भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने व नये भूमि अधिग्रहण कानून लागू करने की मांग
आज कलेक्ट्रेट पर विभिन्न मजदूर संगठनों और किसान सभा ने संयुक्त रूप से जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया तथा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करने, मजदूर विरोधी कानूनों को खत्म करने, भूमि अधिग्रहण के नए कानून को लागू करने, सर्किल रेट में वृद्धि करने, 10% आबादी प्लॉट देने, नए कानून को लागू करने तथा लंबित आबादियों का तत्काल निस्तारण करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने सैकड़ों किसानों और मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारत की आज़ादी के इतिहास में एक खतरनाक समझौता है, जो न केवल देश के व्यापारिक हितों को गिरवी रखता है बल्कि भारत की संप्रभुता को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिकी दबाव में आकर कृषि आयातों पर 0% टैरिफ स्वीकार किया है, जबकि भारतीय निर्यात पर 3% से बढ़ाकर 18% तक टैक्स लगाया जा रहा है। इससे भारत का टेक्सटाइल उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा, क्योंकि अमेरिका ने वियतनाम और बांग्लादेश से कपड़ा आयात पर जीरो टैरिफ लागू कर रखा है।

किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि इस डील के तहत सस्ता कपास, पशुओं का चारा और शराब बिना टैक्स के भारत आएगी। अमेरिका के किसानों को लगभग ₹80,000 प्रति किसान सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत के किसानों को नगण्य सहायता मिलती है। ऐसे में भारतीय किसान सस्ते अमेरिकी कृषि आयात के सामने टिक नहीं पाएगा।
किसान सभा के जिला सचिव शिशांत भाटी ने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि भारत ने अमेरिकी दबाव में रुस से सस्ते तेल के आयात को बंद कर दिया। इस तरह का समझौता भारत के स्वाभिमान, आज़ादी और संप्रभुता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को किसी भी विदेशी दबाव में आकर देश के किसानों और मजदूरों के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए और इस डील को तुरंत खारिज करना चाहिए।
आज के धरना-प्रदर्शन में नरेश नागर, पप्पू भाटी, पप्पू ठेकेदार, रोहित भाटी, जयकरण सिंह, मुकेश, गुरप्रीत, एडवोकेट संदीप भाटी, सूले यादव, सुरेश यादव, विजय यादव, मुकुल यादव, दिनेश यादव, सुशील, विनोद भाटी, गजेंद्र खारी, अजय चौधरी (एडवोकेट), अरुण (एडवोकेट), ओम दत्त शर्मा, देशराज राणा, राहुल नागर, भगत सिंह चेची, सुधीर रावल, निशांत रावल, भोजराज रावल सहित सैकड़ों की संख्या में किसान एवं मजदूर उपस्थित रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।







