जंतर मंतर और कनॉट प्लेस आसपास के आसपास के 18 मेट्रो स्टेशन बंद, बसों के बदल दिए हैं रूट, बंद कर रखा है नेट
चरण सिंह
आखिर यह सरकार चाहती क्या है ? दिल्ली में 18 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं । जंतर मंतर, कनॉट प्लेस और आसपास का नेट बंद है। अब कनॉट प्लेस जाने वाली अधिकतर बसों का भी रूट बदल दिया गया है। दरअसल कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्र में हजारों लोग नौकरी करते हैं। कितनों के अपने ऑफिस हैं। कोर्ट हैं। सरकारी ऑफिस हैं, सरकार को कुछ एहसास भी है कि लोग अपने ऑफिस कैसे जा रहे हैं ? मेट्रो आप बंद रखेंगे। बसों के रूट बदल देंगे। नेट भी बंद कर देंगे। यदि दूर दराज मेट्रो स्टेशन से कैब या टेमो करके ऑफिस आया जाए तो ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए नेट नहीं चल रहा है। क्या लोग अपने ऑफिस जाना छोड़ दें।
ऐसा भी नहीं है कि सरकार के इन हथकंडों से जंतर मंतर पर युवाओं की कोई भीड़ कम हो रही है। भीड़ तो लगातार बढ़ ही रही है। फिर ये नौटंकी क्यों ? क्या सरकार चाहती है कि मेट्रो स्टेशनों और बसों में हंगामा हो। सरकार ने इस ओर यदि सार्थक कदम नहीं उठाए तो कनॉट प्लेस में जॉब करने वालों लोगों का हंगामा भी सरकार को झेलना पड़ सकता है। सरकार बताए कि लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालान ,मेट्रो स्टेशन के आसपास पड़ने वाले ऑफिस में लोग कैसे पहुंचें ? केंद्र सरकार तुगलगी फरमान जारी कर लोगों के सामने परेशानी खड़ी कर रही है।
सब कुछ करेंगे पर छात्र शिक्षा व्यवस्था का कबाड़ा करने वाले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं ले सकते हैं। हालांकि सरकार ने एक तरह से सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया है पर सीजेपी के धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ने पर अंदोलन टिका हुआ है। लोगों के अंदर से सरकार का डर निकल चुका है। जिन बच्चों के मुंह पर मोदी मोदी हुआ करता थे वे मोदी को गालिया रहे हैं। छोटे छोटे बैठे मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इन सबके बावजूद मोदी सरकार अपनी जिद नहीं छोड़ रही है। कहीं ऐसा न हो कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के चक्कर में सरकार ही गिर जाए।






