कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा आज का भारत

सरकार का क़र्ज़ इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी आमदनी कितनी है और ख़र्चे कितने हैं। अगर ख़र्चा आमदनी से ज़्यादा है तो सरकार को उधार या क़र्ज़ लेना पड़ता है। इसका सीधा असर सरकार के राजकोषीय घाटे पर पड़ता है। आज जो इतना कर्ज़ लिया जा रहा है इसका बोझ सिर्फ़ हमारे और आपके ऊपर नहीं आएगा। भविष्य में इसका बोझ हमारी संतानों पर भी आएगा। अगर अर्थव्यवस्था में उत्पादन नहीं बढ़ेगा, रोज़गार नहीं बढ़ेगा और हमारे देश में अमीर-ग़रीब के बीच असमानता कम नहीं होगी तो आपको क़र्ज़ लेना ही पड़ेगा। और ये दुर्भाग्यपूर्ण है। भविष्य में अगर सरकार का कर्ज कम नहीं हुआ तो निजी कंपनियां ज्यादा ब्याज चुकाने के लिए मजबूर होंगी। तब निवेश और कम हो जाएगा। इसे यूं समझिए अगर अर्थव्‍यवस्‍था के मुकाबले विदेशी कर्ज बढ़ता है तो देश की सॉवरेन रेटिंग पर असर पड़ता है। खासतौर से विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर इसका ज्‍यादा असर पड़ सकता है। कर्ज को चुकाने में अगर डिफॉल्‍ट किया गया तो न सिर्फ देश की सॉवरेन रेटिंग पर असर पड़ेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों में भी निगेटिव संदेश जाएगा और इनवेस्‍टमेंट गिर सकता है। इसका असर उद्योगों और प्रोजेक्‍ट पर भी पड़ेगा, जिससे रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे।

प्रियंका सौरभ

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का खिताब अपने नाम लिए भारत सरकार और इसके राज्यों पर बहुत ज्यादा कर्ज हो गया है। अगर इसे कम नहीं किया गया तो हमें इस अच्छे मौके का पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगे। 2019-20 में महामारी से पहले ही ये कर्ज बढ़ने लगा था जो तब से कम नहीं हुआ है। इस कर्ज के ज्यादा होने का एक कारण ये है कि निजी कंपनियां मुट्ठी ठीक से खोल नहीं रही हैं। वो अर्थव्यवस्था में कम पैसा लगा रही हैं। बैंकों और कंपनियों ने अपने लोन कम कर दिए जिससे निजी निवेश कम हो गया है। इसी वजह से सरकार ने ज्यादा पैसा लगाकर अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की कोशिश की और कर्ज बढ़ता गया। भविष्य में अगर सरकार का कर्ज कम नहीं हुआ तो निजी कंपनियां ज्यादा ब्याज चुकाने के लिए मजबूर होंगी। तब निवेश और कम हो जाएगा। इसे यूं समझिए अगर अर्थव्‍यवस्‍था के मुकाबले विदेशी कर्ज बढ़ता है तो देश की सॉवरेन रेटिंग पर असर पड़ता है। खासतौर से विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर इसका ज्‍यादा असर पड़ सकता है। कर्ज को चुकाने में अगर डिफॉल्‍ट किया गया तो न सिर्फ देश की सॉवरेन रेटिंग पर असर पड़ेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों में भी निगेटिव संदेश जाएगा और इनवेस्‍टमेंट गिर सकता है। इसका असर उद्योगों और प्रोजेक्‍ट पर भी पड़ेगा, जिससे रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे। इसके अलावा कर्ज डिफॉल्‍ट होने पर उसे चुकाना महंगा हो जाएगा, जिससे सरकारी खजाने पर भी असर पड़ सकता है और सरकार आम आदमी के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं में कटौती को मजबूर हो सकती है।

सरकार का क़र्ज़ इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी आमदनी कितनी है और ख़र्चे कितने हैं। अगर ख़र्चा आमदनी से ज़्यादा है तो सरकार को उधार या क़र्ज़ लेना पड़ता है। इसका सीधा असर सरकार के राजकोषीय घाटे पर पड़ता है। 1980 के बाद हमें बजट में राजस्व घाटा हो रहा है। राजस्व घाटे का मतलब है जो आपका वर्तमान ख़र्च है वो आपके राजस्व से ज़्यादा है। इसलिए मौजूदा ख़र्च को चलाने के लिए के लिए क़र्ज़ लेना पड़ रहा है। राजस्व घाटे का मतलब है कि जिसके लिए आप उधार ले रहे हैं उस पर रिटर्न नहीं आएगा। जैसे- सब्सिडी या डिफ़ेंस पर होने वाला ख़र्च। बजट का एक बड़ा हिस्सा इन पर ख़र्च होता है और फिर हमारा क़र्ज़ बढ़ता चला जाता है। आज जो इतना कर्ज़ लिया जा रहा है इसका बोझ सिर्फ़ हमारे और आपके ऊपर नहीं आएगा। भविष्य में इसका बोझ हमारी संतानों पर भी आएगा। अगर अर्थव्यवस्था में उत्पादन नहीं बढ़ेगा, रोज़गार नहीं बढ़ेगा और हमारे देश में अमीर-ग़रीब के बीच असमानता कम नहीं होगी तो आपको क़र्ज़ लेना ही पड़ेगा। और ये दुर्भाग्यपूर्ण है। आज का भारत ‘ऋण संकट की समस्या’ का सामना कर रहा है। इस ‘संकट’ को वर्तमान ऋण की मात्रा के संदर्भ में नहीं, बल्कि बढ़ते सरकारी (घरेलू, बाह्य और कॉर्पोरेट) ऋण और अन्य मैक्रो समुच्चय (विकास, रोजगार, मुद्रास्फीति से लेकर वित्तीय ऋण विस्तार तक) के बीच बड़े रुझान और व्यापक आर्थिक संबंध के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार को इन चुनौतियों से निपटने के लिए गंभीर राजकोषीय समेकन उपाय करने की आवश्यकता होगी, बजाय इसके कि आईएमएफ ने जो चेतावनी दी है, उसे नकार दिया जाए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत को कर्ज के बारे में आगाह किया है।

