Rajiv Gandhi Assassination : पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारे को आर्टिकल 142 के तहत बेल

Rajiv Gandhi Assassination

Rajiv Gandhi Assassination : सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को अपने फैसले में 31 साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी के हत्यारे एजी पेरारिवलन को रिहा  कर दिया है, ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल द्वारा फैसला लेने मे बेवजह देरी करने पर किया गया। आरोपी एजी पेरारिवलन पर पूर्व प्रधानमंत्री के हत्या के लिए उपयोग में आए बम को बनाने में समान उपलब्ध कराने के लिए दोषी पाया गया था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या (Rajiv Gandhi Assassination) 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती हमला कर कर दी गई थी। इस हमले का मास्टरमाइंड प्रभाकरन ने हत्या की साजिश की कमान शिवरासन को दी थी। प्रभाकरन ने शिवरासन की चचेरी बहनों धनु और शुभा को उसके साथ भारत भेज दिया था। इस आत्मघाती हमले में बम में 9 एमएम की बैटरी का प्रयोग किया गया जिसको पेरारिवलन ने उपलब्ध कराया था।

जानिए क्या हैं राजद्रोह का कानून

28 जनवरी, 1998 की तारीख में पेरारिवलन टाडा अदालत ने फांसी की सजा सुनाई गई थी।

18 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा मिलने के बाद भी 11 साल की देरी हो जाने पर पेरारिवलन की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

क्या है आर्टिकल 142 जिसके चलते राजीव गांधी के हत्यारे को रिहा दिला दी –

आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट को एक विशेष अधिकार देता है जिससे तहत वे किसी भी मामले में सम्पूर्ण न्याय के लिए फैसला दे सकती है। तो चलिए इस आर्टिकल को समझते है। आर्टिकल 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को 2 विशेष अधिकार दिये गए हैं।

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  • सुप्रीम कोर्ट भारत की क्षेत्रीय सीमा में किसी भी मामले के लिए न्याय के लिए किसी भी प्रकार का फैसला सुना सकता है इसके साथ ही वो इस फैसले को भारत की क्षेत्रीय सीमा के अन्दर लागू कराने का अधिकार देता हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट किसी भी इंसान को कोर्ट में हाजिर करवा सकते हैं किसी से भी उसके डाक्यूमेन्ट को मंगवा सकता है और इसके अपनी अवमानना के लिए सजा सुना सकते हैं।
  • 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन को रिहा (Perarivalan Bail) कर दिया।

दिसम्बर 2015 में पेरारिवलन फिर से तमिलनाडु के गवर्नर के समक्ष अपनी दया याचिका फिर रखते है ताकि आजीवन कारावास खत्म किया जा सके। इसके बाद तमिलनाडु कैबिनेट ने 9 सितंबर 2018 को ही पेरारिवलन को रिहा (Perarivalan Bail) करने की सिफारिश करते हुए राज्यपाल से अनुरोध किया था कि वह अनुच्छेद 161 के तहत इसे मंजूरी दे दें। लेकिन राज्यपाल ने बताया कि उनके पास ये विशेष अधिकार नहीं है और ढाई साल बाद इस मामले को राष्ट्रपति को सौंप दिया।

कौन है पेरारिवलन ? – 

पेरारिवलन की गिरफ्तारी 11 जून 1991 को हुई थी । उस समय पेरारिवलन की उम्र 19 साल थी। पेरारिवलन ने 12 वीं की परीक्षा को जेल में बैठ कर उत्तीर्ण की। उसने तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में डिप्लोमा का कोर्स किया था। जिसमें उसे गोल्ड मेडल मिला था। उसने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से बीसीए किया और फिर कंप्यूटर में ही मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

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इस देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहां कि राज्यपाल द्वारा इस मामले को लटका कर रखना सही नहीं और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य तथा केन्द्र के अधिकार क्लियर करते हुए इस मामले में आर्टिकल 142 का प्रयोग किया। पेरारिवलन की रिहाई (A G Perarivalan Released) का मामला सामने आने के बाद अब लोग इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इतने सालों के बाद भी प्रधानमंत्री जैसे बड़ी हस्ती के हत्यारों को भी सजा नही मिल सकीं।

पेरारिवलन की रिहाई के लिए तमिलनाडु की राज्य सरकार और जय ललिता की सरकार ने सजा को रिहाई में बदलने के लिए कई प्रयास किये हैं जिससे केन्द्र और राज्य के बीच राजीव गांधी के हत्या (Rajiv Gandhi Assassination) के आरोपी पेरारिवलन के रिहाई (A G Perarivalan Released) को लेकर संघर्ष चलता रहा। देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

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