किस्से इमरजेंसी के : जब राजकुमार जैन ने जेल में चौधरी चरण सिंह को सुना दी थी खरी खरी!

तिहाड़ जेल के जेलर शर्मा जी ने जेल की ड्योढ़ी में उसे पैर रखते देख लिया था। गेट के अंदर उसे आते देख कर कैदियों को जोर-जोर से डांटने और चिल्लाने लगे । किसी को फटकार किसी को कुछ। कैदी सहमे और डरे हुए थे कि आज क्या बात है। शर्मा जी आज अपनी पूरी ड्रेस में थे ।शर्मा जी इतने गुस्से में क्यों चिल्ला रहे हैं कैदी इस बात से हैरान थे। वास्तव में यह उनका तरीका था औरों को भयभीत करने का ।
पुलिस की गाड़ियों की सायरन की आवाजें आ जा रही थी। मीसा बंदियों को लगातार लाया जा रहा था और यह धरपकड़ का सिलसिला कई दिन तक चलता रहा।
राजकुमार जैन और उनके सोशलिस्ट साथी रविन्द्र मनचंदा (गोपी) दोनों को दिल्ली विशवविद्यालय के मौरिस नगर चौक के पास गिरफ्तार करके लाया गया था। यह आपात स्थिति लागू होने के दो तीन दिन बाद की घटना है 27-28जून 1975की।

 

शर्मा जी नमस्कार – राजकुमार जैन ने मुस्कराते हुए ज़ोर से कहा।
जेलर को कुछ अटपटा सा लगा।
खबरदार ! कड़क आवाज में शर्मा जी ने कहा ।
तुम 107 -151में नहीं आए हो जो दो तीन दिन बाद चले जाओगे । मीसा में बंदी बन कर आए हो तुम लोग।

अब जैन साहब को कहां चैन ? बोले- शर्मा जी ऐसा है मीसा के बाद तो कोई फीसा वीसा होता नहीं । हो तो लगा देना ।हमारा क्या बिगड़ना है । यह भी सुन लो शर्मा जी हमारी लड़ाई इंदिरा गांधी से है ।आप बीच में ना आना।बस इतना समझ लो।
जेलर को लगा कि यह तो दूसरे कैदियों के सामने मुझे नीचा दिखा रहा है। मेरा तो रौब कम हो जाएगा।
कहने लगे – ले जाओ इनको ।और 17 नंबर में डाल दो।
राजकुमारजैन आपातस्थिति में जब पकड़े गए तो उनके समाजवादी साथी रविन्द्र मनचंदा गोपी (चंद्रशेखर जी प्रधान मंत्री बने , तो उनके ओ. एस. डी ) उनके साथ थे। कई महीने तक किसी को नहीं पता था कि ये किस जेल में हैं।मेरे एक वकील मित्र रमेश गुप्ता मुझे बस में मिल गए। उन्होंने मुझे यह खबर दी कि यह लोग तिहाड़ जेल में बंद हैं। शायद मैं पहला मित्र था जो उन दिनों जाकर जेल में मुलाकात करने गया।बड़ी कठिन प्रक्रिया के बाद एस डी एम से मुझे मिलने की इजाज़त मिली।मुझे याद है तिहाड़ जेल के दरवाज़े में घुसते ही तलाशी ली गई ,हाथ पर जेल की मोहर लगाई गई।उसके बाद ड्योढ़ी के ऊपर एक बड़ा कमरा था जहां मैजिस्ट्रेट की उपस्थिति में मुलाकात हुई। वहीं पर राजनीतिक बंदियों को मिलाया जाता था।बहुत से लोग अपने अपने संबंधियों से मिलने वहां आए हुए थे। जब जैन साहब मिलने के लिए लाए गए तो उनका उत्साह देखने वाला था पर मुझे देख कर हैरान रह गए कि यह कहां से पकड़ा गया।जब मैंने उन्हें बताया कि मुलाकात के लिए आया हूं तब जाकर उनको राहत हुई।खूब बातें हुईं। जैन साहब उसी उत्साह में थे । चेहरे पर कोई शिकन या खौफ नहीं था ।
वहीं पर दयाल सिंह कॉलेज के एक प्राध्यापक भी मौजूद थे जो मीसा या डी आई आर में पकड़े गए थे। उनसे कोई महिला भी मिलने आई हुई थी। बड़े मायूस और परेशान थे । उन्होंने मुझे कहा हरीश भाई बाहर की क्या खबर है ? कोई हमारे छूटने के आसार नजर आ रहे हैं? सुना है इंदिरा गांधी रिहाई की घोषणा करने वाली हैं ? बाद में जैन साहब ने पूछा कि क्या कह रहा है ? तो मैने बताया रिहाई के बारे में पूछ रहा है। राजकुमार जैन ने कहा छोड़ो इस की बात मत करो । माफ़ी भी मांग चुका है, हमेशा रोता रहता है। पर अच्छा है हम सोशलिस्टों का आदमी नहीं है।
उस व्यक्ति का नाम लेना मै उचित नहीं समझता।

