलग से दे दिए थे।  क्या है सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स: सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की यह कंपनी 1973 में स्थापित की गई थी। ईडी के मुताबिक, साल 2002-03 तक यह कंपनी प्लंबर की कुर्ला संपत्ति के किरायेदारों में से एक कनुभाई पटेल के स्वामित्व में थी लेकिन उन्होंने परोपकार के तौर पर नवाब मलिक को सॉलिडस 1 रुपये में बेचने पर सहमति जताई थी। ईडी के मुताबिक, उस समय महाराष्ट्र सरकार में राजस्व मंत्री मलिक ने एक सड़क परियोजना के चलते प्रभावित होने वाले 360 परिवारों के पुनर्वास की बात कही थी। साथ ही मलिक ने कंपनी द्वारा रखे गए किरायेदारी अधिकारों को बेचने के लिए पटेल से संपर्क किया था। बता दें कि, यह जमीन के सौदे सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स के अंतर्गत ही किये गए थे। फिलहाल नवाब मलिक का परिवार ही इस कंपनी का कर्ता-धर्ता है। जबकि, नवाब मलिक खुद 2019 में वर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक कंपनी सॉलिडस के बोर्ड में शामिल थे।

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