सम्राट अशोक की धम्म नीति का उड़ीसा के जनमानस पर पड़ा है प्रभाव

आदित्य कुमार

भारत के इतिहास में दो महापुरुषों ने भारत के इतिहास को ही नहीं बल्कि दुनिया के इतिहास को प्रभावित किया। मैं कभी लुंबिनी या गया नहीं गया लेकिन सारनाथ गया हूं गोतम बुद्ध ने जहां से अपना प्रथम उपदेश दिया। दूसरा स्थान धोली गिरी शांति स्तूप देखने का अवसर मिला।

दो दिवसीय भूवनेश्वर प्रवासके दौरान समाजवादी नेता स्वर्गीय श्री रवि राय जी की जन्म शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए भुवनेश्वर गया। वयस्त समय में समय निकालकर से उड़ीसा का इतिहास, जानने लोग संस्कृति ने का मौका मिला । 30 नवंबर उड़ीसा के समीप उस शाम को देखने का मौका मिला जहां आज से लगभग 2300साल पहले कलिंग युद्ध लड़ा गया।ओर उस स्थान को भी देखने का मौका मिला जहां अशोक के बोद्व भिक्षु द्वारा अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ। उस स्थान को धोली गिरी शांति स्तूप कहां गया जो एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है वही पर अशोक कालीन पत्थर का शिलालेख भी है जिसे देख कर रोमांचित हो गया शायद यह महान सम्राट अशोक की धम्म नीति का उड़ीसा के जनमानस पर प्रभाव पड़ा उड़ीसा के जनमानस कि मानो स्थिति देखकर यह महसूस हुआ उड़ीसा का जनमानस सरल संतुष्ट सहज और भोला भाला है धवलगिरी के उपरांत टेंपो द्वारा मै जगन्नाथ पुरी पहुंचा जहां अपार श्रद्धालुओं की भीड़ देखी।

महसूस हुआ मिथक का भी जीवन में बहुत बड़ा महत्व है जिसको तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता है या दूसरे शब्दों में कहा जाए जगन्नाथ पुरी आस्था का शहर है जहां संपूर्ण भारत से लोग आस्था के साथ जगन्नाथ पुरी पहुंचते हैं फिर मैं पूरी के समुद्र किनारे काफी देर तक चलता रहा और उड़ीसा की संस्कृति के बारे में चिंतन करता रहा इसके बाद मैं इतिहास में चर्चित कोणार्क मंदिर के लिए प्रस्थान किया रास्ते में मंदिर जाते हुए चंद्र बाग बीच पड़ा जो सूर्य मंदिर से 3 किलोमीटर पूर्व में स्थित है चंद्रभागा बीच में मुझे बहुत आकर्षित किया अपने जीवन में इससे सुंदर बी नहीं देखा काफी देरतक चंद्रभागा बी को देखता रहा।

चंद्रभागा Beach बार-बार उठने वाली लहरें मानव जीवन का एक संदेश दे रही हो जीवन में सुख दुख की लहरें उठती है फिर उसे समाप्त हो जाती है लेकिन समुद्र की तरह जीवन भी शांत रहना चाहिए। फिर मैं अपने टेंपो चालक के साथ फिर मैं अपने टेंपो चालक के साथ कोणार्क मंदिर पहुंचा। कोणार्क मंदिर को सूर्य मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 12 38 से लेकर 1264 के बीच गंग वंश के राजा नरसिंह देव प्रथम ने बनवाया था जो एक रथ के रूप में है जिसमें 12 पहिए और सात घोड़े है इस मंदिर की विशेषता यह है इस मंदिर की सूर्य की रोशनी के बाद मंदिर की किसी भी तरफ मंदिर की छाया नहीं होती है दूसरी खास बात इस मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई चित्रों के माध्यम से जीवन के हर पहलुओं को छुआ है इसकी अद्भुत वास्तुकला और स्थापत्य कला के कारण विश्व धरोहर स्थल में दर्ज है।

उड़ीसा और भारत के अन्य प्रदेशों को घूमने के बाद यह महसूस हुआ। भारत भिन्न-भिन्न संस्कृतियों भिन्न-भिन्न भाषाओं और विश्वासों का परिसंघ है पूरे भारत पर किसी भी एक संस्कृति एक विश्वास एक भाषा को थोपानहीं जा सकता है भारत की माटी की यह खूबी रही है वह सब संस्कृति भाषण विश्वासो को साथ लेकर चलती है यही कारण रहा भारत से 10 दर्शन हुए उसमें से चार दर्शन नास्तिक है लेकिन सबको सम्मान भारत मिला कहीं टकरा नहीं हुआ या यह कहा जाए असहमति को भी सम्मान देना यह भारत की खूबी है मैं महसूस करता हूं भारत का वही नेतृत्व कर सकता है जिसमें सबको शामिल करने की काबिलियत हो। इस प्रकार के संगठन का बेसब्री से राष्ट्र और समाज को इंतजार है।

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