न्यायालय का तर्क था कि धारा 302 के तहत कारावास में बंद व्यक्ति को प्रस्तुत करने के आदेश से संबंधित फॉर्म 37 में जेल अधीक्षक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह आरोपी को आदेश की सामग्री से अवगत कराए और संलग्न प्रति उसे सौंपे। यह पर्याप्त संचार माना जाएगा। डॉ. न्यायमूर्ति कौसर एडप्पगथ ने हालांकि स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में आरोपी के परिजनों को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना देना अनिवार्य है।
न्यायालय एनडीपीएस मामले के छठे आरोपी की जमानत याचिका पर विचार कर रहा था, जिसे पिछले वर्ष मार्च में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी का कहना था कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के आधारों की सूचना नहीं दी गई, जबकि अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि सूचना दी गई थी। अभियोजन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य और कसिरेड्डी उपेंद्र रेड्डी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि जब आरोपी को वारंट पर गिरफ्तार किया जाता है और वारंट उसे पढ़कर सुनाया जाता है, तो अलग से लिखित सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती।
न्यायालय की राय थी कि यद्यपि सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त निर्णय धारा 72 बीएनएसएस के वारंट से संबंधित हैं, इन्हें धारा 302 बीएनएसएस के प्रोडक्शन वारंट पर भी लागू किया जा सकता है। लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे मामलों में भी आरोपी के परिजनों को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना देना अनिवार्य है।
न्यायालय ने कहा:
“मैं कोई कारण नहीं देखता कि मिहिर राजेश शाह (उपर्युक्त) और कसिरेड्डी उपेंद्र रेड्डी (उपर्युक्त) में धारा 72 बीएनएसएस के तहत जारी वारंट से संबंधित निष्कर्ष को धारा 302 बीएनएसएस के तहत फॉर्म 37 में जारी आदेश पर लागू न किया जाए। फॉर्म 37 का आदेश उस जेल अधीक्षक को संबोधित है जहाँ आरोपी बंद है। फॉर्म 37 के पैरा 3 में स्पष्ट निर्देश है कि जेल अधीक्षक आरोपी को आदेश की सामग्री बताए और संलग्न प्रति उसे सौंपे। अतः मैं मानता हूँ कि जब आरोपी की औपचारिक गिरफ्तारी धारा 302 बीएनएसएस के तहत जारी आदेश/प्रोडक्शन वारंट के आधार पर दर्ज की जाती है, तो उसे गिरफ्तारी के आधारों की अलग से सूचना देने की आवश्यकता नहीं है। फॉर्म 37 का आदेश/वारंट ही इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, ऐसे मामलों में भी आरोपी के परिजनों को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना देना अनिवार्य है।”
वर्तमान मामले में आरोपी के परिजनों को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना नहीं दी गई थी, न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी दोषपूर्ण है और आरोपी जमानत पाने का हकदार है। इस प्रकार न्यायालय ने शर्तों के साथ जमानत याचिका स्वीकार कर ली।







