धर्म परिवर्तन हेतु लालच का आरोप लगाने के सात माह पहले ही पिता ने धर्म परिवर्तन किए जाने की जानकारी दी थी

22 जुलाई को अखण्ड प्रताप सिंह पुत्र उमेश प्रताप सिंह की शिकायत पर शब्बीर अहमद पुत्र अबुल हसन, जो अल फारूक इण्टर कालेज के प्रबंधक हैं, के खिलाफ धर्म परिवर्तन कराने हेतु रु. 20 लाख का लालच देने के आरोप में जिला सिद्धार्थनगर के इटवा थाने में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 506 व उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 व 5(1) के तहत प्रथम सूचना रिर्पोट दर्ज हो जाती है। अपराध की घटना की तारीख 10 दिसम्बर, 2020 दिखाई गई है।
वहीं एक अन्य मामले में 18 मई, 2020 को क्षेत्राधिकारी, इटवा, श्रीयश त्रिपाठी अपनी आख्या में लिखते हैं कि उमेश प्रताप सिंह के द्वारा बताया गया कि ’अखण्ड प्रताप सिंह मेरा इकलौता पुत्र है जो बदचलन एवं अपराधी किस्म का है। यह करीब 2 साल से कहीं बाहर रहता है इसके द्वारा मुझे फोन पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है तथा जमीन बेचकर पैसा देने का दबाव बनाया जा रहा है। पूर्व में भी इसने मुझे डरा धमका कर तीन बीघा जमीन बेचवा दिया तथा पैसा शराबखोरी व ऐयाशी में खत्म कर दिया। इसके द्वारा इस्लाम धर्म अपना लिया गया है तथा अपना नाम बदल कर इमरान रख लिया है तथा पूर्व में ही जबरदस्ती घर में घुसकर इस्लाम धर्म से सम्बंधित पुस्तक, पोस्टर, बैनर आदि लगा दिया है। मैं एक हिन्दू धर्म को मानने वाला व्यक्ति हूं। इसलिए अपने पुत्र अखण्ड प्रताप सिंह के कृत्यों से आहत हूं। इनका घर में रहना मेरे लिए जान माल का खतरा है। मैं अपने चल अचल सम्पत्ति से बेदखली हेतु शपथ पत्र के माध्यम से दैनिक जागरण समाचार पत्र में दिनांक 15 मई 2020 को गजट कराया हूं।…’
उपर्युक्त बयान से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा उसे धर्म परिवर्तन के लिए लालच देने से 7 महीने पहले ही उसके पिता अरोप लगा रहे हैं कि उसने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम इमरान रख लिया था।
2016 व 2024 में दो बार अखण्ड प्रताप सिंह अल फारूक कालेज से सम्बंधित कई सूचनाएं सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांग चुके हैं। उन्हें प्रबंधक शब्बीर अहमद द्वारा मांगी गई सारी सूचनाएं उपलब्ध कराई गईं।
ऐसा प्रतीत होता हैं कि अखण्ड प्रताप सिंह द्वारा शब्बीर अहमद को दबाव में लेने के सारे प्रयास असफल होने पर वर्तमान में धर्म परिवर्तन को लेकर जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के प्रकरण के चर्चा में आने का फायदा उठा कर वह शब्बीर अहमद को फंसाना चाह रहा है।
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक से मांग करती है कि शिकायतकर्ता के चरित्र का उन्हीं के पिता द्वारा वर्णन को ध्यान में रख कर व तथ्यों में विसंगति के आलोक में तटस्थ जांच कर यदि शब्बीर अहमद निर्दोष पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिर्पोट खारिज की जाए तथा उन्हें जेल से रिहा किया जाए। यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा यदि आपराधिक न्याय प्रकिया वर्तमान के दौर में चल रही राजनीति की भेंट चढ़ जाएगी।
संदीप पाण्डेय, राष्ट्रीय महासचिव, सोशलिस्ट पार्टी (india)
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