जंतर-मंतर पर थाली-चम्मच लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक

ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान एक बार फिर छात्रों और युवाओं के गुस्से का केंद्र बन गया है। आज शनिवार (20 जून) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों की भारी भीड़ नीट (NEET) और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधलियों और व्यवस्था की नाकामी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए यहां जुटी है। हालांकि, इस बार के प्रदर्शन की अपनी एक अलग और अनोखी पहचान है—प्रदर्शनकारियों के हाथों में न सिर्फ नारे लिखे पोस्टर हैं, बल्कि रसोई घर की जरूरत ‘थाली और चम्मच’ भी दिख रहे हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

 

 

पोस्टर और थाली-चम्मच के साथ जुटे सीजेपी समर्थक

 

 

सुबह से ही जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थक आ चुके है। मंच तैयार होने से पहले ही प्रदर्शनकारियों ने वहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पोस्टर लगा दिए हैं। लोगों के हाथों में थाली और चम्मच देखकर एक अजीब सी उत्सुकता बनी हुई है, लेकिन पार्टी के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक विरोध है, जिसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा है।

 

 

दिल्ली पुलिस की कड़ी निगरानी

 

 

किसी भी अप्रिय घटना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पूरे कड़े इंतजाम किए हैं। जंतर-मंतर को आज एक सुरक्षा छावनी की तरह तब्दील कर दिया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने सिर्फ जमीनी स्तर पर नजर रखने की परंपरागत व्यवस्था ही नहीं की है, बल्कि तमाम सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर पैनी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस यंत्रों को भी लगाया गया है, ताकि भीड़ को कंट्रोल किया जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद हैं।

 

 

जाने ‘थाली-चम्मच’ की अपील का क्या है मतलब?

 

 

सवाल यह है कि आखिर एक राजनीतिक प्रदर्शन में थाली और चम्मच की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, यह सीधा तौर पर कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील पर एक व्यंग्यात्मक प्रहार है, जब उन्होंने देशवासियों से ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान अपने घरों की बालकनी और खिड़कियों पर आकर थाली और चम्मच बजाने की अपील की थी। तब इसे कोरोना योद्धाओं का हौसला बढ़ाने के लिए एक प्रतीकात्मक कदम बताया गया था।

जब शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से सीधे संपर्क करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को अपने साथ एक थाली और चम्मच लाना अनिवार्य है।

अभिजीत दीपके का मानना है कि जिस तरह से सरकार ने कोविड के दौरान लोगों से बर्तन बजाकर देश की समस्याओं का समाधान ढूंढने का भ्रम पैदा किया था, उसी तरह आज NEET और अन्य परीक्षाओं में भर्ती घोटालों और पेपर लीक की समस्या को लेकर सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। थाली-चम्मच के इस्तेमाल से कॉकरोच जनता पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि अब सिर्फ प्रतीकात्मक जश्न या घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

 

 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

 

 

कॉकरोच जनता पार्टी का यह प्रदर्शन किसी आकस्मिक आंदोलन का हिस्सा नहीं है। पिछले कई महीनों से देश भर में NEET-UG परीक्षा को लेकर गहरा आक्रोश है। पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़े के आरोपों के बाद छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाया है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को अपने आंदोलन का केंद्र बनाया है। जंतर-मंतर पर लगे पोस्टरों में साफ तौर पर लिखा गया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

 

 

अभिजीत दीपके की रणनीति और ‘विजुअल पॉलिटिक्स’

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिजीत दीपके जैसे नए राजनीतिक चेहरों के लिए ‘विजुअल पॉलिटिक्स’ एक मजबूत हथियार बनता जा रहा है। पारंपरिक नारेबाजी से अलग हटकर थाली-चम्मच जैसी चीजों का इस्तेमाल करने से सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होती हैं। यह युवाओं और नेटिज़न्स का ध्यान आकर्षित करता है। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी का यह कदम राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ मीडिया कवरेज हासिल करने का एक बुद्धिमानाना तरीका भी माना जा रहा है।

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