वंदे मातरम बजने पर खड़े नहीं हुए तो मिलेगी यह सजा!

नई दिल्ली। सरकार जमीनी मुद्दों की ओर तो देखने को तैयार नहीं पर भावनात्मक मुद्दों को लेकर खुलकर खेल रही है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में वंदे मातरम को लेकर अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों के मुताबिक कुछ ऑफिशियल मौकों पर इसके फॉर्मल गायन के दौरान खड़ा होना जरूरी कर दिया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक सभी राज्य, केंद्र  शासित प्रदेश, मंत्रालय और संवैधानिक संस्थाओं को प्रोटोकॉल को साफ करते हुए एक कम्युनिकेशन भेजा गया है। इससे कई नागरिकों के मन में एक जरूरी सवाल उठ रहा है कि अगर कोई वंदे मातरम के दौरान खड़ा नहीं होता तो क्या होगा और क्या पुलिस इसके लिए उसे गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

नया नियम कहां लागू होता है

 

नई गाइडलाइंस के मुताबिक सरकारी कर्मचारी, ऑफिशियल राज्य समारोह और स्कूलों में वंदे मातरम के दौरान खड़ा होना जरूरी है। राष्ट्रपति की मौजूदगी वाले इवेंट्स और पद्म अवार्ड जैसे नागरिक सम्मान समारोह में भी यह जरूरी है। ऐसी जगहों पर  वंदे मातरम का ऑफीशियली 6 वर्स वाला वर्जन बजाया जाएगा. यह लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड का होता है।

हालांकि यह नियम सिनेमा हॉल में लागू नहीं होता है. अगर वंदे मातरम किसी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील के हिस्से के तौर पर दिखाया जाता है तो यह नियम लागू नहीं होगा। उन स्थितियों में खड़ा होना जरूरी नहीं है और बैठे रहने पर कोई पेनल्टी नहीं लगेगी।

 

नियम का कानूनी आधार

 

सरकार ने वंदे मातरम के लिए भी वैसा ही सम्मान प्रोटोकॉल लागू करने का फैसला किया है जैसे प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 के तहत राष्ट्रगान के लिए लागू होते हैं। यह कानून पहले से ही राष्ट्रगान का जानबूझकर अपमान करने या फिर गाने में रुकावट डालने पर सजा का प्रावधान करता है। इसी तरह के स्टैंडर्ड को बढ़ाकर अधिकारियों का मकसद इस बात को पक्का करना है कि ऑफिशियल इवेंट्स के दौरान वंदे मातरम को औपचारिक सम्मान दिया जाए।

 

क्या सजा हो सकती है

 

अगर कोई व्यक्ति किसी ऑफिशियल फंक्शन के दौरान जानबूझकर वंदे मातरम में रुकावट डालता है, या उसका अपमान करता है तो कानून में 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। ऐसे मामलों में सबसे जरूरी चीज इरादा होती है। कानूनी नतीजे आमतौर पर जानबूझकर की गई गड़बड़ी या बेइज्जती से जुड़े होते हैं।

 

क्या पुलिस किसी को गिरफ्तार कर सकती है

 

अगर किसी कानूनी पब्लिक इवेंट के दौरान जानबूझकर अपमान या रुकावट डालने का साफ सबूत पेश होता है तो पुलिस कार्रवाई हो सकती है। गिरफ्तारी इस बात पर तय होगी कि संबंधित कानून के तहत कोई जुर्म साबित होता है या नहीं और मामला किस हालात का है। सिर्फ खड़े न होने पर बिना किसी परेशानी के अपने आप गिरफ्तारी नहीं हो जाती, जब तक के अधिकारी इसे जानबूझकर किया गया काम ना समझे।

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