ट्रेड डील पर सहमति? भारत डिफेंस-एनर्जी में खरीद बढ़ाने को तैयार

ट्रेड डील पर अभी पूर्ण सहमति नहीं बनी है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच बातचीत तेज हो गई है। 11-12 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन कॉल हुई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा, ऊर्जी और तकनीक पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों नेता वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए सहयोग पर जोर दिया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अगर अमेरिका भारत के प्रस्ताव से संतुष्ट है, तो उसे “डॉटेड लाइन्स” पर साइन कर लेना चाहिए। हालांकि, 2025 खत्म होने से पहले डील होने की संभावना कम लग रही है।

 

मुख्य बिंदु

 

रक्षा (डिफेंस) में बढ़ोतरी: भारत और अमेरिका ने अक्टूबर 2025 में 10 साल का रक्षा समझौता साइन किया, जो भूमि, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा। अमेरिका भारत को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट और पानी के नीचे की प्रणालियों की सप्लाई पर विचार कर रहा है। भारत रूसी रक्षा उपकरणों की खरीद कम कर अमेरिकी खरीद बढ़ाने को तैयार है, ताकि अमेरिकी टैरिफ (25% सेकेंडरी टैरिफ) में राहत मिले।
ऊर्जा (एनर्जी) में बढ़ोतरी: भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी कच्चे तेल की खरीद लगभग रोक दी है (पहले 1.7 मिलियन बैरल प्रति दिन)। अब भारत UAE, मिडिल ईस्ट, नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका से आयात बढ़ा रहा है। डील में अमेरिकी LNG सप्लाई को लॉन्ग-टर्म बेसिस पर बढ़ाने की योजना है, जो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
कृषि उत्पादों (एग्री प्रोडक्ट्स) पर नो-एंट्री: यह सबसे बड़ा अटकल बिंदु है। अमेरिका भारत के बाजार में अपने कृषि उत्पादों (जैसे मक्का, सोयाबीन, चावल) की पूरी पहुंच चाहता है, लेकिन भारत किसानों की सुरक्षा के लिए इससे इनकार कर रहा है। जुलाई 2025 में इसी मुद्दे पर बातचीत टूट गई थी। भारत कुछ चुनिंदा उत्पादों (जैसे वॉलनट्स, क्रैनबेरी, पिस्ता, अल्फाल्फा हेय, डक मीट) के आयात बढ़ाने को तैयार है, लेकिन बड़े पैमाने पर बाजार खोलने से पीछे हट रहा है। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ (25% पारस्परिक + 25% रूसी खरीद के लिए) लगाए हैं, जो भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

आगे की संभावनाएं

 

भारत का मुख्य आर्थिक सलाहकार विवेक नरेश्वरन ने कहा कि मार्च 2026 तक पहला चरण (ट्रेंच-1) फाइनल हो सकता है, जिसमें टैरिफ को 17-18% तक कम करने की कोशिश है।
फरवरी 2025 के जॉइंट स्टेटमेंट में 2030 तक $500 बिलियन व्यापार का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन टैरिफ विवाद से यह प्रभावित हुआ। अगले हफ्तों में और बैठकें हो सकती हैं, खासकर कृषि और ऊर्जा पर।

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