सेबी की क्लीन चिट: अडानी समूह को मिली बड़ी राहत, गौतम अडानी ने निवेशकों को संबोधित कर बड़े विकास का आह्वान किया

नई दिल्ली ।  अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंदनबर्ग रिसर्च के आरोपों से जूझते हुए करीब ढाई साल बाद सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी है। सेबी की जांच में स्टॉक मैनिपुलेशन, इनसाइडर ट्रेडिंग और संबंधित पक्षों के माध्यम से फंड ट्रांसफर के आरोपों को साबित नहीं पाया गया। इस फैसले के बाद अडानी समूह के शेयरों में जोरदार उछाल आया और समूह की कुल मार्केट वैल्यू में 46,000 करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ।

 

सेबी का फैसला: आरोपों का खंडन

 

सेबी ने 18 सितंबर 2025 को दो अलग-अलग आदेश जारी किए, जिसमें गौतम अडानी, उनके भाई राजेश अडानी और प्रमुख कंपनियों—अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड तथा अडानी पावर—को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। जांच में पाया गया कि:

कथित ट्रांजेक्शन वास्तविक व्यावसायिक सौदे थे, न कि धोखाधड़ी वाले।
कोई फंड डायवर्जन या लिस्टिंग नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।
हिंदनबर्ग की रिपोर्ट (जनवरी 2023) में लगाए गए शेल कंपनियों के इस्तेमाल के दावे आधारहीन साबित हुए।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्रा वर्शने ने आदेश में कहा, “ट्रांजेक्शन संबंधित पक्षों के दायरे में नहीं आते और सेबी एक्ट या धोखाधड़ी रोकथाम नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।” यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की प्रारंभिक क्लीन चिट के बाद आया, जो पहले ही कोई गड़बड़ी न पाने की बात कही थी।
गौतम अडानी का नया तेवर: संकट को ‘अग्निपरीक्षा’ बताते हुए विकास पर जोर
सेबी के फैसले के ठीक छह दिन बाद, 24 सितंबर को अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने शेयरधारकों को एक भावुक पत्र लिखा। उन्होंने हिंदनबर्ग रिपोर्ट को “भारतीय उद्यमों की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ सीधी चुनौती” करार दिया। पत्र में अडानी ने कहा:

“यह केवल हमारी आलोचना नहीं थी, बल्कि भारतीय उद्यमिता की हिम्मत पर हमला था। सेबी का यह स्पष्ट और निर्विवाद फैसला न केवल हमारी पारदर्शिता और शासन की पुष्टि करता है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति की जीत है जिसने हमारे साथ विश्वास बनाए रखा।”

अडानी ने कर्मचारियों और शेयरधारकों को संबोधित करते हुए संकट को “अग्निपरीक्षा” बताया, जो समूह को और मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में समूह ने 57% ईबीआईटीडीए वृद्धि हासिल की, बंदरगाहों का विस्तार किया, हवाई अड्डों को आधुनिक बनाया और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी। अब समूह की नई प्राथमिकताएं हैं:

नवाचार पर तेजी: ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना।
पारदर्शिता मजबूत करना: गवर्नेंस को और सख्त बनाना।
बड़े विकास का आह्वान: अगले चरण में 100 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर फोकस, जो भारत की विकास यात्रा को गति देंगे।

अडानी ने पत्र के अंत में कहा, “सत्य हमेशा जीतता है। सत्यमेव जयते।” उन्होंने हिंदनबर्ग जैसे “झूठी कहानियां फैलाने वालों” से देश से माफी मांगने की अपील भी की।
बाजार की प्रतिक्रिया: शेयरों में तेजी, ब्रोकरेज रिपोर्ट्स में बुलिश आउटलुक
सेबी के फैसले के बाद अडानी समूह के शेयरों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया:

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कंपनी18-19 सितंबर का उछाल (%)वर्तमान मार्केट कैप (करोड़ रुपये में)अडानी एंटरप्राइजेज10%+3,50,000+अडानी पोर्ट्स9%+2,80,000+अडानी पावर8%+2,20,000+अडानी ग्रीन एनर्जी7%+1,90,000+
ब्रोकरेज फर्म्स ने भी सकारात्मक रुख अपनाया। ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज पर “खरीदें” की सिफारिशें मार्च 2023 के 1 से बढ़कर 3 हो गईं। जेफरीज और क्रॉसब्रिज कैपिटल जैसी फर्मों ने री-रेटिंग की संभावना जताई, कहा कि यह फैसला न केवल समूह के लिए बल्कि भारत के विकास मॉडल के लिए अच्छा है।
सोशल मीडिया पर बहस: समर्थन और आलोचना
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #AdaniCleanChit ट्रेंड कर रहा है। समर्थक अडानी को “भारत के बिल्डर” बता रहे हैं, जबकि आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या जांच पूरी तरह निष्पक्ष थी। एक यूजर ने लिखा, “अडानी ने दिखा दिया कि सच्ची जीत शांति और श्रद्धा से मनाई जाती है।” वहीं, विपक्षी दलों ने आगे जांच की मांग की है।

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