Rabindranath Tagore Birthday : कैसे थे ? एक दिन के लिए कॉलेज जाने वाले टैगोर

Rabindranath Tagore Birthday : टैगोर की 161 वीं जयंती

Rabindranath Tagore Birthday : बंगाल का नाम सुनते ही आपके जेहन में सबसे पहले क्या आता है? अच्छा गाने वाले सिंगर, सफेद और लाल रंग की साड़ी पहने महिलाएं ये सारी स्मृतियां आपके मन में सबसे पहले किसने उकेरी ? जी रवीन्द्रनाथ टैगोर उनकी कहानियों के किरदारों ने Bollywood से पहले बंगाल की एक अलग ही छाप बना दी हैं वर्षों बाद भी रवीन्द्र नाथ जी की कहानियां उतनी ही सच्ची और रोचक लगती हैं लेकिन रवीन्द्रनाथ केवल एक लेखक भर नही थे और आज हम भला उनकी बात क्यों कर रहे सब कुछ जानते है विस्तार से –

रवीन्द्रनाथ लेखक होने के साथ- साथ बांग्ला कवि, गीतकार, संगीतकार, कहानीकार, नाटककार, चित्रकार, रचनाकार और निबंध लेखक भी थे। उनकी ख्याति न केवल भारत भर में थी बल्कि विश्व भर में थी और आज उनकी 161 वीं जयंती (Rabindranath Tagore Birthday(161st)) हैं।

रवींद्रनाथ का जन्म (Rabindranath Tagore Birthday Date) 7 मई 1861 को पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में हुआ था।। देवेंद्र नाथ टैगोर जी के माता का नाम शारदा देवी और पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर था और रवींद्रनाथ अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे।

रवींद्रनाथ जी न केवल भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखा बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ के रचयिता भी थे। रवींद्रनाथ को कबीगुरु और गुरुदेव जैसे नामों से भी जाना जाता है।

जानिए क्या रहा PM के विदेशी दौरों का प्रभाव

विलक्षण प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर ने 8 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी थी। और 16 साल की उम्र में उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई। आगे चलकर इन्ही रवीन्द्रनाथ को अपनी रचना गीतांजलि के लिए साल 1913 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार मिला। रवीन्द्रनाथ पहले भारतीय थे जिन्हे ये सम्मान हासिल हुआ। वही बंगाली कैलेंडर के अनुसार, टैगोर का जन्म वर्ष 1268 (Rabindranath Tagore Birthday Date) में हुआ था

11 साल की उम्र में, वह अपने पिता के साथ भारत भर के दौरे पर गये थे। यात्रा के दौरान, उन्होंने शास्त्रीय संस्कृत के कवि कालिदास सहित प्रसिद्ध लेखकों की रचनाएँ भी पढ़ीं।

जब रवीन्द्रनाथ 15 साल के थे तब उन्होने अपनी मां को खो दिया था। रवीन्द्रनाथ का विवाह 24 साल की उम्र में मृणालिनी देवी के साथ हुआ। 1878 में टैगोर बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए और दो साल बाद बिना डिग्री के वापस आ गए। बचपन से ही शांति एवं प्रकृति प्रेमी होने के चलते सन् 1901 में शांति निकेतन की स्थापना कर गुरु-शिष्य परंपरा को नया आयाम दिया।

गांधी और टैगोर के रिश्ते –

गांधी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वदेशी की बात करते थे वही टैगोर गांधी के इस विचार से जीवन पर्यन्त सहमति रखते थे। टैगोर सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के तौर पर राष्ट्रवाद की जगह मानवता को ऊपर रखते थे।

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तमान असहमतियों के बाद भी सम्मान का भाव रखते “टैगोर और महात्मा गांधी ”

टैगोर कहते थे (Rabindranath Tagore Jayanti Quotes) –

“जब तक मैं जिंदा हूँ, मानवता के ऊपर देशभक्ति की जीत नहीं होने दूँगा”

लेकिन यह टैगोर ही थे  जो तमाम असहमति होने के बावजूद 1915 में मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी। जिसका विरोध बाद में अंबेडकर जी ने किया। अंबेडकर गांधी को महात्मा कभी नही मानते थे। आप गांधी और टैगोर के बीच की बातचीत और उनके रिश्तों को अच्छी तरीके से जानने के लिए “Tagore & Gandhi: Walking Alone, Walking Together” किताब भी पढ़ सकते है। इसके साथ टगोर के तमाम विचारों (Rabindranath Tagore Jayanti Quotes) को आप उन्हे समझने के लिए पढ़ सकते हैं।

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रवीन्द्र का यही मानवता को ऊपर रखने का नजरिया ही उनकी विश्व भर में ख्याति और स्वीकार्यता का कारण था और है भी। इन्ही विचारों के कारण अल्बर्ट आइंस्टीन भी उनसे काफी प्रभावित थे। टैगोर और आइंस्टीन 1930 और 1931 के बीच करीब चार बार मिलें।

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एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा व्यक्त हुए रवींद्रनाथ टैगोर और अल्बर्ट आइंस्टीन

रवींद्रनाथ टैगोर को 1915 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया था, जिसे उन्होंने 31 मई 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध के रूप में इसका त्याग कर दिया।

भारत में आज की तारीख में चल रहे अति राष्ट्रवादी बनने की दौड़ में टैगोर का मानवतावाद एक अलग लकीर खींचता है और हम सभी को एक शांति का रास्ता दिखाते हैं । टैगोर अपने अलग विचारों के साथ आज की तारीख में ट्रोल किये जा सकते है लेकिन ये उनका कद ही है कि उनके विचारों से असहमति रखने वाले भी उनको सम्मान देते है चाहे मजबूरी में ही क्यों न देना पड़े। उम्मीद है कि टैगोर के जयंती (Rabindranath Tagore Birthday) में आप सभी उन्हे पढ़े और जाने और बेहतर कल के निर्माण करें।

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