5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार (ममता बनर्जी सरकार) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
मुख्य बिंदु:
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि DA कर्मचारियों का वैधानिक और प्रवर्तनीय अधिकार है। कर्मचारियों को 2008 से 2019 तक के बकाया DA के अनुसार भुगतान का हक है, जो All-India Consumer Price Index (AICPI) के आधार पर कैलकुलेट किया जाएगा (ROPA 2009 नियमों के मुताबिक)।
कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को आंशिक रूप से खारिज करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
पहले के अंतरिम आदेश (16 मई 2025) के तहत कम से कम 25% बकाया DA का भुगतान करने का निर्देश था, जिसे अब दोहराया गया है। कोर्ट ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमिटी गठित की है, जो भुगतान की समय-सारिणी तय करेगी। कमिटी को 6 मार्च 2026 तक भुगतान योजना अंतिम रूप देने का निर्देश है, और पहली किस्त 31 मार्च 2026 तक दी जाएगी। यह फैसला लाखों राज्य कर्मचारियों (लगभग 12-20 लाख कर्मचारी और पेंशनर) को फायदा पहुंचाएगा, लेकिन राज्य को भारी वित्तीय बोझ (हजारों करोड़ रुपये) पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि
यह मामला लंबे समय से चल रहा था। राज्य सरकार DA को केंद्र के मुकाबले कम दे रही थी, जिसके खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने केस किया। हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 2025 में अंतरिम राहत के रूप में 25% DA देने का आदेश आया था, लेकिन राज्य ने वित्तीय दिक्कतों का हवाला देकर समय मांगा। आज का फैसला अंतिम रूप से कर्मचारियों के पक्ष में है।








