बांग्लादेश में हाल ही में तारिक रहमान (Tarique Rahman) प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है, जो Bangladesh Nationalist Party (BNP) के चेयरमैन हैं। उनकी पार्टी ने फरवरी 2026 के आम चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया, जिसके बाद वे 17 फरवरी को PM बने। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुआ, जिसमें शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
आपके सवाल में “तुर्की ने भी शुरू किया खेल” का मतलब लगता है तुर्की की तरफ से बांग्लादेश में नई सरकार बनते ही तेजी से सक्रियता बढ़ाने की बात। तारिक रहमान की शपथ के मात्र 24 घंटे बाद ही तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन के बेटे बिलाल एर्दोगन चुपचाप ढाका पहुंचे। यह दौरा पहले से सार्वजनिक नहीं था, और इसे तुर्की की बढ़ती पैठ का संकेत माना जा रहा है।
बिलाल ने ढाका यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया, जिसे तुर्की की सरकारी एजेंसी TIKA (Turkish Cooperation and Coordination Agency) ने फंड किया था। उनके साथ तुर्की के पूर्व फुटबॉलर मेसुत ओजिल और TIKA के चेयरमैन अब्दुल्ला आरोन भी थे। तुर्की ने 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से (यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान) बांग्लादेश के साथ संबंध मजबूत किए हैं, खासकर दक्षिणपंथी और इस्लामिक गुटों (जैसे जमात-ए-इस्लामी) से। जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव में गठबंधन से 77 सीटें जीतीं, और तुर्की-पाकिस्तान जैसे देशों के साथ उनके पुराने संबंध हैं।
तुर्की बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है (रक्षा, सहायता, इस्लामिक नेटवर्क के जरिए)। यह भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है (जैसे पाकिस्तान के साथ तुर्की की नजदीकी की तरह)। तुर्की ने यूनुस सरकार के समय से ही संबंध बढ़ाए थे, लेकिन नई BNP सरकार (जो इस्लामिस्ट गठबंधन से समर्थित है) के साथ यह और तेज हो गया लगता है। हालांकि, BNP की विदेश नीति में “बांग्लादेश पहले” का फोकस है, जिसमें पाकिस्तान और चीन से भी नजदीकी की बात है।






