संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने हाल ही में वैश्विक मुद्दों पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण बयान दिए हैं, जो ट्रंप और शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली अमेरिका-चीन की द्विध्रुवीय (bipolar) दुनिया की आलोचना के रूप में देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान “मनमानी” (arbitrary या एकतरफा तरीके) से नहीं होगा, बल्कि एक सच्ची बहुध्रुवीय दुनिया (multipolar world) में बहुपक्षीय संस्थाओं और सहयोग से होगा।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वैश्विक समस्याओं का हल किसी एक या दो देशों के दबदबे से नहीं निकलेगा, न ही दुनिया को गुटों में बांटकर। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका (ट्रंप) और चीन (जिनपिंग) की एकतरफा नीतियों पर कटाक्ष माना जा रहा है, खासकर ट्रंप की टैरिफ नीतियों और द्विपक्षीय दबाव के दौर में। गुटेरेस ने जोर दिया कि स्थिरता और शांति के लिए विभिन्न देशों के बीच घना नेटवर्क (trade, technology, cooperation) जरूरी है।
भारत-EU डील पर उन्होंने सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हाल के व्यापार समझौतों से उन्हें बहुत सकारात्मक उम्मीदें हैं, जिसमें EU-India समझौता भी शामिल है (साथ ही EU-Mercosur, EU-Indonesia, Canada-China, UK-China आदि)। उनका मानना है कि ऐसे समझौते बहुध्रुवीय दुनिया को मजबूत बनाते हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल्यों को बढ़ावा देते हैं।
यह बयान 29 जनवरी 2026 को उनकी 2026 प्राथमिकताओं पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया, ठीक जब भारत और EU ने हाल ही में “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहलाने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल किया है, जिसे ट्रंप की टैरिफ नीतियों के खिलाफ एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
संक्षेप में, गुटेरेस ने ट्रंप-जिनपिंग युग की एकध्रुवीय या द्विध्रुवीय सोच को खारिज करते हुए बहुपक्षवाद और सहयोग की वकालत की, और भारत-EU डील को वैश्विक सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया।






