Power Game : एक भ्रष्टाचारी को हटाकर दूसरे को सत्ता पर बैठा देते हैं हम ! 

जिसको सत्ता से हटवाने को आंदोलन किया गया, उसी के लिए फिर से भरने लगे हैं हुंकार 

सोनिका शर्मा

हमने दो बड़े आंदोलन देखे हैं। दोनों ही आंदोलनों में हमने एक भ्र्ष्ट सरकार को हटाकर दूसरे दूसरी भ्र्ष्ट सरकार को बैठाने का काम किया है| आज हम पढ़े-लिखे हैं, तकनीकि युग में जी रहे हैं मगर हमारे उठाये गये कदम उस आदमयुग की याद दिलाते हैं। मतलब कुछ गलत हुआ, हमने हुंकार भरी, हुंकार भरवाने वाला वही पुराना भ्रष्टाचारी था, जिसे हमने ही नीचे उतारा था| अब हम हुंकार भरते हुये उसी भ्रष्टाचारी को बैठाने के लिये सत्तासीन भ्रष्टाचारी के खिलाफ हुंकार भरते हैं और पुराने भ्रष्टाचारी को फिर से सत्तासीन कर देते हैं| क्या हम इनके दलाल हैं? क्या हम आज भी बेवकूफ हैं? क्या हम आज भी जाहिल व अनपढ़ है ?

समझिये एक उड़ती पतंग यदि मजबूत डोर से बंधी नहीं होगी तो उसका क्या होगा? हमें ऐसी मजबूत डोर बनना है जो मजबूत हाथों के द्वारा पतंग को नियंत्रित कर सके| मजबूत डोर का मतलब है कि, ऐसे नियम, कायदे, कानून जिनके सहारे एक मशीन (चाहे वह शरीर की मशीन हो या मनुष्य द्वारा निर्मित मशीन) अपने उत्पाद को गुणवत्ता के साथ एक समान उत्पादित करती है|
यह डोर उन मजबूत हाथों में होनी चाहिये जिसपर हम सभी आँख मूंद कर भरोसा कर सकें, मतलब बुद्धिजीवियों का वह समूह जिसने मानवता, इंसानियत व चरित्र के लिये अपना संपूर्ण जीवन अर्पण कर रखा है और पतंग वह होगी जिन्हें सत्तासीन किया गया होगा|
आईये, समझने की कोशिश कीजिये, जब हम किसी फैक्ट्री या कारखाने की स्थापना करते हैं तो क्या हम उस कारखाने की सफलता के लिये कारखाने से संबंधित नियम, कायदे, कानून बनाकर काम नहीं करते हैं? यदि करते हैं तो फिर इतनी बड़ी मुहिम को अंजाम देने से पहले हमें नियम, कायदे, कानून नहीं बनाने चाहिये?

सत्ता में पहुँचनेवाले को किस प्रकार की डोर (नियम, कायदे, कानून) से बांधकर रखना चाहिये| क्या हम यह कदम आगे बढ़ाने से पहले तय नहीं कर सकते जैसे कि, हमारे संगठन ने संगठन के सदस्यों के लिये नियमों के तहत सदस्य बनाने का मसौदा रखा है (देखिये, लिंक पर http://www.code47.bvbja.com) ठीक उसी प्रकार हम कदम बढ़ाने से पहले नियम, कायदे, कानून बना सकते हैं|

सोचिये कि, क्या आपके साथी ऐसे होने चाहिये?

1. उस रिक्शेवाले के समान जो वक्त का फायदा उठाकर आपको ब्लैकमेल करता है और कहता है कि, रात के 8:00 बजे के बाद मैं डबल किराया लूँगा|

2. एक फल वाले जो इसलिये महँगा फल बेच कर आपको ब्लैकमेल कर रहा है क्योंकि उसे पता है कि, आप उसके सिवा किसी और के पास नहीं जा सकते|

3. वह वकील जो जानकारी हासिल होने के बाद पीड़ित को ब्लैकमेल करता है कि यदि आपने मुझे वकील नहीं बनाया तो मैं तुम्हारे सभी राज विपक्ष के सामने रख लूँगा|

4.  वह धनपती जो अपने आपको समाज सेवक कहता है मगर एक समाज सेवा में अपनी ईजाद की गई तकनीक का इस्तेमाल मुफ्त में करने की सोच रखने वाले के साथ गुलाम के समान व्यवहार करता है और उसके अविष्कार को अपने नाम लिखवाता है|