मुझे राजकुमार जैन ने उन दिनों बताया था कि जेलर शर्मा बहुत परेशान रहते थे। सोशलिस्टों के बारे में कहते थे कि यह तो आदतन कानून तोड़ने वाले लोग है।इनका तो धंधा ही आंदोलन करना है। महीने में एक दो बार आंदोलन करते हुए पकड़े जाते है। फिर छूट जाते हैं।
शर्मा जी हरियाणा कैडर के थे और उन दिनों तिहाड़ में हरियाणा का जेल मैनुअल लागू होता था।दिल्ली का अपना कोई मैनुअल उस समय नहीं था।इसलिए तिहाड़ का रख रखाव हरियाणा कैडर के जेल अधिकारी करते थे,ऐसा मुझे पता चला।

17 नंबर वार्ड जेल का वह वार्ड था जिसमें संगीन सज़ा प्राप्त अपराधियों को रखा जाता था। गोपी मनचंदा और राजकुमार जैन को 17 नंबर बैरक में डाल दिया गया । संगीन अपराधियों के बीच एक पुराने मित्र विपिन जग्गी से उनकी मुलाकात वहां हुई जो किसी अपराध के सिलसिले में उम्र क़ैद काट रहा था। कॉलेज जमाने से राजकुमार जैन उसको जानते थे जब वह किरोड़ी मल कालेज में विद्यार्थी थे और विपिन जग्गी भी किरोड़ी मल कालेज का विद्यार्थी था। उसने राज कुमार जैन और गोपी मनचंदा का बड़ा आदर सत्कार किया। उस से पता चला कि पास के एक सैल में चौधरी चरण सिंह को भी रखा गया है। राज कुमार जैन तत्काल उन से मिलने चल दिए।राजकुमार जैन उस सैल के सामने से गुज़रे।
चौधरी चरण सिंह वहां धोती और बनियान पहने बैठे थे।
नमस्कार चौधरी साहब – राजकुमार जैन ने मुस्कराते हुए कहा।
चौधरी साहब ने धीरे से सिर हिलाया । चौधरी साहब ने कोई ज्यादा ध्यान राज कुमार जैन की तरफ नहीं दिया।

चौधरी साहब आज आप को यहां देखकर बड़ी ख़ुशी हो रही है । अब आप को पता चलेगा कि यह जेल है या पिकनिक स्पॉट।
चौधरी साहब ने राजकुमार जैन की तरफ देखा कि यह कौन है जो इतनी धृष्टता कर रहा है।सोचा कोई यूथ कांग्रेस का है जो परेशान करने के लिए ऐसा कह रहा है।उन्होंने हाथ हिला कर कहा आगे जाओ भईया आगे जाओ ।
चौधरी साहब मेरा नाम राजकुमार जैन हैै और मैं सोशलिस्ट पार्टी का कार्यकर्ता हूं ,मैं भी मीसा में आया हूं। यह कहकर राजकुमार जैन आगे बढ़ गए।
यह सुनते ही चौधरी साहब ने आवाज़ लगाई। उन्होंने कहा सुनो इधर आओ।
राजकुमार जैन उनके पास गए । चौधरी साहब ने उसे
अपने पास बिठाया और कहा- बहुत बोलते हो तुम।
तुम्हारी शिकायत राज नारायण से करूंगा। क्या मतलब है तुम्हारा ,तुम क्या कह रहे थे ? यह पिकनिक स्पॉट नहीं है ?
यह बात तो आप ही कहते थे चौधरी साहब – राजकुमार जैन ने कहा। जब आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे आप ही ने उत्तर प्रदेश में सभी विश्वविद्यालयों में स्टूडेंट्स यूनियन भंग कर दी थी।हम लोगों ने इसके खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन किया था तो हमें जेल में डाल दिया गया।तब आपने यह आदेश निकाला कि जेल कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। सभी कैदियों के लिए एक समान व्यवहार और सख्ती होनी चाहिए ।
चौधरी साहब ने राजकुमार जैन की बात सुनकर धीरे से कहा – अरे भईया बहुत बोलते हो तुम।वह आदेश तो मैंने गुंडों के लिए निकाला था ।तुम लोगों के लिए थोड़े ही निकाला था। जैन साहब ने कहा चौधरी साहब इंदिरा गांधी की नजर मेंआज मै और आप दोनों ही गुंडे हैं। इस बात को सुनकर चौधरी साहब पहले तो हंसे और फिर गंभीर हो गए।

