इस वर्ष जब होली का रंग हमारे द्वार पर आया है, दुनिया के कई कोनों में धूआँ अब भी उठ रहा है। कहीं युद्ध की आहट है, कहीं असुरक्षा की चिंता, कहीं मनुष्य का अपना मन ही उससे दूर हो रहा है।
ऐसे समय में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, मानवता की परीक्षा भी है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि अग्नि केवल दहन के लिए नहीं, अहंकार के अंत के लिए भी होती है। रंग केवल चेहरे पर नहीं, दृष्टि पर भी चढ़ने चाहिए ताकि हम भेद नहीं, बंधन देख सकें।
आज जब हम एक-दूसरे को रंग लगाएँ, तो साथ में यह संकल्प भी लें कि हम अपने भीतर की कटुता, विभाजन और हिंसा को होली की अग्नि में समर्पित करेंगे।
दुनिया को इस समय और शोर नहीं, और हथियार नहीं बस थोड़ा विश्वास, थोड़ा संवाद, और बहुत सारी करुणा चाहिए।
आइए, इस होली में रंगों से अधिक मानवता को बचाने का संकल्प लें।








