चरण सिंह
कांग्रेस ने दलित वोटबैंक को फिर से हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। जिस तरह से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अच्छा खासा फायदा हुआ। उसी तरह से बिहार में दलित नेता राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। जब बिहार में कांग्रेस की छवि लालू प्रसाद के रहमोकरम की मानी जाती है तो फिर राहुल गांधी ने बिहार का प्रभारी तेज तर्रार नेता कृष्ण अल्लावरु को बनाया गया है। जेएनयू के अध्यक्ष रहे एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया को पलायन रोको नौकरी दो यात्रा पर भेज दिया है। अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाकर दलित नेता राजेश कुमार को बनाया गया है। अखिलेश प्रसाद लालू प्रसाद का आदमी बताये जाते हैं। मतलब बिहार में जो कांग्रेस पर लालू प्रसाद का दबाव बताया जाता था राहुल गांधी ने उस दबाव को ही हटा दिया।
देखने की बात यह है कि राजेश कुमार रविदास समाज से आते हैं। रविदास समाज बिहार में साढ़े पांच फीसदी माना जाता है। मतलब कांग्रेस ने बिहार में रविदास समाज पर डोरे डाले हैं। वैसे भी देश के मुसलमानों का रुझान आज की तारीख में राहुल गांधी की ओर देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में यह देखा गया। यदि बिहार में कांग्रेस मुस्लिम और दलित को साध ले गई तो उसका स्ट्राइक रेट जबरदस्त हो जाएगा। यही वजह है कि कांग्रेस के नेता कहीं से भी आरजेडी के दबाव में नहीं आ रहे हैं।
कन्हैया कुमार ने तो यहां तक बोल दिया है कि जिस पार्टी की सीटें अधिक आएंगी उसका ही मुख्यमंत्री बनेगी। तो क्या कांग्रेस बिहार में आधी सीटें मांगने जा रही है ? प्रदेश प्रभारी कृष्ण अल्लावरु कह रहे हैं कि कांग्रेस अकेला चलेगी। मतलब कांग्रेस अपने दम पर भी चुनाव लड़ सकती है। दरअसल बिहार में कांग्रेस की स्थिति बेचारगी वाली रही है। लालू प्रसाद ही कांग्रेस के टिकट निर्धारित करते रहे हैं। यही वजह रही कि कितने नेता कांग्रेस को छोड़कर चले गए।
राहुल गांधी लालू प्रसाद की दो बातों से खफा बताये जा रहे हैं।
एक तो उन्होंने ममता बनर्जी के इंडिया गठबंधन को लीड करने की इच्छा के बाद लालू प्रसाद ने ममता बनर्जी को लीड करने का मौका देने की बात कही थी, जबकि इंडिया गठबंधन को राहुल गांधी लीड कर रहे थे। दूसरे तेजस्वी यादव ने कह दिया था कि बीजेपी को रोकने के लिए इंडिया गठबंधन तो लोकसभा चुनाव तक था। साथ ही तेजस्वी यादव कांग्रेस की सीटें 2020 में कम आने को लेकर भी कांग्रेस पर हमलावर रहे हैं। राहुल गांधी इन चुनाव में ऐसा माहौल बनाने में लगे हैं कि यदि लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ज्यादा भाव दिखाते हैं तो वह अपने दम पर भी बिहार में चुनाव लड़ सकते हैं। दरअसल कांग्रेस ने दलित मुद्दे को पूरी तरह से पकड़ लिया है। बाबू जगजीवन राम के समय बिहार में दलितों का वोट कांग्रेस को एकतरफा मिलता था, क्योंकि जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार अधिक समय दिल्ली में रही हैं। इसलिए बिहार में उनका ज्यादा टच नहीं रहा।








