तो फिर भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय कोर्डिनेटर क्यों बना दिया बहन जी ?

चरण सिंह 

क्या बसपा मुखिया वास्तव में ही अपने किसी रिश्तेदार को अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाएंगी ? क्या अब मायावती संगठन को परिवार, रिश्ते नाते से अलग रखेंगी ? क्या आकाश आनंद का राजनीतिक करियर खत्म हो चुका है ? मायावती के राजनीतिक करियर पर नजर डालें तो देखने में आएगा कि मायावती कभी परिवार से बाहर निकल ही नहीं पाई। जब तक उनके भतीजे छोटे रहे तो भाई पार्टी में मुख्य भूमिका में रहें। जब भतीजा आकाश बड़ा हो गया तो मायावती ने भतीजे आकाश को लॉंच कर दिया।

यदि मायावती परिवार और रिश्ते से बसपा को दूर रखना चाहती हैं तो फिर अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय कोर्डिनेटर क्यों बना दिया ? जिन मायावती की वजह से उनका नोएडा अथॉरिटी में चतुर्थ क्लास का कर्मचारी रहा भाई अरबो और खरबो का मालिक बन गया। जिस आकाश को मायावती ने पूरी पार्टी सौंपने का मन बना लिया था। राजनीति में स्थापित करने में पूरी जान लगा रही थीं, उस आकाश का वह अपने हाथों से ही राजनीतिक करियर खत्म कर देंगी ?

दरअसल यह सब बसपा और आकाश आनंद चमकाने का तरीका है। बिन पैसे के बसपा और आकाश आनंद का प्रचार हो रहा है। टीवी चैनलों पर बीएसपी की चर्चा खत्म हो गई थी अब टीवी चैनलों पर डिबेट चल रही हैं। सोशल मीडिया पर मामला छाया हुआ है। इन्हीं मायावती ने लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद को अपरिपक्व बताते हुए घर बैठा दिया था। इन्हीं ने फिर से उनको अपना उत्तराधिकारी बना दिया था।
ऐसे ही फिर से भी कर देंगी। जिस तरह से मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को पार्टी की बागडोर सौंपी थी उसी तरह से मायावती भी आकाश आनंद को पार्टी की बागडोर सौंप देंगी।  यह भी कह सकते हैं कि आकाश आनंद पार्टी को कब्जाएंगे। ऐसे में प्रश्न उठता है क्या राम जी गौतम पार्टी को चला लेंगे ? आकाश आनंद की पकड़ संगठन पर हो गया है। बीएसपी के कार्यकर्ता आकाश आनंद के तेवर को पसंद करते हैं। आज की तारीख में यदि आकाश आनंद ने बगावत आकर दी तो पार्टी के अधिकतर नेता आकाश आनंद की ओर खड़े दिखाई देंगे। इसकी बड़ी वजह यह है कि मायावती बीजेपी से डरी हुई हैं और आकाश आनंद बीजेपी को पूरी तरह से ललकार दे रहे हैं। बीएसपी कार्यकर्ताओं को आकाश आनंद का बोलने का तरीका बहुत पसंद आता है। ऐसे में आकाश आनंद का बीएसपी से बेदखल करना बहुत मुश्किल है।
रामजी गौतम को तो उन्होंने मज़बूरी में बनाया है। पार्टी के निर्णय तो मायावती और आनंद कुमार ही लेंगे। जब आकाश आनंद को उत्तराधिकारी बनाया जाएगा तो राम जी गौतम बेचारे हटा दिए जायेंगे। यदि मायावती इतनी ही उसूलों वाली हैं तो फिर इतने लम्बे अंतराल में कितने दलित नेता बनाएं ? चंद्रशेखर आज़ाद की थोड़ी सी लोकप्रियता वह पचा नहीं पाई थीं। मायावती की राजनीति का यह अंतिम दौर चल रहा है। अब उन्हें पार्टी को सेकेण्ड लाइन के नेताओं को सौंपना है। मतलब आकाश आनंद का प्रचार कर फिर उन्हें सौंपेंगी। जहां एक उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की बात है तो रिश्तेदारों की नाराजगी कुछ दिनों की होती है। ,क्योंकि मायावती लड़के पक्ष से हैं तो अशोक सिद्धार्थ को झुकना ही है। मायावती कितना भी बोल लें कि राजनीतिक लोगों से वह रिश्तेदारी नहीं करेंगी।
बसपा पर उनके रिश्तेदारों का ही कब्ज़ा होगा।
दरअसल बसपा मुखिया मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर के पद से हटा उनके पिता आनंद कुमार को बना दिया है। मतलब बेटे को हटाकर पिता को बना दिए गया। एक ओर राष्ट्रीय कोर्डिनेटर रामजी गौतम को बनाया गया है। देखने की बात यह है कि  मायावती ने गत दिनों आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया था। बसपा चीफ ने एक बैठक के दौरान अपने उत्तराधिकार पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि मेरी आखिरी सांस तक कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा।
मायावती ने यह भी कहा है कि अब उनके भाई आनंद के बच्चों की शादी राजनीति से जुड़े परिवार में नहीं होगी। इसके पीछे वजह बताते हुए मायावती ने कहा आनन्द कुमार के बारे में यहां मैं यह भी अवगत कराना चाहती हूं कि वर्तमान में बदले हुए हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब उन्होंने अपने बच्चो का रिश्ता भी गैर-राजनीतिक परिवार के साथ ही जोड़ने का फैसला लिया है ताकि अशोक सिद्धार्थ की तरह अब आगे कभी भी अपनी पार्टी की किसी भी प्रकार से कोई नुकसान आदि ना हो सके।

यह सब मायावती ने प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से कहा है। मायावती ने कहा है कि अब मैंने खुद भी यह फैसला लिया है कि मेरे जीते जी व मेरे आखिरी सांस तक भी अब पार्टी में मेरा कोई भी उत्तराधिकारी नहीं होगा। बसपा चीफ ने अपनी उस बात को आज फिर से दोहराया है कि मेरे लिए पार्टी व मूवमेंट पहले है। भाई-बहन व उनके बच्चे तथा अन्य रिश्ते नाते आदि सभी बाद में हैं। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने पार्टी के लोगों को यह भी विश्वास दिलाया है कि जब तक मैं जिन्दा रहूंगी तो तब तक मैं अपने आखिरी सांस तक भी अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से पार्टी को आगे बढ़ाने का हर सम्भव पूरा-पूरा प्रयास करती रहूंगी।

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