प्रशांत किशोर (पीके), जन सुराज पार्टी के संस्थापक, ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपनी पार्टी की करारी हार (एक भी सीट न जीत पाने) के बाद आत्ममंथन के रूप में भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन व्रत और उपवास रखा। यह आश्रम वही जगह है जहां से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई थी। हार की पूरी जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए उन्होंने पूर्ण मौन में बिताए इस समय को गांधीजी की प्रेरणा से जोड़ा। शुक्रवार को व्रत तोड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मौन भंग किया और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
संपत्ति दान का ऐलान
मुख्य घोषणा: पिछले 20 वर्षों में अर्जित अपनी सारी अचल संपत्ति (दिल्ली में स्थित परिवार के घर को छोड़कर) वे जन सुराज पार्टी को दान कर देंगे। साथ ही, भविष्य में होने वाली कुल आय का 90% हिस्सा पार्टी के आंदोलन और सामाजिक योजनाओं पर खर्च करेंगे।
समर्थकों से अपील: हर जन सुराजी सदस्य से सालाना 1,000 रुपये का योगदान मांगा, ताकि संगठन को मजबूत वित्तीय आधार मिले और क्राउडफंडिंग के जरिए कम खर्च में चुनाव लड़े जा सकें। उन्होंने कहा, “जो नहीं देगा, उसके साथ हमारा कोई लेना-देना नहीं।”
समर्थकों से अपील: हर जन सुराजी सदस्य से सालाना 1,000 रुपये का योगदान मांगा, ताकि संगठन को मजबूत वित्तीय आधार मिले और क्राउडफंडिंग के जरिए कम खर्च में चुनाव लड़े जा सकें। उन्होंने कहा, “जो नहीं देगा, उसके साथ हमारा कोई लेना-देना नहीं।”
भविष्य की योजनाएं
बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान: 15 जनवरी 2026 से शुरू होगा। इसमें बिहार के सभी 1 लाख 18 हजार वार्डों में जाकर लोगों से संवाद किया जाएगा। खास फोकस महिलाओं पर होगा—खासकर उन लाखों महिलाओं पर जिन्हें सरकार ने चुनाव से पहले 10,000 रुपये देकर वोट ‘खरीदे’। पीके इन महिलाओं को 2 लाख रुपये के लोकलुभावन वादे के फॉर्म भरवाने में मदद करेंगे, ताकि वे सरकार को जवाबदेह बनाएं और नीतीश कुमार के खिलाफ ‘हथियार’ बनें।
राजनीतिक प्रतिबद्धता: अब किसी अन्य पार्टी के लिए कंसल्टेंसी नहीं करेंगे। पूरा फोकस बिहार पर रहेगा। चुनाव हार गए, लेकिन “लड़ाई खत्म नहीं हुई”—जन सुराज आने वाले समय में बड़ी ताकत बनेगा।
राजनीतिक प्रतिबद्धता: अब किसी अन्य पार्टी के लिए कंसल्टेंसी नहीं करेंगे। पूरा फोकस बिहार पर रहेगा। चुनाव हार गए, लेकिन “लड़ाई खत्म नहीं हुई”—जन सुराज आने वाले समय में बड़ी ताकत बनेगा।
सरकार पर हमले
बिहार सरकार (नीतीश कुमार) पर गंभीर आरोप लगाए: चुनाव से ठीक पहले गरीब वोटरों को 10,000 रुपये देकर वोट खरीदे गए, और 2 लाख रुपये का वादा करके जनता को भ्रमित किया। यह बिहार चुनाव में “पैसे से वोट खरीदने का खुला खेल” था।
नीतीश कुमार को “ईमानदार मुख्यमंत्री” मानना अब मुश्किल, क्योंकि कैबिनेट में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को जगह दी गई।
नीतीश कुमार को “ईमानदार मुख्यमंत्री” मानना अब मुश्किल, क्योंकि कैबिनेट में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को जगह दी गई।
पीके ने गांधीजी की सिद्धांतों से प्रेरित होकर इस आंदोलन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। यह ऐलान जन सुराज को नई ऊर्जा दे सकता है, खासकर महिलाओं और युवाओं के बीच। व्रत तोड़ने का तरीका भी प्रेरणादायक रहा—स्कूल की छात्राओं ने उन्हें जूस पिलाकर मौन समाप्त कराया।








