जनगणना में शामिल हो आदिवासी धर्म कोड 

राष्ट्रपति भवन में जाकर एआईपीएफ नेताओं ने दिया पत्रक

नई दिल्ली । देश में इस वर्ष शुरू होने जा रही जनगणना में ‘आदिवासी धर्म कोड’ शामिल करने के सवाल पर आज ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के नेताओं ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति सचिवालय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित पत्रक दिया। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी की तरफ से दिए पत्रक को एआईपीएफ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनकर कपूर और राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य राजेश सचान ने राष्ट्रपति सचिवालय में जाकर दिया।

पत्रक में कहा गया कि पूरे देश में करीब 12 करोड़ से ज्यादा आदिवासी रहते हैं। इन समुदायों की धार्मिक आस्थाएँ, पूजा-पद्धतियाँ, सामाजिक संरचना, परंपराएँ, भाषा, बोली एवं सांस्कृतिक जीवन भारत के अन्य प्रमुख धर्मों—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, यहूदी, जैन एवं बौद्ध—से भिन्न, स्वतंत्र तथा विशिष्ट हैं। मूलत: ये प्रकृति के उपासक हैं।

इस बात की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट के भी विभिन्न आदेशों में हुई है। मधु किश्वर बनाम बिहार राज्य के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि आदिवासी कोई “हिंदू उप-समूह” नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र समुदाय हैं, जिनकी अपनी परंपराएँ और कानूनी पहचान है। खुद संविधान का अनुच्छेद 25 आदिवासियों को अपना धर्म मानने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 366 – अनुसूचित जनजाति की परिभाषा को संविधानिक मान्यता देता है, जो यह दर्शाता है कि आदिवासी समुदाय एक विशिष्ट सामाजिक वर्ग है, जिसकी पहचान अलग है। पाँचवीं अनुसूची आदिवासी समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक विशिष्टता को स्वीकार करते हुए उनके लिए विशेष संवैधानिक संरक्षण प्रदान करती है।  हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 2(2) भी आदिवासियों को हिंदू धर्म से अलग करती है। राष्ट्रपति महोदया के संज्ञान में लाया गया कि 1851 से लेकर 1951 तक भारत में हुई जनगणना में आदिवासी धर्म का कोड मौजूद था। जिसे 1961 की जनगणना में हटा दिया गया। देश के विभिन्न आदिवासी व लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आदिवासी धर्म के कोड को जनगणना में जोड़ने की मांग पूरे देश में की जा रही है।

ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति महोदया से निवेदन किया गया कि भारत सरकार तथा रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त, भारत को आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, जिससे आगामी जनगणना में ‘आदिवासी धर्म’ हेतु पृथक धर्म कोड को सम्मिलित किया जा सके। यह निर्णय न केवल संवैधानिक न्याय की पुनर्स्थापना करेगा, बल्कि करोड़ों आदिवासी नागरिकों की पहचान, गरिमा और अधिकारों की रक्षा भी करेगा।

दिनकर कपूर

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट।

  • Related Posts

    क्या आधुनिक जन-आंदोलन गांधी के सत्याग्रह के मानकों पर खरे उतरते हैं?

    गांधीजी का सत्याग्रह केवल दबाव बनाने की तकनीक…

    Continue reading
    दलित चेतना और लोकतंत्र का संकट

    मुदनाकुडु चिन्नस्वामी   चुनाव चाहे कितनी भी नियमितता…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ‘अखिलेश जी ड्रामा नहीं हिसाब दीजिए’, JPNIC को लेकर OP राजभर ने सपा चीफ को घेरा

    ‘अखिलेश जी ड्रामा नहीं हिसाब दीजिए’, JPNIC को लेकर OP राजभर ने सपा चीफ को घेरा

    अग्निवीर के पहले बैच को कहां मिलेगी नौकरी, किस राज्य में क्या नियम?

    अग्निवीर के पहले बैच को कहां मिलेगी नौकरी, किस राज्य में क्या नियम?

    नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार व्याप्त 

    नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार व्याप्त 

    अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के दौरे से भड़का लोगों का विरोध!

    अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के दौरे से भड़का लोगों का विरोध!

    ‘BJP ने इमरजेंसी को पीछे छोड़ दिया’, CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले आशुतोष रांका

    ‘BJP ने इमरजेंसी को पीछे छोड़ दिया’, CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले आशुतोष रांका

    क्या आधुनिक जन-आंदोलन गांधी के सत्याग्रह के मानकों पर खरे उतरते हैं?

    क्या आधुनिक जन-आंदोलन गांधी के सत्याग्रह के मानकों पर खरे उतरते हैं?