उस दिन के बाद राजकुमार जैन ज्यादातर समय चौधरी साहब के साथ बिताने लगे। चौधरी साहब की तबीयत खराब रहती थी। राजकुमार जैन उनकी खूब सेवा करते थे ।इस काम में रविन्द्र मनचंदा ने भी खूब साथ दिया उसने भी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। चौधरी साहब राजकुमार जैन को अपना जेल का बेटा कहते थे। प्यार में अक्सर राजबहादुर कहकर पुकारते थे। राजकुमार जैन भी उनका बहुत आदर करते थे। उनकी सादगी , ईमानदारी और गरीबों के प्रति हमदर्दी से राज कुमार जैन बहुत प्रभावित थे।जैन साहब कहा करते थे कि चौधरी साहब ज़मीनी आदमी हैं और गरीब लोगों की बात करते करते इतने भावुक हो जाते हैं कि रोने भी लगते हैं। राजकुमार जैन ने एक लेख भी चौधरी साहब की ईमानदारी और सादगी पर लिखा जिसे हमारे एक पुराने मित्र राजसिंह मान ने अपनी एक पत्रिका में प्रकाशित भी किया।
चौधरी साहब जब जनता पार्टी की सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री बने तो उद्योगपति बिरला को उन्होंने गिरफ्तार किया। यह कोई साधारण बात नहीं थी। चौधरी साहब ने उन दिनों राजकुमार जैन से कहा कि तुम सोशलिस्ट लोग पूंजीपतियों के खिलाफ बहुत नारे लगाते रहते हो अब तुम लोग तो मेरा साथ दोगे ? राजकुमार जैन उन दिनों दिल्ली महानगर परिषद के चांदनी चौक से सदस्य थे और पार्टी के चीफ़ व्हिप भी थे
आंतरिक मतभेदों और दोहरी सदस्यता के सवाल पर जनता पार्टी के बिखराव के बाद जब लोकदल की सरकार बनी तो चौधरी साहब प्रधानमंत्री बने। मधु जी ( मधु लिमए) और राजकुमार जैन सहित सभी समाजवादी नेता चौधरी चरण सिंह के साथ रहे। चौधरी ब्रह्मप्रकाश दिल्ली पार्टी के अध्यक्ष बने। दिल्ली लोकदल की कार्यकारिणी में मैं भी सदस्य था और जैन साहब भी उसके पदाधिकारी थे। लोकदल में चौधरी देवीलाल और चौधरी चरण सिंह में आपसी मतभेद के कारण फिर बिखराव आया तो लोकदल(कर्पूरी ठाकुर) बना और सारे समाजवादी लोकदल (कर्पूरी ठाकुर) में आ गए । चौधरी चरण सिंह चाहते थे कि राजकुमार जैन उनके साथ रहें। वैसे भी राजकुमार जैन उत्तर प्रदेश के छपरौली गांव के रहने वाले हैं और उनका पुश्तैनी घर वहीं पर हैं। चौधरी साहब ने राजकुमार जैन को कहा तुम तो मेरे साथ रहो। भाजपा से हमारा गठबंधन होने जा रहा है ।
राजकुमार जैन ने चौधरी साहब के सामने हाथ जोड़ कर कहा चौधरी साहब आप मेरे नेता हैं मैं आपका सम्मान करता हूं पर मैं अपने समाजवादी साथियों को छोड़ नहीं सकता।
इसे कहते हैं प्रतिबद्धता और ईमानदारी। व्यक्तिगत रिश्तों का सम्मान करते हुए और दूसरे के प्रति आदर भाव रखते हुए भी बड़ी से बड़ी चीज या पद को ठुकरा देना कुछ ही लोगों की फितरत होती है और इस फितरत का दूसरा नाम है राजकुमार जैन ।
( जेल के किस्से अभी बाकी है। अगली किश्त में ।
हरीश खन्ना)

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