वनवासियों के हितचिंतक स्वामी आत्मानंद

रामकृष्ण मिशन से संबंधित स्वामी आत्मानंद जी का जन्म छह अक्तूबर, 1929 को ग्राम कपसदा (रायपुर, छत्तीसगढ़) निवासी धनीराम वर्मा के घर हुआ था। जन्म से एक दिन पूर्व उनकी माता श्रीमती भाग्यवती देवी को सपना आया कि साक्षात भगवान उनकी गोदी में बैठे हैं और वे उन्हें दूध पिला रही हैं। धर्मपे्रमी मां ने इसे ईश्वरीय संकेत समझ कर बच्चे का नाम ‘रामेश्वर’ रखा। तुला राशि में जन्म के कारण वे तुलेन्द्र भी कहलाए।

धनीराम जी अध्यापक थे; पर 1942 के आंदोलन में जेल जाने से उनकी सरकारी नौकरी समाप्त हो गयी थी। कुछ समय बाद तुलेन्द्र पढ़ने नागपुर गये। वहां रामकृष्ण मिशन के छात्रावास में उनके रहने और भोजन की व्यवस्था हो गयी। वहां उन्होंने मंत्र दीक्षा ली। वे संन्यास भी लेना चाहते थे, पर गुरु के आदेश से एम.एस-सी कर अति प्रतिष्ठित आई.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण की; पर उसके प्रति अनिच्छा के कारण मौखिक परीक्षा छोड़ दी।

1960 में बुद्ध पूर्णिमा पर उन्होंने अमरकंटक में नर्मदा तट पर रामकृष्ण परमहंस के चित्र के सम्मुख स्वयं ही संन्यास लेकर अपना नाम आत्मानंद रख लिया। कई वर्ष बाद नागपुर आश्रम की अनुमति से वे कोलकाता में बेलूड़ मठ गये और ब्रह्मचर्य दीक्षा ली। अब उनका नाम ब्रह्मचारी तेज चैतन्य हो गया। इसके बाद ऋषिकेश में छह माह स्वामी पुरुषोत्तमानंद के पास योग वशिष्ठ का अध्ययन किया। वहां से वे अपने गृह नगर रायपुर आये।

रायपुर में दो मास तक विवेकानंद अपने माता-पिता के साथ रहे थे। आत्मानंद जी की इच्छा वहां एक भव्य स्मारक बनाने की थी; पर बेलूड़ मठ ने अनुमति नहीं दी। अतः उन्होंने ‘रामकृष्ण सेवा समिति’ का गठन कर अपने बलपर इसे बनाने का निर्णय लिया। इसमें उन्हें बहुत कष्ट और अपमान झेलने पड़े। वे स्वामी विवेकानंद के जन्मशती वर्ष (1963) तक स्मारक पूरा करना चाहते थे। इसके लिए काफी धन चाहिए था। अतः उन्होंने रायपुर के नगरपालिका भवन में प्रति रविवार गीता पर प्रवचन शुरू किया। इससे कुछ धन आने लगा। यह देखकर शासन ने उन्हें एक बड़ा भूखंड स्मारक के लिए दे दिया।

कुछ समय में वहां आश्रम जैसा स्वरूप बन गया। 30 युवकों ने संन्यास की दीक्षा भी ली। 14 नवम्बर, 1969 को मिशन के अध्यक्ष स्वामी वीरेश्वरानंद ने रामकृष्ण मंदिर का शिलान्यास तथा दो फरवरी, 1976 को उद्घाटन किया। इस बीच म.प्र. में अकाल पड़ने से मंदिर के लिए एकत्रित काफी धन जनसेवा में लग गया। फिर भी क्रमशः मंदिर, छात्रावास, पत्रिका, डाकघर, पुस्तकालय, चिकित्सालय आदि बनते चले गये। यद्यपि यह स्मारक उन्होंने अपने बल पर बनाया था; लेकिन उनके आग्रह पर 1968 में यह बेलूड़ मठ में विलीन कर दिया गया और इसका नाम ‘रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम’ हो गया।

यद्यपि वे तन और मन से संन्यासी थे; पर ‘रामकृष्ण मिशन’ उन्हें अलग मानता था। 1968 में मां सारदा के जन्मदिवस पर बेलूड़ मठ में उन्हें विधिवत संन्यास की दीक्षा दी गयी। उन्होंने हिन्दी, अंगे्रजी और बांग्ला के कई ग्रंथों का परस्पर अनुवाद किया। वे टेनिस, वाॅलीबाॅल, शतरंज के खिलाड़ी तथा गीत और संगीत प्रेमी थे। नागपुर के आश्रम में तो प्रायः वे ही आरती आदि गाते थे। गीता और मानस पर उनके अपने प्रवचन भी प्रकाशित हुए हैं।

इसके बाद मिशन की योजना से वे जहां भी रहे, अध्यात्म साधना के साथ जनसेवा में भी लगे रहे। वनवासी कल्याण आश्रम के हर काम में वे पूरा सहयोग देते थे। 27 अगस्त, 1989 को रायपुर आते समय राजनादगांव में उनकी जीप एक पुलिया से टकरा गयी। दरवाजे के पास बैठे स्वामी आत्मानंद जी नीचे गिर पड़े। तभी जीप पीछे पलटी और उनके सीने को कुचल दिया। इससे सेवा पथ के पथिक स्वामी जी का वहीं दुखद प्राणांत हो गया।

  • Related Posts

    बाबा खड़क सिंह : पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें सिखों का “अघोषित बादशाह” और देश का “लौह पुरुष” कहा था

    भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महान सेनानी,…

    Continue reading
    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर सीटू की ओर से शत्-शत् नमन

    आज 2 अक्टूबर के पावन अवसर पर राष्ट्रपिता…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    बाबा खड़क सिंह : पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें सिखों का “अघोषित बादशाह” और देश का “लौह पुरुष” कहा था

    बाबा खड़क सिंह : पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें सिखों का “अघोषित बादशाह” और देश का “लौह पुरुष” कहा था

    वनवासियों के हितचिंतक स्वामी आत्मानंद

    वनवासियों के हितचिंतक स्वामी आत्मानंद

    पत्रकारों के लिए दिल्ली पुलिस की गाइडलाइन, यूजर्स ने लगा दी क्लास

    पत्रकारों के लिए दिल्ली पुलिस की गाइडलाइन, यूजर्स ने लगा दी क्लास

    स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी राहत, अब नहीं जाना होगा जेल, मिली जमानत

    स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी राहत, अब नहीं जाना होगा जेल, मिली जमानत

    रेजीनगर उपचुनाव वोटिंग के बीच गिरफ्तार किए गए हुमायूं कबीर, कॉलर से खींचकर ले गई बंगाल पुलिस

    रेजीनगर उपचुनाव वोटिंग के बीच गिरफ्तार किए गए हुमायूं कबीर, कॉलर से खींचकर ले गई बंगाल पुलिस

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की को लेकर विपक्षी सांसदों का मार्च शुरू, पुलिस  के रोकने पर धरने पर बैठे राहुल गांधी-प्रियंका

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की को लेकर विपक्षी सांसदों का मार्च शुरू, पुलिस  के रोकने पर धरने पर बैठे राहुल गांधी-प्रियंका