जलवायु परिवर्तन की दौर में इस बार भीषण गर्मी परने की संभावना

समस्तीपुर । पूसा डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 06-10 मार्च, 2024 तक के मौसम पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में आसमान प्रायः साफ तथा मौसम के शुष्क रहने का अनुमान है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 14-17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। पूर्वानुमानित अवधि में औसतन 10 से 15 कि0मी0 प्रति घंटा की रफ्तार से मुख्यतः पछिया हवा चलने का अनुमान है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 85 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 55 से 65 प्रतिशत रहने की संभावना है।

 

मौसम वैज्ञानिक को मानें तो जलवायु परिवर्तन के दौर में तापमान में लगातार बढ़ोतरी जारी है। यह वास्तविक रूप से भीषण गर्मी का संकेत दे रहा है। इस चर्चा पर मौसम विभाग भी मुहर लगा रहा है। बीते 10 दिनों के आंकड़ो पर चर्चा करें तो 3 मार्च को वर्षा के बावजूद दिन का तापमान 22.4 रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान इस माह के अबतक के उच्चतम स्कोर के साथ 17.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि सामान्य तौर पर बीते दस दिनों में दिन का तापमान 24 से 28 डिग्री एवं न्यूनतम 8 से 12 डिग्री के आसपास रहा। इस दौरान 20 मार्च के बाद भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अप्रैल-मई माह में भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इन दिनों

दिन व रात के तापमान में काफी फर्क है। इस दौरान मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक डा अब्दुस सत्तार ने समसामयिक सुझाव के अनुसार बताया कि पूर्वानुमानित अवधि में मौसम के शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए किसान भाई सरसों की कटनी, दौनी एवं सुखाने के कार्य को उच्च प्राथमिकता देकर समपन्न करें। आलू की खुदाई कर भंडारित करे। रवी मक्का की धनबाल व मोचा निकलने से दाना बनने की अवस्था वाली फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखें। बसंत ईख रोप के लिए उपयुक्त समय चल रहा है। मार्च के अन्तिम सप्ताह में यदि खेत में नमी की कमी होने पर रोप से पहले हल्की सिंचाई कर रोप करना चाहिए। ईख रोप हेतु दोमट मिट्टी तथा ऊँची जमीन का चुनाव कर गहरी जुताई करनी चाहिए। अनुशंसित प्रभेदो का चुनाव कर बीज मेड़ो की कवकनाशी (कार्वेडाजीम) 1 ग्रा० प्रति लीटर के घोल में 15-20 मिनट उपचारित कर रोपनी करनी चाहिए। प्रमेदो के बीज रोग-व्याधि से मुक्त होना चाहिए एवं रोग मुक्त खेतों से लेना चाहिए और जहाँ तक संभव हो 8-10 महीने के फसल को ही बीज के रुप में प्रयोग करना चाहिए।

गरमा मूंग तथा उरद की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। बुआई के पूर्व 20 किलो ग्राम नेत्रजन, 45 किलो ग्राम स्फूर, 20 किलो ग्राम पोटाश तथा 20 किलो ग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें। मूंग के लिए पूसा विशाल, सम्राट, एस०एम०एल०- 668, एच०यू०एम०-16 एवं सोना तथा उरद के लिए पंत उरद-19, पंत उरद-31, नवीन एवं उत्तरा किस्में बुआई के लिए अनुशंसित है। बुआई के दो दिन पूर्व बीज को कार्बन्डाजीम 2.5 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से शोधित करें। बुआई के ठीक पहले शोधित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करें। बीजदर छोटे दानों के प्रभेदों हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा बड़े दानों के प्रभेदों हेतु 30-35 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बुआई की दूरी 30×10 से०मी० रखें। प्याज की फसल में खर-पतवार निकालें।

फसल में 10 से 12 दिनों पर लगातार सिंचाई करें। प्याज में चिप्स कीट की निगरानी करें। यह प्याज को नुकसान पहुँचाने वाला मुख्य कीट है। यह आकार में अतिसुक्ष्म होता है तथा पत्तियों की सतह पर चिपक कर रस चुसते है जिससे पत्तियों का ऊपरी हिस्सा टेवा-मेढा हो जाता है। पत्तियों पर दाग सा दिखाई देता है जो बाद में हल्के सफेद हो जाते है। जिससे उपज में काफी कमी आती है। श्रीप्स की संख्या फसल में अधिक पाये जाने पर प्रोफेनोफॉस 50 ई०सी० दवा का 1.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड दवा का 1.0 मी.ली. प्रति 4 लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें। गरमा मौसम की सब्जियों की बुआई करें। 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर खाद की मात्रा पूरे खेत में अच्छी प्रकार विखेरकर मिला दें। कजरा (कटुआ) पिल्लू से होने वाले नुकसान से बचाव हेतु खेत की जुताई में क्लोरपायरीफॉस 20 ई0सी0 दवा का 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से

20-30 किलो बालू में मिलाकर व्यवहार करें। सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करें। मार्च में ज्वार, मक्का, लोबिया चारे की बुआई करें। बरसीम, जई एवं लुसर्न की सिचाई 10-15 दिन के अंतराल पर करें। हाइब्रिड नेपियर, नेपियर एवं गिनी घास की रोपाई के लिए खेत तैयार करें। सुर्यमुखी की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है। इसकी बुआई 10 मार्च तक संपन्न कर लें। खेत की जुताई में 100 क्विंटल कम्पोस्ट, 30-40 किलोग्राम नेत्रजन, 80-90 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटास का व्यवहार करे। उत्तर बिहार के लिए सूर्यमुखी की उन्नत संकुल प्रभेद मोरडेन, सूर्या, सी0ओ0-1 एवं पैराडेविक तथा संकर प्रभेद के लिए बी०एस०एच०-1, के०बी०एस०एच०-1, के०बी०एस०एच०-44, एम०एस०एफ०एच०-1. एम०एस०एफ०एच०-8 एवं एम०एस०एफ०एच०-17 अनुशंसित है। संकर किस्मों के लिए बीज दर 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संकुल किस्मों के लिए 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें।

 

बुआई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम धीरम या कैप्टाफ दवा से उपचारित कर बुआई करें। बसंतकालीन मक्का की बुआई करें। जुताई से पूर्व खेतों में प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर की खाद, 40 किलोग्राम नेत्रजन, 40 किलोग्राम स्फुर एवं 30 किलोग्राम पोटास का व्यवहार करें। बुआई के लिए सुवान, देवकी, गंगा 11, शक्तिमान 1 एवं 2 किस्में अनुशंसित है। बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें। प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम या कैप्टाफ द्वारा उपचारित कर बुआई करें। रवी मक्का की धनबाल व मोचा निकलने से दाना बनने की अवस्था वाली फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखें।

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