गैर जिम्मेदाराना रवैया लगा राम मंदिर के नव नियुक्त सीईओ का पत्रकारों पर भड़कना
चरण सिंह
वाह भाई वाह। राम मंदिर के नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा की प्राथमिकता चंदा चोरी रोकने के है या फिर पत्रकारों को रोकने की। भाई पत्रकारों का काम ही सवाल करने का है। आपको पता नहीं था कि यह कितनी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है। पत्रकार तो सवाल पूछेंगे ही। आपका तो काम यही है कि हर सवाल का जवाब देते हुए अपने को साबित करें। राम मंदिर में चल रही चंदा चोरी को रोकें।
जितेंन्द्र मिश्रा को बोलना यह चाहिए था कि उन्हें कुछ दिनों का मौका दिया जाए वह सब कुछ ठीक कर देंगे। राम मंदिर में चल रहे गलत काम को उजागर कर एक साफ सुथरी व्यवस्था कायम करेंगे पर वह तो पत्रकारों पर ही भड़क गए। कह रहे हैं कि वह सबको पहचान रहे हैं। अंदर घुसने नहीं देंगे। मतलब राम मंदिर में चल रही चंदा चोरी उजागर नहीं होनी चाहिए थी। राम के दरबार में जाने से भला कौन रोक सकता है ? सिंदूर ऑपरेशन में दुश्मन सामने था और चंदा चोर अदृश्य। जिन लोगों ने राम के घर से चोरी की है वे कितने गिरे हुए हैं। आपको उनको ठीक करना है। कुछ पत्रकार ही तो सवाल कर रहे हैं। अधिकतर तो सरकार के यहां पानी भर रहे हैं। इसलिए पत्रकारों से डरने की ज्यादा जरूरत नहीं है। सचेत रहने की जरूरत उन लोगों से है जो पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के करीबी हैं। पता चला ये लोग आपको भी बदनाम करा दें।
मिश्रा जी यह युद्ध का मैदान नहीं है। सब कुछ सामने होता है। यहां पर अदृश्य चोर हैं। वह भी बड़े बड़े मगरमच्छों का संरक्षण प्राप्त। आपको को पत्रकारों को साथ रखना चाहिए। उनसे बोलना चाहिए कि राम मंदिर में चल रही अनियमितताओं को उजागर करने में उनका साथ दें और राम मंदिर में एक पारदर्शी और पवित्र व्यवस्था कायम कराएं। तो फिर बीजेपी नेताओं और राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ में क्या अंतर रह गया। बीजेपी नेता भी सिस्टम से लड़ रहे पत्रकारों से खिन्न रहते हैं और राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ भी नाराज हो गए और अनाप शनाप बोलने लगे।
दरअसल राम मंदिर ट्रस्ट के पहले नवनियुक्त सीईओ (रिटायर्ड एयर मार्शल) जितेंद्र मिश्रा ने अयोध्या पहुंचने पर मीडियाकर्मियों से कहा, “देखिये मैं आप सबको पहचान रहा हूँ, दोबारा आने नहीं दूँगा।







