बीजेपी में टूट रहा मोदी-अमित शाह का तिलिस्म!

चरण सिंह

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे ही गृह मंत्री अमित शाह से मोर्चा नहीं ले रहे हैं ? ऐसे ही उन्होंने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को उप चुनाव से दूर नहीं किया है। ऐसे ही उन्होंने प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लोकसभा चुनाव हारने का कारण अति आत्मविश्वास नहीं बताया था ? दरअसल योगी आदित्यनाथ के सिर पर आरएसएस का हाथ है। 2017 में जब वह मुख्यमंत्री बने थे तो आरएसएस के हस्तक्षेप से बने थे। अब जब केंद्रीय नेतृत्व उनको निपटाने में लगा है तो आरएसएस ने फिर से उनके साथ खड़ा हो गया। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अनौपचारिक रूप से प्रधानमंत्री की मजाक बनाकर दर्शा दिया कि अब वह सीधे बीजेपी नेतृत्व से मोर्चा लेने के मूड में हैं। हों भी क्यों न। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अब पार्टी को आरएसएस की जरूरत न होने की बात जो कह दी थी। जगजाहिर है कि जेपी नड्डा से यह बयान किसने दिलवाया था।
दरअसल झारखंड के गुमला में ग्राम स्तरीय कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा है कि लोग इंसान से सुपरमैन से देवता, देवता से भगवान बनना चाहते हैं। मोहन भागवत के इस बयान पर कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने बाकायदा तंज कसते हुए कहा कि शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अग्नि मिसाइल दागने की खबर मिल गई होगी। मतलब साफ है कि मोहन भागवत अब खुलकर खेल करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि आज की तारीख में बीजेपी के कई सांसद और नेता आरएसएस प्रमुख के संपर्क में हैं।
कहना गलत न होगा कि बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का तिलिस्म टूट रहा है। जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके दबाव में नहीं आ रहे हैं वहीं उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ रावत ने मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास नारे पर उंगली उठाते हुए नारा दे दिया कि हम उनके साथ जो हमारे साथ।

कर्नाटक में पुराने दलित नेता रमेश जिगाजिनागी बीजेपी नेतृत्व को दलित विरोधी करार दे चुके हैं। महाराष्ट्र में एनसीपी से आये अजित पवार और कांग्रेस से आये अशोक चव्हान का विरोध पुराने बीजेपी नेता कर रहे हैं। ये नेता पार्टी नेतृत्व की नीतियों पर उंगली उठा रहे हैं।  ऐसे ही विभिन्न राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के विरोध में स्वर फूट रहे हैं। बताया जा रहा है कि 12 राज्यों में गुजरात लॉबी के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है। नितिन गडकरी गोवा में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जो करेगा जाति की बात उसके लगेगी लात वाली बात कह चुके हैं। हरियाणा में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने नीट मामले में कहा है कि यदि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो युवाओं का राजनीति और सरकारों से विश्वास उठ जाएगा।
उत्तर प्रदेश में भले ही केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खुलवा रखा हो पर इस विरोध का खास असर योगी आदित्यनाथ पर नहीं देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में एक दिलचस्प बात यह भी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन की जबरदस्त अंडरस्टैंडिंग देखी जा रही है। जबकि देखा जाता रहा है कि राज्यपाल उस मुख्यमंत्री के खिलाफ होता है जिसके खिलाफ केंद्र होता है। दरअसल आनंदी बेन और अमित शाह का गुजरात से ही ३६ का आंकड़ा बताया जाता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोड़कर देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद अमित शाह गुजरात का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे पर आनंदी बेन के सामने उनकी एक न चली। मतलब योगी आदित्यनाथ अमित शाह के लिए शिवराज चौहान, वसुंधरा राजे, रमन सिंह की तरह नहीं हैं। योगी आदित्यनाथ के लिए आरएसएस खुलकर सामने आने के लिए भी तैयार बैठा है। बताया जा रहा है कि इसी वजह से अमित शाह योगी ने आदित्यनाथ के खिलाफ उत्तर प्रदेश में मोर्चा खुलवा रखा है।
योगी आदित्यनाथ अमित शाह की यह चाल समझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी से कहलवा दिया गया कि वह हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऑफर दे दिया। ऐसे पर अमित शाह योगी पर दबाव बना रहे हैं कि ऐसे ही योगी आदित्यनाथ हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ा जा रहा था और टिकटों का बंटवारा गृहमंत्री अमित शाह ने किया। न तो उनकी टिकट बांटने में उनकी सुनी गई और न ही काटने में, तो फिर वह क्या करते ? ऊपर से उनके  राजपूत समाज को और अपमानित कर दिया गया। दरअसल गुजरात राजकोट से चुनाव लड़ रहे पुरुषोत्तम रुपाला ने बयान दे दिया कि राजपूत शासकों के विदेशी आक्रांताओं और अंग्रेजों से रोटी और बेटी के रिश्ते थे। मतलब उन्होंने राजपूत शासकों को गद्दार साबित करने का प्रयास किया। ऐसे में जब राजपूत समाज ने रुपाला का टिकट काटने की मांग की तो उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया। ऐसे में योगी आदित्यनाथ ने अपनी बेबसी जाहिर कर दी है। मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की बीजेपी से पकड़ लगातार ढीली होती जा रही है।

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