5. एक मकान मालिक जो देखता है कि, किरायेदार ने काफी खर्च करके अपना व्यापार जमाया है और उससे अधिक पैसा मांगेंगे तो उसे देना पड़ेगा|

6. एक डॉक्टर जो मरीज की मजबूरी देखकर उसे लूटता है|

*नियम, कायदे, कानून बनाने से पहले हमें यह देखना होगा कि, हम किस मुहिम पर और क्यों जा रहे हैं?* हमें यह देखना होगा कि, ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से हमें ऐसी मुहिम की तैयारी करनी पड़ रही है? हमें यह देखना होगा कि, ऐसा हुआ क्यों? एक छोटे से उदाहरण से समझिये,
एक बच्चा तैरना सीखता चाहता है मगर डरता है कि, कहीं डूब ना जाये? यदि उस बच्चे को सुरक्षा के उपरकरण दिये जायेंगे तो वह बिना किसी डर के तालाब, नदी या स्वीमिंग पूल में कूद जायेगा| ठीक इसी प्रकार हमारे देश में भगत सिंह बहुत हैं मगर उनकी सुरक्षा के लिये साधन नहीं है परिणाम! जो भगत सिंह गलत का विरोध करने के लिये मैदान में आता है| उसपर भ्रष्टाचारियों के समूह द्वारा हमला कर दिया जाता है और वह अकेला पढ़कर शहीद हो जाता है जिसकी हालत देखकर हजारों भगत सिंह पैदा होने से पहले ही मर जाते हैं| हम ऐसे भगतसिंह को जिंदा रखने की कोशिश क्यों नहीं करते?
आज हम ऐसी किसी भी मुहिम की तैयारी करते हैं तो हमारे मुखिया कौन होते हैं? इसे समझने की जरूरत हैं| ये मुखिया वे होते हैं जिन्होंने अपने गली, मौहल्ले में अपने छुटभइय्या बदमाशों की फौज खड़ी कर रखी होती है जिनका उनकी गली मौहल्ले के चौराहे पर अवैध कब्जा रहता है जो इस फौज की ‘दारू पार्टी’ करके उसे अपनी उंगलियों पर नचाये रखते हैं| देश के 99% जगहों पर धार्मिक उत्सव के नाम पर इन्हीं गुंडों का बोलबाला है जिनकी चिट्ठी व रसीदें (इतने हजार रु. की रसीद काट दो) किसी भी बड़े से बड़े व्यापारी या रहिवासी की हवा टाईट कर देती है| अगर ऐसे भ्रष्ट नेता, बलात्कारी, डाकू, भ्रष्टाचारी हमारी मुहिम के सदस्य होंगे तो क्या हम एक डाकू को हटाकर दूसरे डाकू को बैठाने वाले दलाल साबित नहीं होंगे| बहुत कुछ है, लिखने जायेंगे तो पेज के पेज भर जायेंगे जिन्हें पढ़नेवाला भी कोई नहीं होगा सिर्फ निम्न तथ्यों से मैं समझाने की कोशिश कर सकता हूँ|
जैसे कि, तैरना सीखनेवाले को सुरक्षा का साधन चाहिये| ठीक उसी प्रकार भगत सिंह को भी सुरक्षा का साधन चाहिये, यदि सुरक्षा का साधन दिया गया तो निश्चित ही लाखों भगत सिंह, भ्रष्टाचारियों के सामने सीना तान कर खड़े हो जायेंगे| परिणाम! भ्रष्टाचारियों को अपने कदम पीछे खींचने होंगे| *अब प्रश्न पैदा होता है कि, “ना नौ मन तेल होगा ना राधा रानी नाचेगी”|*
यही नकारात्मक सोच ही हमें हमेशा गुलाम बनाती है कि, जब मेरे पास BMW या मर्सिडीज आयेगी तभी मैं आगे बढ़ूँगा जबकि हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिये बल्कि जो संसाधन हमारे पास मौजूद है| उसका बेहतरीन इस्तेमाल करना चाहिये, केवल यह नहीं कहना चाहिये कि, मोदी चोर है बल्कि यह कहना चाहिये कि, मोदी क्यों चोर है? आज सरकारी संसाधनों में हमारे भगत सिंह की सुरक्षा के लिये कौन-कौन से साधन उपलब्ध है उसे समझने की जरूरत हैः*

(लेखिका सोशलिस्ट पार्टी इंडिया से जुडी हैं)

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