नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैशकांड की जांच कमेटी की रिपोर्ट में उनके दुराचार के पर्याप्त सबूत मिले हैं। तीन जजों की समिति, जिसके अध्यक्ष पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू थे, ने 64 पन्नों की रिपोर्ट में 55 लोगों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक व अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। कमेटी ने पाया कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में, जो उनके और उनके परिवार के नियंत्रण में था, भारी मात्रा में जले हुए नोट मिले। जस्टिस वर्मा इस कैश के स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उनके निजी सहायक राजेन्द्र कार्की और अन्य स्टाफ द्वारा आग की घटना के बाद नोटों को हटाने की कोशिश भी सामने आई।
4 मई 2025 को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंपी, जिन्होंने 8 मई को इसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने का विकल्प दिया गया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। अब संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा है, जिसके लिए लोकसभा में 100 या राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन और दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।








