यूपी: दुरुस्त होगा BJP का सबसे कमजोर दुर्ग?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन को मजबूत करने की बड़ी कवायद शुरू कर दी है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी को दिसंबर 2025 में यूपी बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। यह नियुक्ति सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को दुरुस्त करने की रणनीति है।

 

पश्चिमी यूपी: BJP का सबसे कमजोर दुर्ग क्यों?

 

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में सबसे बड़ा नुकसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में हुआ। किसान आंदोलन के असर, जाट और मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से कई सीटें गंवाई गईं।
ब्रज क्षेत्र (मथुरा, आगरा आदि) और मेरठ, गाजियाबाद जैसे इलाकों में समीकरण बिगड़े। पहले के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (जाट नेता, पश्चिमी यूपी से) होने के बावजूद पार्टी यहां कमजोर रही।
अब पंकज चौधरी (पूर्वांचल से) अध्यक्ष बनने के बाद पश्चिमी यूपी को साधने की चुनौती सबसे बड़ी है। दोनों शीर्ष नेता (सीएम योगी और अध्यक्ष पंकज) पूर्वांचल से होने से क्षेत्रीय असंतुलन की बात भी हो रही है।

 

पंकज चौधरी का दांव: मिशन-2027 की शुरुआत ब्रज से क्यों?

 

अध्यक्ष बनते ही पंकज चौधरी ने मिशन-2027 का आगाज ब्रज क्षेत्र (मथुरा में बांके बिहारी मंदिर दर्शन) से किया।
इसके बाद गाजियाबाद होते हुए मेरठ पहुंचे, जहां भव्य स्वागत हुआ। यह स्पष्ट संदेश है कि पूर्वांचल आधार होने के बावजूद वे पश्चिमी यूपी के बिगड़े समीकरणों को दुरुस्त करेंगे।
कार्यकर्ताओं से कहा: सरकार की योजनाओं को हर जरूरतमंद तक पहुंचाएं, बिना भेदभाव। यह पश्चिमी यूपी में नाराजगी दूर करने की कोशिश है।

 

बड़े सियासी मायने: PDA की काट और कुर्मी कार्ड

 

पंकज चौधरी कुर्मी (ओबीसी) समाज से हैं। यूपी में कुर्मी वोट करीब 6-9% हैं, जो पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में निर्णायक हैं।
2024 में सपा के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से बीजेपी को नुकसान हुआ, खासकर गैर-यादव ओबीसी वोट खिसके।
पंकज की नियुक्ति से बीजेपी गैर-यादव ओबीसी (खासकर कुर्मी) को साध रही है। यह अपना दल (एस) जैसे सहयोगियों पर भी दबाव डालता है, क्योंकि कुर्मी उनका कोर वोट है।
पूर्वांचल में बीजेपी का आधार मजबूत करने के लिए भी यह दांव सही, जहां 2024 में सबसे ज्यादा सीटें गंवाईं।

 

चुनौतियां क्या हैं?

 

क्षेत्रीय संतुलन: सत्ता और संगठन दोनों पर पूर्वांचल का दबदबा – पश्चिमी यूपी के नेता नाराज हो सकते हैं।
कार्यकर्ताओं में जोश: बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना, सरकार-संगठन में तालमेल।
2027 का लक्ष्य: सत्ता की हैट्रिक, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी और विपक्ष के PDA से मुकाबला।

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