बिहार में राहुल गांधी के लिए ‘आंख-कान’ की खोज शुरू

 चर्चा में एक नाम पर तो लालू का ‘दू मुक्का’ मारने का करेगा मन

 पटना। बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा इसको लेकर राज्य में चर्चा काफी गर्म है। क्या इस बार कोई अल्पसंख्यक बनेगा या फिर कोई सवर्ण? दलित बनेंगे या फिर कोई पिछड़ा। इन तमाम सवालों के साथ कांग्रेस की अंदुरूनी राजनीति करवट बदल रही है। लेकिन इन तमाम सवालों के साथ एक बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दिमाग में क्या चल रहा है? ऐसा इसलिए कि अभी की राजनीति का तकाजा यह हो गया है कि कांग्रेस बिहार में लालू प्रसाद के इशारों के बगैर कुछ करने की स्थिति में नहीं है।
फिलहाल कांग्रेस के भीतर अल्पसंख्यक से दो कद्दावर नेता इस रेस में है। इनमें सबसे पहला नाम कटिहार के सांसद तारिक अनवर का है। ये पहले भी प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेवारी संभाल चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह का कच्चा चिट्ठा खोलने में तारिक अनवर की विशेष दिलचस्पी दिखाई।
अल्पसंख्यक नेताओं में दूसरा नाम शकील अहमद का चल रहा है। ये कदवां विधान सभा क्षेत्र से विधायक हैं और विधान सभा में कांग्रेस दल के नेता भी। इनकी लगभग दलों के नेताओं में इनकी काबिलियत का सम्मान है। और सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के भीतर हमेशा विवादों से ये परे रहे हैं। ये कभी भी किसी कंट्रोवर्सी में नहीं पड़े।
कांग्रेस के अंदरखाने में इस बात की चर्चा है कि इस बार कांग्रेस आधी आबादी वाला कार्ड खेल सकती है। इस फलसफे पर दो नाम की चर्चा है। पहला नाम प्रतिमा दास का है। प्रतिमा दास राजा पाकड़ से कांग्रेस की विधायक हैं। इनको अध्यक्ष बना कर कांग्रेस आलाकमान महिला और दलित कार्ड खेल कर आगामी विधान सभा चुनाव में उतरने का दांव खेल सकती है।
महिला में दूसरा नाम रंजिता रंजन का है। रंजीत रंजन राज्य सभा सदस्य हैं। और अपने दम पर पूर्णिया लोकसभा का चुनाव जीत चुके पप्पू यादव की पत्नी भी हैं। इनके सहारे पिछड़ा और आधी आबादी का कार्ड कांग्रेस खेल सकती है।
लगातार सवर्ण से अध्यक्ष बनने के कारण इस बार कम उम्मीद है कि प्रदेश अध्यक्ष किसी सवर्ण को बनाया जाए। इसके पहले रामजतन सिन्हा, मदन मोहन झा, अनिल शर्मा और अखिलेश प्रसाद सिंह लगातार सवर्ण अध्यक्ष ही रहे हैं। इसलिए इस बार सवर्ण से अध्यक्ष बनाने की उम्मीद कम है।
इन सब किंतु-परंतु के बीच यक्ष प्रश्न यह है कि राजद सुप्रीमो क्या चाहते हैं? राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि लालू यादव जब कभी भी मुस्लिम या पिछड़ी जाति के नेताओं का नाम अध्यक्ष के रूप में उछालते देखते हैं तो उनकी तरफ से ना हो जाती है। ऐसे में कांग्रेस का अगला अध्यक्ष जो बने उसे लालू प्रसाद की भी पसंद होनी चाहिए।

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