नजूल संपत्ति पर आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों के परिजनों का हक!

चरण सिंह
आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों की जो संपत्ति कब्जाई थी वह संपत्ति नजूल संपत्ति कहलाई। नजूल संपत्ति से जानकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश को आजाद कराने वाले क्रांतिकारियों और उनके परिवार ने कितना कुछ सहा। मतलब जो लोग आजादी की लड़ाई में भाग ले रहे थे। अंग्रेजी हुकूमत उनकी संपत्ति जब्त कर या तो अपने मुखबिरों को दे रही थी या फिर सरकारी संपत्ति घोषित कर दे रही थी। मतलब क्रांतिकारियों और उनके परिजनों ने इस देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नजूल संपत्ति पर बड़ा प्रश्न उठता है कि क्या देश आजाद होने के बाद क्रांतिकारियों की यह संपत्ति उनके परिजनों को नहीं मिलनी चाहिए थी ?
मतलब आजाद भारत देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों के और कुछ तो नहीं दे पाया पर उनकी जब्त संपत्ति भी उनको नहीं मिल पाई। इसे देश का दुर्भाग्य ही माना जाएगा कि जिन लोगों ने अंग्रेजों की मुखबिरी की वे लोग आज आजाद भारत की भी मलाई चाट रहे हैं और जिन लोगों ने देश को आजाद कराया उनके परिजन फटे हाल में हैं। कहना गलत न होगा कि जो लोग अंग्रेजी हुकूमत में मजे मार रहे थे वे आजाद भारत में भी मजे मार रहे हैं। जिस विचारधारा की भारतीय जनता पार्टी है उस विचारधारा के लोग तो अंग्रेजों के साथ थे। इन लोगों का मानना तो यह था कि अंग्रेजों के आने के बाद ही मुगल शासन का अंत हुआ। ये लोग यह नहीं बताते कि पूरे देश पर तो मुगलों का राज कभी रहा ही नहीं।
ऐसेे ही १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम कुचलने वाली रामपुर, पटौदी और ग्वालियर रियासतें आजाद भारत के संसाधनों की सबसे अधिक मजा लूटती रहीं। यदि आज सर्वे हो तो जो लोग आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के साथ थे उनके पास अथाह संपत्ति होगी। और जो लोग देश की आजादी के लिए लड़े वे बर्बाद हो गये। राजनीति में भी धनवान लोगों को तवज्जो दी गई।
नजूल संपत्ति का मुद्दा इसलिए उठ रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्ति विधेयक को लेकर बवाल मचा हुआ है। योगी सरकार नजूल संपत्ति को लेकर एक विधेयक लेकर आई और उसे विधानसभा में पास भी करा लिया। वह बात दूसरी है कि जब उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस विधेयक को विधान परिषद में पेश किया तो खुद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विधान परिषद सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने इस पर विचार विमर्श करने के नाम पर प्रवर समिति के पास भिजवा दिया। मतलब खुद बीजेपी ने इस विधेयक को रुकवा दिया। विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया है। नजूल संपत्ति को लेकर बड़ा प्रश्न यह है कि जब यह संपत्ति क्रांतिकारियों की है तो फिर उनके परिजनों को क्यों नहीं दी जा रही है ?

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