चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बंटा हुआ फैसला आया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने चीफ जस्टिस से संवैधानिक मुद्दों पर फैसला करने के लिए 5 न्यायाधीशों की स्थायी पीठ गठित करने की संभावना तलाशने का अनुरोध किया। जस्टिस दत्ता ने कहा कि मैं मामले को 5 जजों की बेंच को भेजने की मांग खारिज करता हूं। बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मामले को 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपने का अनुरोध किया था। जस्टिस दत्ता ने कहा कि मैं खासतौर पर उस दलील का जवाब देना चाहता हूं जो जजों का चयन करने वाली कॉलिजियम व्यवस्था को लेकर दी गई। यह भ्रम फैलाया जाता है कि जज ही जज की नियुक्ति कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में विस्तृत चर्चा होती है।
जस्टिस दत्ता ने कहा, ”केंद्र और राज्य सरकार से बात की जाती है, इंटेलिजेंस रिपोर्ट ली जाती है. 1-2 नियुक्ति पर विवाद के चलते पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना गलत है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि हमारे सामने दलील दी गई कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता के लिए चुनाव आयुक्तों का निष्पक्ष चयन ज़रूरी है. प्रधानमंत्री के साथ उनकी तरफ से नामित प्रतिनिधि के भी चयन समिति में होने से चयन प्रक्रिया सरकार की तरफ झुकी होगी. 3 सदस्यीय कमिटी में नेता विपक्ष की भूमिका दिखावटी बन कर रह जाएगी. मुझे इस दलील में वजन लगता है।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने क्या कहा?
इसके बाद जस्टिस शर्मा ने अपना आदेश पढ़ना शुरू किया. उन्होंने कहा कि जस्टिस दत्ता के प्रति पूरे सम्मान के साथ मैं कहना चाहता हूँ कि मैं उनके निर्णय से सहमत नहीं हूं। जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब पिछला फैसला आया तो वह एक वैक्यूम को भरने के लिए था. चयन को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी. तब कोर्ट ने प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस की कमेटी की बात कही। अब स्थिति अलग है. संसद कानून बना चुकी है. मेरा निर्णय है कि मामला चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए और वह 5 जजों की बेंच बनाएं।
3 जजों की बेंच के पास भेजा जाए- जस्टिस दत्ता
जस्टिस दत्ता ने कहा कि भले ही हमारा निष्कर्ष अलग हो, लेकिन मेरा मानना है कि अब इस मामले को 3 जजों की बेंच के पास भेजा जाए। बेहतर होगा कि चीफ जस्टिस के पास मामला रखा जाए और वह 5 जजों की बेंच का गठन कर दें। जस्टिस दत्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की चिंता थी कि संविधान पीठ को भेजे गए मामले वर्षों तक सुने नहीं जाते. हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में जल्द सुनवाई होगी।