आईएमएफ को अंदेशा है कि मीडियम टर्म में भारत का सरकारी कर्ज बढ़कर ऐसे स्तर पर पहुंच सकता है, जो देश की जीडीपी से ज्यादा हो सकता है। मतलब कुल सरकारी कर्ज देश की जीडीपी के 100 फीसदी से ज्यादा हो सकता है। पिछले तीन वर्षों में पूंजीगत व्यय से प्रेरित सरकारी खर्च ने अधिक पूंजी निर्माण (विकास के लिए निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए) की अनुमति नहीं दी है। कमजोर सकल स्थिर पूंजी निर्माण आंकड़े इसे दर्शाते हैं। मेरे लिए तो यह और भी बड़ी चिंता का विषय है। यदि सरकार बड़ा खर्च कर रही है और निजी निवेश के माध्यम से विकास को आकर्षित करने/उत्तरोत्तर आगे बढ़ाने के लिए अधिक उधार ले रही है, और ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है (निजी निवेश बेहद कमजोर बना हुआ है), तो सरकार मूल रूप से खर्च करने की कीमत पर अधिक कर्ज अर्जित कर रही है। यह संकट या बड़े पैमाने पर ऋण आवश्यकताओं के लिए भविष्य में उपयोगी उधार लेने की संभावना को बर्बाद करना और खतरे में डालना है। समस्या यह है कि ये सभी बढ़ते खर्च वास्तव में उच्च विकास की ओर ले जा रहे हैं और मानव पूंजी विकास के लिए आवश्यक सामाजिक/कल्याण व्यय की कीमत पर आ रहे हैं। राजकोषीय घाटे से उत्पन्न होने वाले ‘छिपे हुए ऋण’ की संभावना हमेशा बनी रहती है जिसे आधिकारिक आंकड़ों में ‘चुपचाप छिपाया जाता है’ और ‘जिसका हिसाब नहीं दिया जाता है।’ संकट के समय में, ‘छिपे हुए ऋण’ के आंकड़े किसी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकते हैं।

(लेखिका रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

  • Related Posts

    Silver Price Crash: ₹200000 से ज्यादा सस्ती मिल रही चांदी, रिकॉर्ड हाई से 46% टूटी, अब खरीदें, बेचें या इंतजार करें?

    चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी के…

    Continue reading
    Silver Price Crash: ₹200000 से ज्यादा सस्ती मिल रही चांदी; रिकॉर्ड हाई से 46% टूटी!

    चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी के…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    Theft of donations at the Ram Mandir : ट्रस्ट महासचिव का ड्राइवर कैसे हो गया चंदा चोरी का मुख्य आरोपी ?

    • By TN15
    • July 4, 2026
    Theft of donations at the Ram Mandir : ट्रस्ट महासचिव का ड्राइवर कैसे हो गया चंदा चोरी का मुख्य आरोपी ?

    प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने 13% बढ़ाया खरीद मूल्य 

    • By TN15
    • July 4, 2026
    प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने 13% बढ़ाया खरीद मूल्य 

    चंपत राय और अनिल राय का इस्तीफा होगा मंजूर? चढ़ावा चोरी मामले पर 6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक

    • By TN15
    • July 4, 2026
    चंपत राय और अनिल राय का इस्तीफा होगा मंजूर? चढ़ावा चोरी मामले पर 6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक

    ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, अब बंगाल TMC चीफ ने छोड़ा साथ, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

    • By TN15
    • July 4, 2026
    ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, अब बंगाल TMC चीफ ने छोड़ा साथ, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

    क्या फिर से चले गए वनवास? चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अखिलेश यादव ने शेयर किया AI वाला वीडियो

    • By TN15
    • July 4, 2026
    क्या फिर से चले गए वनवास? चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अखिलेश यादव ने शेयर किया AI वाला वीडियो

    खामेनेई के अंतिम संस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का तंज, कहा- ‘हमने ईरान को एक हफ्ते की मोहलत दी क्योंकि…’

    • By TN15
    • July 4, 2026
    खामेनेई के अंतिम संस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का तंज, कहा- ‘हमने ईरान को एक हफ्ते की मोहलत दी क्योंकि…’