मार्क्स, गांधी और जे पी के विचारों के साथ अनवरत संघर्ष करने वाले साथी थे राकेश रफीक
लखनऊ के गांधी भवन में जनांदोलनों की अखिल भारतीय बैठक में देशभर के जनांदोलनों से जुड़े नेताओं ने बिलारी (मुरादाबाद) के क्रांतिकारी, आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राकेश रफीक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

देशभर के 15 राज्यों से आए जनांदोलनों के 250 साथियों ने उन्हें मार्क्स, गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों को आगे ले जाने वाला योद्धा बताते हुए गत 40 वर्षों के संघर्षों से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए। आंगनबाड़ी यूनियन की डॉ वीणा गुप्ता, झारखंड के मंथन बिहार के शाहिद कमाल, वाराणसी की जागृति राही और अनूप श्रमिक, बलिया के राघवेंद्र, लखनऊ के आलोक और योगेंद्र यादव, मऊ के अरविन्द मुर्ति, यवतमाल के ज्ञानेंद्र आदि साथियों ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष,पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि डॉ राकेश रफीक व्यवस्था परिवर्तन के लिए 40 वर्षों तक सतत युवाओं को वैचारिक तौर पर प्रशिक्षित करते रहे। डॉ रफीक ने किसान आंदोलन, अन्ना आंदोलन में तो बढ़ चढ़कर भाग लिया ही साथ ही देश भर के अलग-अलग राज्यों में होने वाले आंदोलनों का जमीनी स्तर पर समर्थन भी किया। युवा भारत का निर्माण भी किया।

उन्होंने कहा कि वें देश के उन चुनिंदा नेताओं में थे जिनकी वैचारिक स्पष्टता थी, जमीनी स्तर पर पकड़ थी तथा देशभर के आंदोलनकारियों से व्यक्तिगत रिश्ता भी था।
सभी वक्ताओं ने कहा कि डॉ राकेश रफीक ने डॉ मीनाक्षी सखी के साथ आजीवन जीवनसाथी के तौर पर एक आदर्श प्रस्तुत किया, सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों को दोनों ने मिलकर चुनौती दी। डॉ राकेश रफीक को 2 मिनट का मौन रखकर देश भर के आंदोलनकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि अर्पित की।








