किसान संघर्ष समिति द्वारा कल तीसरे दिन भी धरना जारी रहेगा

बिजली की समस्या को लेकर किसान संघर्ष समिति
बिजली कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपेगी

मक्का की 3000 रुपए, सोयाबीन 8000, धान की 3012 रुपये, गन्ना की 500 रुपये, कपास की 10121 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकारी खरीदी की मांग की

कर्ज़ माफ़ी, बिजली बिल 2025 रद्द करने और एलएआरआर 2013 को लागू करने की मांग

मुलतापी : किसान संघर्ष समिति का किसान स्तंभ पर धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
कल 3 दिन होने पर धरना का समापन किया जाएगा। 3 दिवसीय धरना संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश भर में
26 नवंबर को होने वाले विशाल आंदोलन के परिपेक्ष में किया जा रहा ।

मोदी सरकार की विफलता के खिलाफ देश भर के किसान एमएसपी, ऋणग्रस्तता, भूमि मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले जबरन भूमि अधिग्रहण, उर्वरकों की कालाबाजारी, मनरेगा के तहत काम और मजदूरी से इंकार, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को मुआवजा नहीं देने और जबरन प्रीपेड बिजली मीटर लगाने जैसे मुद्दों को लेकर एस के एम देश भर में आंदोलन है।

केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए धान का एमएसपी @A2+FL+50% पर 2369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा घोषित कीमतों को सुनिश्चित करने में सरकार के विफल होने के बाद से किसान देश भर में औने-पौने भावों पर बिक्री के लिए मजबूर हुए हैं। उत्तर प्रदेश में, वर्तमान में धान 1500-1600 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचा जा रहा है, जो 2369 रुपये के आधिकारिक एमएसपी से लगभग 800 रुपये कम है, यानी किसानों को घोषित न्यूनतम दर का केवल दो-तिहाई ही मिल रहा है। उत्तरप्रदेश में धान का उत्पादन लगभग 300 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन 4,000 खरीद केंद्रों के माध्यम से केवल 60 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद की जा रही है, जो राज्य में कुल उत्पादन का मुश्किल से 20% है। इसमें भी, 80% धान की आपूर्ति सरकारी तंत्र से जुड़े बिचौलियों और माफियाओं के माध्यम से की जा रही है। हरियाणा के करनाल और कुरुक्षेत्र से हाल ही में मिली खबरों के अनुसार, खरीद केंद्रों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। चावल मिल मालिक औने-पौने दामों पर धान खरीद रहे हैं।
सरकार द्वारा घोषित 2369 रूपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन फार्मूले के C2+50% के 3012 रूपये प्रति क्विंटल की दर से 700 रुपए कम है। किसानों को लगभग 1600 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में, किसान 1200 रुपए से 1400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। यहाँ तक कि हरियाणा में, जहाँ कृषि विपणन समिति (APMC) मंडियाँ हैं, वहाँ भी नमी के नाम पर कटौती के कारण किसानों को 400 रुपए कम मिल रहे हैं यानी धान का भाव केवल 1900-2000 प्रति क्विंटल ही मिल रहा हैं। किसान नमी की सीमा 17% के बजाय 22% करने की मांग कर रहे हैं।

हालाँकि बासमती/रामभोग श्रेणी (सुपर फाइन) धान घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाज़ारों में ऊँची कीमत पर बिकता है, लेकिन मोदी सरकार के पास प्रीमियम मूल्य और ख़रीद को लेकर कोई नीति नहीं है, जिससे बिचौलियों द्वारा व्यापक लूट को बढ़ावा मिलता है। किसानों की माँग है कि बासमती के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए और एक स्थापित ख़रीद तंत्र बनाया जाए। मूंग के किसानों को 4000 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम दाम मिल रहे हैं, जबकि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपये प्रति क्विंटल है। कपास के किसान 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 7710 रुपये प्रति क्विंटल है।
पूरे भारत में बड़े पैमाने पर उर्वरकों की कालाबाज़ारी और अधिक मूल्य निर्धारण हो रहा है। किसानों को दिन भर कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है ; 270 रूपये में बिकने वाले यूरिया बैग को 700 रुपए में बेचा जा रहा है और बड़े व्यापारी भारी मुनाफाखोरी कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा यूरिया और डीएपी की पूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने, कालाबाज़ारी, जमाखोरी और नकली उर्वरकों पर रोक लगाने की माँग करता है। किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जिंक लेने के लिए मजबूर न किया जाए।
देश भर में, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को मनमाने बिजली बिल भेजे जा रहे हैं, जबकि कनेक्शन केवल कागज़ों पर ही है। किसान और मज़दूर इन बिलों का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। मोदी सरकार प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोप रही है। किसान संघर्ष समिति बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने, बिजली का निजीकरण न करने, प्रीपेड स्मार्ट मीटर न लगाने और 300 यूनिट प्रति माह मुफ़्त बिजली देने की मांग करती है।

धरना में राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ सुनीलम, जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कृष्णा ठाकरे, तहसील अध्यक्ष कृपाल सिंह सिसोदिया, भाकपा नेता पिरथी बारपेटे, जिला सचिव गुलाब देशमुख, विनोदी महाजन, भूरेंद्र माकोड़े, रामदास बारपेटे, सुभाष लिखितकर, अनिल देशमुख, कैलाश डोंगरदिये, धनाराम डोंगरदिये, प्रयागराज सोलंकी, कुकुलाल डहारे, मोहनलाल डोंगरे, परसराम आदि शामिल हुए

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