हिसार। हिंदी लघुकथा के क्षेत्र में साहित्यकार दंपती डॉ. प्रियंका सौरभ और डॉ. सत्यवान सौरभ के लिए गौरव का विषय है कि उनकी लघुकथाओं को देश-विदेश के 69 लघुकथाकारों की चयनित रचनाओं के संकलन ‘मेरी श्रेष्ठ लघुकथा–2025’ में स्थान मिला है। संकलन का संपादन चंद्रेश कुमार छतलानी ने किया है।
इस संकलन में डॉ. प्रियंका सौरभ की लघुकथा ‘चार बजे की माँ’ तथा डॉ. सत्यवान सौरभ की लघुकथा ‘नई परंपरा’ को शामिल किया गया है। दोनों रचनाओं का चयन लघुकथा के विधागत अनुशासन, भाषा, शिल्प और प्रस्तुति को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
‘लघुकथा दुनिया’ की ओर से रचनाकारों को भेजी गई जानकारी के अनुसार ‘मेरी श्रेष्ठ लघुकथा–2025’ का ई-बुक संस्करण प्रकाशित हो चुका है और यह पाठकों एवं रचनाकारों के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। संकलन के संपादन के दौरान प्राप्त रचनाओं में आवश्यकतानुसार भाषा, शिल्प और प्रस्तुति संबंधी संपादन किया गया। विधागत अनुशासन में उपयुक्त न आने वाली कुछ रचनाओं को चयन से बाहर भी किया गया।
डॉ. प्रियंका सौरभ की ‘चार बजे की माँ’ और डॉ. सत्यवान सौरभ की ‘नई परंपरा’ का चयन उनकी साहित्यिक सक्रियता और लघुकथा लेखन में निरंतर योगदान का महत्वपूर्ण प्रमाण है। दोनों रचनाकार कविता, दोहा, लघुकथा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेखन में सक्रिय हैं।
संकलन में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से जुड़े लघुकथाकारों की रचनाओं को भी शामिल किया गया है। आयोजकों का मानना है कि यह साझा संकलन पाठकों के साथ-साथ हिंदी लघुकथा के अध्ययन और शोध से जुड़े शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।
इस साहित्यिक उपलब्धि पर साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने डॉ. प्रियंका सौरभ और डॉ. सत्यवान सौरभ को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। दोनों रचनाकारों ने अपनी लघुकथाओं को संकलन में स्थान देने के लिए ‘लघुकथा दुनिया’ की टीम और संपादक चंद्रेश कुमार छतलानी के प्रति आभार व्यक्त किया।







