कब तक रसूख की ढाल के पीछे छिपे रहेंगे ये सफेदपोश ठग
कोर्ट भी कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा इन ठगों का
नई दिल्ली। शिक्षा का क्षेत्र ऐसा पवित्र पेशा है जिसमें ईमानदारी और आचरण बहुत जरूरी है। देश के भविष्य तैयार करने वाले लोग यदि क्रप्ट होंगे तो देश और समाज पर किसका बहुत बुरा असर पड़ता है। जी हां शहरों कस्बों नहीं बल्कि देश की राजधानी में लुटेरे ही शिक्षा का ठेका लिया घूम रहे हैं। देश का सिस्टम जब इन जैसे रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो जाए तो समझ जाइये कि शिक्षा के नाम पर कितना बड़ा खिलवाड़ हो रहा है।

‘मदर्स प्राइड’ स्कूल के कर्ता-धर्ता देवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सुधा गुप्ता इन जैसे रसूखदारों में प्रमुखता से हैं। ,कहने को तो ये शिक्षा का मंदिर चलाते हैं पर जमीनी हकीकत तो इतनी भयावह है कि हर कोई सोचने को मजबू होआ जाए। इनके कारनामे किसी शातिर अपराधी से कम नहीं हैं। दिल्ली, हरियाणा और यूपी में धोखाधड़ी की 28 FIR दर्ज होने के बावजूद इनका कुछ बिगड़ नहीं रहा है। एफआईआर भी CBI और ED जैसी एजेंसियां ने दर्ज कराइ हैं। यह सिस्टम को ठेंगा दिखाना ही है कि ये ठग सलाखों के पीछे होने के बजाय खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि हज़ारों करोड़ डकारने वाले इन अपराधियों को कोर्ट भी तलब नहीं कर पाया। कहने को तो कानून सबके लिए समान होने की बात की जाती है पर जमीनी सच्चाई यह है कि हमारा कानून सिर्फ गरीबों के लिए है? अमीर तो अपने रसूख के चलते बच निकलते हैं।
पोंजी स्कीम का ‘खूनी’ जाल और EOW की ‘रहस्यमयी’ सुस्ती
मदर्स प्राइड और प्रेसिडियम के मालिकों ने केवल स्कूल नहीं चलाए, बल्कि अभिभावकों के भरोसे पर अपना लूट का साम्राज्य खड़ा किया है। पोंजी स्कीम के जरिए “बेहतर रिटर्न” और “फीस में छूट” का ऐसा मायाजाल बुना गया कि हज़ारों लोगों की जमा-पूंजी देखते ही देखते गायब हो गई।
अब जबकि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 2019 की FIR पर चार्जशीट दाखिल की है, तो जांच पर ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 4.15 करोड़ की ठगी के इस मामले में चार्जशीट तक पहुँचने में 10 साल कैसे लग गए? क्या यह देरी इसलिए की गई ताकि ये ‘सफेदपोश’ ठग अपनी अवैध संपत्तियां सुरक्षित कर सकें? चार्जशीट में ‘मनी ट्रेल’ और साजिश की कड़ियों को इतना ढीला छोड़ना साफ इशारा करता है कि सिस्टम इन्हें “सेफ पैसेज” देने की फिराक में है।

MCD के सस्पेंडेड JE से ‘शिक्षा टाइकून’ तक का सफर
यदि इसकी पृष्ठभूमि पर जाओगे तो शिक्षा जगत का यह ‘नटवरलाल’ देवेंद्र गुप्ता, साल 1999 में दिल्ली नगर निगम में जूनियर इंजीनियर के पद से सस्पेंड हुआ था। 26 साल से CBI का केस चल रहा है, लेकिन सिस्टम की मेहरबानी देखिए कि यह शख्स देखते ही देखते करोड़ों का ‘टाइकून’ बन गया। ‘मदर्स प्राइड’ और ‘प्रेसिडियम’ के ब्रांड का इस्तेमाल लोगों को लूटने के लिए किया गया।
आज जब पीड़ित इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं, यह परिवार द्वारका समालखा रोड पर 500 करोड़ के आलीशान फार्म हाउस में मर्सिडीज और रॉयल जैसी लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ ऐश कर रहा है। जबकि इनकी जगह कोई आम आदमी होता और उस पर छोटी मोटी ठगी के आरोप होते तो वह न केवल जेल यात्रा कर चुका होता बल्कि अदालतों के भी चक्कर लगा रहा होता।
क्या अगले ‘विजय माल्या’ की तैयारी है?
सूत्रों के अनुसार, अब यह परिवार अपनी लूटी हुई काली कमाई को दुबई में निवेश कर रहा है। वहां स्कूल-कॉलेज बनाने के नाम पर भागने की ज़मीन तैयार की जा रही है। अंदेशा साफ है। अब जब चार्जशीट का फंदा गले तक पहुँचने लगा है, तो ये लोग नीरव मोदी और विजय माल्या की तर्ज़ पर देश छोड़ने की फिराक में हैं।








