पटना। जन सुराज पार्टी ने 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। वोट शेयर भी बेहद कम रहा, जो उन्हें ‘वोटकटवा’ बनने से भी रोक गया न तो विपक्ष को नुकसान पहुंचा, न ही एनडीए को। एनडीए ने शानदार जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन भी पीछे रह गया।
किशोर ने चुनाव से पहले दावा किया था कि जन सुराज या तो 10 से कम या 150 से ज्यादा सीटें जीतेगी। अगर 10 सीटें न मिलीं, तो वे राजनीति से ‘संन्यास’ ले लेंगे—यानी पूरी तरह संन्यास। अब जब पार्टी का स्कोर जीरो है, तो सवाल वाजिब है: क्या वे वादा निभाएंगे?
फिलहाल, किशोर की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। उनकी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है कि चुनावी हार की समीक्षा की जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स में अटकलें हैं कि संन्यास लेना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने तीन साल की मेहनत लगाई थी। सोशल मीडिया पर भी यूजर्स उन्हें चिढ़ा रहे हैं, लेकिन PK ने अब तक चुप्पी साध रखी है।
मेरी राय? राजनीति में वादे अक्सर कागज पर रह जाते हैं। अगर किशोर वाकई संन्यास लेते हैं, तो ये बिहार की राजनीति के लिए सरप्राइज होगा। वरना, ये उनकी साख पर एक और सवालिया निशान लगेगा। आने वाले दिनों में उनकी प्रतिक्रिया पर नजर रखें—शायद जल्द ही कोई ट्विस्ट आए!
फिलहाल, किशोर की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। उनकी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है कि चुनावी हार की समीक्षा की जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स में अटकलें हैं कि संन्यास लेना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने तीन साल की मेहनत लगाई थी। सोशल मीडिया पर भी यूजर्स उन्हें चिढ़ा रहे हैं, लेकिन PK ने अब तक चुप्पी साध रखी है।
मेरी राय? राजनीति में वादे अक्सर कागज पर रह जाते हैं। अगर किशोर वाकई संन्यास लेते हैं, तो ये बिहार की राजनीति के लिए सरप्राइज होगा। वरना, ये उनकी साख पर एक और सवालिया निशान लगेगा। आने वाले दिनों में उनकी प्रतिक्रिया पर नजर रखें—शायद जल्द ही कोई ट्विस्ट आए!








