शिक्षा के अधिकार, सरकारी शिक्षा व्यवस्था की मजबूती और निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने का आह्वान
नई दिल्ली। भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’ के नारे के साथ समाजवादी साथियों ने प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की ओर से किया गया। प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों से समाजवादी कार्यकर्ताओं, ट्रेड यूनियन नेताओं, शिक्षकों, छात्रों और युवाओं ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अगले दस वर्षों तक आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला की एक कड़ी था। कार्यक्रम में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और उसमें समाजवादियों की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए मौजूदा समय में शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए व्यापक आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया गया।

राजघाट से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर उन्हें नमन करके हुई। यहां यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव और भारतीय सोशलिस्ट मंच के सदस्यों ने बापू की समाधि पर शिक्षा में सुधार और शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने की शपथ ली। इस दौरान यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की सदस्य वंदना पांडे, राजेश कुमार और आकाश दीप के साथ वरिष्ठ समाजवादी आदित्य कुमार, देवेंद्र सिंह अवाना और देवेंद्र गुर्जर मौजूद रहे।
राजघाट के बाद सभी साथी आचार्य नरेंद्र देव वाटिका पहुंचे। यहां समाजवादी आंदोलन के पुरोधा आचार्य नरेंद्र देव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान ‘आचार्य नरेंद्र देव अमर रहें’ और ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’ के नारे लगाए गए।

देशभर से पहुंचे समाजवादी साथी
मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर हुई। प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों से समाजवादी साथियों ने भाग लिया। कश्मीर से शाहिद सलीम, बिहार से एडवोकेट बिजेंद्र यादव, महाराष्ट्र से डॉ. सुरेश गवई सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के कई छात्र-छात्राओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा साथी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन की शुरुआत में यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की टीम द्वारा तैयार ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’पर्चे का पाठ किया गया। पर्चे का हिंदी पाठ डॉ. ज्योति चौहान और अंग्रेजी पाठ राजेश कुमार ने किया।

भारत छोड़ो आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेंद्र सिंह अवाना ने भारत छोड़ो आंदोलन की विरासत और उसमें समाजवादियों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी देश में अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने के लिए समाजवादी आंदोलन की विरासत से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

वरिष्ठ समाजवादी साथी चरण सिंह राजपूत ने कहा कि अगर लोगों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार की लड़ाई को और व्यापक बनाने की जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर से आए समाजवादी साथी शाहिद सलीम ने कहा कि अधिकारों की लड़ाई कैसे लड़ी जाती है और उसका असर क्या होता है, यह कश्मीर के लोग अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा कि देश में सभी बच्चों को बुनियादी शिक्षा मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण रूप से मिलनी चाहिए।
कॉमरेड नरेंद्र ने कहा कि शिक्षा के निजीकरण के खतरे को पहचानना होगा और उसका मुकम्मल प्रतिकार करना होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की पहल महत्वपूर्ण है।
बिहार से आए समाजवादी साथी और अधिवक्ता बिजेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा के अधिकार को बचाने के लिए इस तरह के विरोध-प्रदर्शनों के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने शिक्षा के सवाल पर व्यापक आंदोलन की जरूरत बताई।
महाराष्ट्र से आए डॉ. सुरेश गवई ने अपने वक्तव्य में कहा कि मौजूदा सरकार शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और इसे हर हाल में रोकना होगा।
निजीकरण और बाजारीकरण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का आह्वान
यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की सदस्य वंदना पांडे ने भारत छोड़ो आंदोलन की विरासत पर प्रकाश डालते हुए मौजूदा दौर में समाजवादी रास्ते से अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ समाजवादी विचारक डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि शिक्षा की मौजूदा स्थिति के लिए जिस उदारीकरण और बाजारीकरण की नीतियों की भूमिका रही है, उस पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि अब असली खतरे को पहचानने और उसके खिलाफ संघर्ष करने का समय आ गया है। उनके मुताबिक केवल सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई से यह जंग नहीं जीती जा सकती, बल्कि निजीकरण के खिलाफ भी उसी मजबूती से संघर्ष करने पर ही सफलता हासिल होगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और गुजरात के वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता जयंती भाई पांचाल ने कहा कि देशभर में इस तरह के आंदोलनों को खड़ा करने की जरूरत है, ताकि शिक्षा में सुधार और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई निर्णायक रूप से लड़ी जा सके।
दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े अमर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा का हर हाल में राष्ट्रीयकरण होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निजी और मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने की जरूरत बताई।

भगवान सिंह ने कहा कि समाजवादियों की विरासत संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद होने से हर हाल में रोकना होगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक शशि शेखर ने कहा कि देश में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन बाजारीकरण की प्रक्रिया नहीं बदलती। उन्होंने बढ़ते बाजारवाद के खिलाफ व्यापक संघर्ष की जरूरत बताई।
प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे भारतीय सोशलिस्ट मंच के अध्यक्ष आदित्य कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। उन्होंने कहा कि स्थिति को बदलने के लिए सरकारों को शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर करना होगा।
कार्यक्रम का संचालन यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव के सदस्य डॉ. हिरण्य हिमकर ने किया। कार्यक्रम में युवा साथी ज्ञान, नीरज, आकाशदीप, ज्योति, रिषव, पवन सहित बड़ी संख्या में युवाओं और समाजवादी आंदोलन से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी राजनीति की पुरानी विरासत और नारों की भी गूंज सुनाई दी। महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा और संघर्ष की विरासत को याद करते हुए लगाए गए नारों से जंतर-मंतर का माहौल समाजवादी नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने, सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण को रोकने तथा शिक्षा को सरकार की प्राथमिकता बनाने की मांग की। साथ ही शिक्षा के सवाल पर देशभर में व्यापक और निर्णायक आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया गया।








